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Himachal News: हिमाचल हाईकोर्ट ने कहा- कानून किसी व्यक्ति को वह करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता जो असंभव है

Tue, 02 Sep 2025 01:58 AM IST
अंकेश डोगरा संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला Published by: अंकेश डोगरा Updated Tue, 02 Sep 2025 01:58 AM IST
सार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने भर्ती और पदोन्नति नियमों में उस शर्त को खारिज कर दिया, जिसमें उन्हें एक निश्चित समय सीमा के भीतर स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के लिए कहा गया था। अदालत ने इसे असंभव करार दिया। जानें पूरा मामला...

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Himachal High Court said law cannot force a person to do what is impossible
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक स्टेनोग्राफर को राहत देते हुए उनकी वरिष्ठ स्केल स्टेनोग्राफर के पद पर पदोन्नति को बरकरार रखा है। न्यायालय ने प्रतिवादियों (राज्य) को निर्देश दिया कि वे याचिकाकर्ता को 22 अक्तूबर 2016 से वरिष्ठ स्केल स्टेनोग्राफर के रूप में जारी रखें और सभी परिणामी लाभ प्रदान करें। विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश सुशील कुकरेजा की खंडपीठ ने भर्ती और पदोन्नति नियमों में उस शर्त को खारिज कर दिया, जिसमें उन्हें एक निश्चित समय सीमा के भीतर स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के लिए कहा गया था। अदालत ने इसे असंभव करार दिया।

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हाईकोर्ट ने पाया कि आरएंडपी नियमों में संशोधन के बाद भी चार अन्य केवल मैट्रिक पास व्यक्तियों को सीनियर स्केल स्टेनोग्राफर के रूप में पदोन्नत किया गया और उन्हें कभी वापस नहीं किया गया। कोर्ट ने कानून के एक सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा कि कानून किसी व्यक्ति को वह करने के लिए मजबूर नहीं करता जो असंभव है। इसके अलावा कोर्ट ने यह भी नोट किया कि याचिका की लंबित रहने के दौरान याचिकाकर्ता ने दिसंबर 2023 में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय से कला स्नातक की डिग्री प्राप्त कर ली थी।

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याचिकाकर्ता ने हिमाचल प्रदेश राज्य प्रशासनिक ट्रिब्यूनल में एक आवेदन दायर किया था, जो बाद में हाईकोर्ट में ट्रांसफर हो गया। उन्होंने सीनियर स्केल स्टेनोग्राफर पद के लिए भर्ती और पदोन्नति नियमों (आरएंडपी नियम) में 14 फरवरी 2011 को हुए संशोधन को चुनौती दी थी। इस संशोधन में जूनियर स्केल स्टेनोग्राफर से सीनियर स्केल स्टेनोग्राफर के पद पर पदोन्नति के लिए बैचलर डिग्री को अनिवार्य योग्यता बना दिया गया था।

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आठ महीने की अवधि में स्नातक की डिग्री प्राप्त करना असंभव
याचिकाकर्ता को 22 अक्टूबर 2016 को सीनियर स्केल स्टेनोग्राफर के पद पर पदोन्नत किया गया था, लेकिन शर्त यह थी कि उन्हें 30 जून 2017 तक स्नातक की डिग्री प्राप्त करनी होगी। ऐसा न करने पर उन्हें वापस जूनियर स्केल स्टेनोग्राफर के पद पर भेज दिया जाएगा। याचिकाकर्ता ने इस शर्त को मनमाना और असंभव बताते हुए चुनौती थी। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि लगभग आठ महीने की अवधि में स्नातक की डिग्री प्राप्त करना असंभव था। हाईकोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए राकेश कुमार को सीनियर स्केल स्टेनोग्राफर के पद पर बने रहने का निर्देश दिया है।
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