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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Himachal Huge loss from Pandoh to Manali no trace of fourlane road at six places

कराहते पहाड़: हिमाचल में पंडोह से मनाली तक फोरलेन पर भारी नुकसान, छह जगह सड़क का नामोनिशान नहीं; जानें

Sat, 13 Sep 2025 05:00 AM IST
अंकेश डोगरा संजय भारद्वाज, मनाली।
संजय भारद्वाज, मनाली। Published by: अंकेश डोगरा Updated Sat, 13 Sep 2025 05:00 AM IST
सार

Himachal Disaster : मंडी जिले के पंडोह से मनाली तक बना फोरलेन का हिस्सा तीन साल में ही ध्वस्त हो गया। गलत खोदाई से भारी बरसात में पहाड़ जगह-जगह दरक रहे हैं। कई परिवार उजड़ गए। पढ़ें पूरी खबर...

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Himachal Huge loss from Pandoh to Manali no trace of fourlane road at six places
मनाली-चंडीगढ़ फोरलेन पर थलौट के समीप गिरा पहाड़ों से मलबा। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

जीवन रेखा मानी जाने वाली सड़कें हिमाचल में कई जगह जीवन लील रही हैं। लोगों को बेघर कर रही हैं। कारण है पहाड़ के मिजाज को समझे बिना नियमों को दरकिनार कर बनाईं सड़कें। मंडी जिले के पंडोह से मनाली तक बना फोरलेन इसका जीता-जागता सबूत है। चंडीगढ़-मनाली नेशनल हाईवे का यह हिस्सा तीन साल में ही ध्वस्त हो गया। इसमें सबसे बड़ा कारण फोरलेन तैयार करने के लिए पहाड़ों की गई 90 डिग्री में की गई खोदाई। ऐसी खोदाई से भारी बरसात में पहाड़ जगह-जगह दरक रहे हैं। कई परिवार उजड़ गए। लोगों के घर टूट गए तो कई टूटने के कगार पर हैं। लोग अपने घर छोड़कर दूसरी जगह शरण लिए हुए हैं।

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भारी बारिश और भूस्खलन से पंडोह से मनाली तक फोरलेन में 30 से 35 जगह सड़क को भारी नुकसान हुआ। छह जगह ऐसी हैं, जहां 50 से 200 मीटर तक सड़क का नामोनिशान तक मिट गया है। कैंची मोड़ से पनारसा तक फोरलेन सड़क डबललेन रह गई है। कहीं सड़क धंस गई तो कहीं पहाड़ दरकने से ध्वस्त हो गई है। कुल्लू से मनाली तक रायसन, डोभी, 14 मील, 17 मील, बिंदु ढांक, आलू ग्राउंड और वोल्वो बस स्टैंड के समीप सड़क सड़क का नामोनिशान मिट गया है।

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लोगों का कहना है कि प्रकृति के अवैज्ञानिक दोहन के कारण नुकसान हुआ है। प्रारंभिक दौर में जो सर्वे किया गया था, उसे कई जगह बदल दिया गया। पहाड़ों की खोदाई 80 से 90 डिग्री में हुई, जिसके कारण पहाड़ दरकने लगे। नदी-नालों की संरचना को जाने बिना कई जगह ब्यास नदी के किनारे फोरलेन का निर्माण हुआ। भारी बरसात में जब ब्यास ने अपना रौद्र रूप दिखाया तो फोरलेन को कई जगह अपने साथ बहा ले गई। ऐसा नहीं है कि ब्यास नदी पहली बार इतने उफान पर थी। हर बरसात में ब्यास का ऐसा ही रौद्र रूप बरसात का देखने को मिलता है। इसके बावजूद नदी के तट पर जहां भी सड़क बनी, वहां सुरक्षा के ठोस प्रबंध नहीं हुए। सड़क की ऊंचाई ब्यास नदी के जलस्तर से बेहद कम रखी गई। पंडोह के समीप दयोड, थलौट समेत कई जगह पहले जो सर्वे हुआ, उसके मुताबिक कार्य नहीं हुआ।

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दयोड के रहने वाले परमदेव ने कहा कि उनके मकान के नीचे से सड़क बननी थी, लेकिन बाद में सर्वे बदल दिया। जो जगह अधिग्रहित की थी, वहां मिक्सचर प्लांट लगा। प्लांट की कंपन से जमीन हिल गई जो अब धंस रही है। उनके मकान भी ढह गए। थलौट के पूर्व वार्ड पंच शेर सिंह ने बताया कि सड़क के लिए पहाड़ों की खोदाई गलत तरीके से हुई। सीधी खोदाई से भूस्खलन हो रहा है। टनीपरी, ताऊंला, थलौट, फागू गांव को खतरा पैदा हो गया है। भूस्खलन रोकने के लिए लगाए रोकबोल्ट भी जाली समेत ढह गए। थलौट के टेक सिंह का कहना है कि सड़क का सर्वे बदला गया। पहाड़ सीधे खोदे गए। यहां कई घर धंस गए तो कई टूट गए। लोग उजड़ गए हैं। कई सत्संग भवन में रह रहे हैं तो कई रिश्तेदारों के पास शरण लिए हुए हैं। 

गडकरी ने भी उठा चुके डीपीआर बनाने वाली एजेंसियों पर सवाल
बरसात में मंडी-मनाली फोरलेन सड़क के आसपास भारी तबाही के बाद केंद्रीय राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी भी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) बनाने वाली एजेंसियां सवाल उठा चुके हैं। उनका कहना था कि जान माल के इस भारी नुकसान के लिए ये एजेंसियां जिम्मेदार हैं। बिना विस्तृत अध्ययन के घर बैठे गूगल की मदद से डीपीआर बनाई जा रही हैं।

साल 2023 में आई बाढ़ से भी नहीं लिया सबक
पर्यटन नगरी मनाली तक पहुंचने का सफर सुगम और आरामदायक बनाने के लिए हजारों करोड़ रुपये खर्च कर तैयार किया फोरलेन अब जानलेवा बन गया है। वर्ष 2023 में बरसात में आई भयंकर बाढ़ से भी सबक नहीं लिया गया। जहां 2023 में नुकसान हुआ था, इस बार भी उन स्थानों पर पहले से ज्यादा मार पड़ी। यहां बाढ़ में आया मलबा बिछाकर सड़क बनी थी। सुरक्षा के नाम पर कुछ क्रेटवाल लगा दी गई थीं। अस्थायी तौर पर बनी इस सड़क का स्थायी तौर पर समाधान नहीं निकाला। इसका परिणाम ये हुआ कि अस्थायी सड़क तो बह ही गई, साथ में पहले से बनी सड़क का भी सफाया हो गया।

नदी-नालों का नहीं किया भूवैज्ञानिक अध्ययन
अटल टनल के निर्माण के दौरान कार्य कर चुके ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) खुशहाल ठाकुर का कहना है कि नदी-नालों का भूवैज्ञानिक अध्ययन किए बिना ही फोरलेन का कार्य हुआ। ड्रेनेज सिस्टम सही नहीं बनाए गए। कलवर्ट कई जगह बहुत छोटे बने हैं, जो नालों के उफान में मलबे से भर गए।

फोरलेन निर्माण में पहाड़ों की भूसंरचना का सही अध्ययन नहीं हुआ। एक फोरलेन के बजाय दो-दो लेन की अलग-अलग सड़क बन सकती थी। इससे पहाड़ों की ज्यादा कटाई नहीं होती। रायसन से मनाली तक सड़क किनारे पक्के डंगे ऊंचे उठाने चाहिए थे और उनकी नींव चार से पांच मीटर गहरी होती। साथ ही डीपीआर बनाने और कार्य में स्थानीय एक्सपर्ट या सरकारी विभाग को भी शामिल किया जाना चाहिए था। - केके शर्मा, सेवानिवृत्त अधीक्षण अभियंता, लोक निर्माण विभाग

कुल्लू से मनाली तक का सर्वे ही सवालों के घेरे में है। 2023 में जहां नुकसान हुआ था, वहां पक्के डंगे नहीं लगे। मलबा डालकर टारिंग की गई। इससे इस बार ज्यादा नुकसान हुआ। साथ ही राज्य सरकार के अधीन कुल्लू-मनाली वामतट और कंडी कटोला सड़क की भी सुध लेने की जरूरत है। सड़कों की खस्ता हालत का मनाली के पर्यटन कारोबार पर असर पड़ रहा है। - मुकेश ठाकुर, निवर्तमान अध्यक्ष, होटलियर एसोसिएशन

फोरलेन निर्माण के दौरान स्थानीय लोगों की सुनवाई नहीं हुई। डीपीआर बनाने में लोगों की राय नहीं ली गई। पहाड़ या तो ढलान में खोदे जाने थे या सीढ़ीदार। पहाड़ सीधे खोदे जो अब सड़क पर आ रहे हैं। सर्वे भी कई जगह बदला गया है। - दिनेश सेन, फोरलेन संघर्ष समिति के अध्यक्ष

सड़क बनाने से पहले होता है वैज्ञानिक अध्ययन
जब भी सड़क का निर्माण होता है तो पहले वैज्ञानिक अध्ययन किया जाता है। इसमें सौ साल के इतिहास और ज्योलॉजिकल स्थिति को आधाऱ माना जाता है। इस साल और 2023 में बारिश ने पिछले सौ साल के रिकॉर्ड तोड़े हैं। नुकसान सिर्फ फोरलेन का ही नहीं हुआ, हिमाचल की अन्य सड़कों को भी पहुंचा है। कुल्लू से मनाली तक अध्ययन करवाया गया है। सौ साल के इतिहास को आधार बनाकर अब कुछ स्पॉट की डीपीआर बनी है। बरसात के बाद इसका कार्य शुरू होगा। हिमाचल में बार बार दरक रहे पहाड़ों का भी अध्ययन करवाया जाएगा। इसके बाद जो गाइडलाइन आएंगी, वे पूरे हिमाचल के लिए होगी। -वरुण चारी, एनएचएआई के परियोजना अधिकारी
 
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