Himachal: नेता की सिफारिश पर तबादला आदेश हाईकोर्ट ने किया रद्द, की सख्त टिप्पणी
प्रदेश हाईकोर्ट ने राजनीतिक सिफारिश पर किए गए तबादलों पर सख्त टिप्पणी करते हुए बिजली बोर्ड कर्मचारी का ट्रांसफर आदेश रद्द कर दिया।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राजनीतिक सिफारिश पर किए गए तबादलों पर सख्त टिप्पणी करते हुए बिजली बोर्ड कर्मचारी का ट्रांसफर आदेश रद्द कर दिया। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने कहा कि प्रशासनिक आवश्यकता के बिना राजनीतिक दबाव में किया गया तबादला कानूनन गलत है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों की तैनाती का निर्णय संबंधित विभाग या बोर्ड को स्वतंत्र रूप से लेना चाहिए न कि किसी बाहरी व्यक्ति या नेता के दबाव में। सुनवाई के दौरान अदालत ने पूछा कि तबादले की सिफारिश करने वाला निजी प्रतिवादी कौन है।
तबादला प्रशासनिक अनिवार्यता या जनहित में होना चाहिए: कोर्ट
इस पर जानकारी दी गई कि वह सरकाघाट से पिछला विधानसभा चुनाव हार चुके एक स्थानीय नेता हैं। कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि किसी कर्मचारी का तबादला केवल किसी नेता की मांग पूरी करने के लिए नहीं किया जा सकता। यदि कर्मचारी का कार्यकाल पूरा हो चुका है, तब भी तबादला प्रशासनिक अनिवार्यता या जनहित में होना चाहिए। अदालत ने बोर्ड को आदेश दिया कि ट्रांसफर करते समय याचिकाकर्ता की पारिवारिक परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाए। याचिकाकर्ता मंडी जिले के सरकाघाट में कार्यरत थे। 25 मार्च को उनका तबादला जनजातीय क्षेत्र केलांग कर दिया गया। इस आदेश को उन्होंने कोर्ट में चुनौती दी।
सेवानिवृत्ति के बाद पदोन्नति की मांग करने वाली याचिका खारिज
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद पिछली तारीख से पदोन्नति की मांग करने वाली याचिकाएं विचारणीय नहीं है। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने याचिका को पूरी तरह से खारिज करते हुए कहा कि जब याचिकाकर्ता सेवा में थे, तब उन्होंने अदालत का रुख नहीं किया। याचिकाकर्ता ने सेवानिवृत्ति के बाद याचिका दायर की। अदालत ने कहा किसी भी कर्मचारी को पिछली तारीख से तब तक पदोन्नति या वरिष्ठता नहीं दी जा सकती, जब तक वह उस काडर में औपचारिक रूप से शामिल न हुआ हो। सेवाकाल के दौरान उन्होंने समय पर डीपीसी करने के लिए विवश करने के लिए कोई कानूनी कदम नहीं उठाया। इसके अलावा सेवा में रहते हुए उनके किसी जूनियर को उनके ऊपर तरजीह दे प्रमोट नहीं किया गया था।
चेक बाउंस मामले में छह माह जेल, जुर्माने की सजा बरकरार
प्रदेश हाईकोर्ट ने चेक बाउंस मामलों में कड़ा रुख अपनाया है। ऐसे ही एक मामले में न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने आरोपी को निचली अदालतों की ओर से सुनाई गई 6 महीने की साधारण कारावास और 3.50 लाख रुपये मुआवजे की सजा को सही ठहराते हुए बरकरार रखा है। अदालत ने आपराधिक पुनरीक्षण याचिका को पूरी तरह खारिज करते हुए आरोपी को आदेश दिया है कि वह 15 दिनों के भीतर ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण करे। शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच दोस्ताना संबंध थे। शिकायतकर्ता ने आरोपी को उनके मकान की मरम्मत और बेटी की शादी के लिए 3 लाख रुपये दिए थे। इस कर्ज को चुकाने के लिए आरोपी ने 1 जनवरी 2007 को पंजाब नेशनल बैंक का एक चेक जारी किया था। पर्याप्त राशि न होने के कारण यह बाउंस हो गया।
अतिक्रमण के खिलाफ चुनाव याचिकाओं की होगी सुनवाई
हाईकोर्ट में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के आरोपियों के खिलाफ दायर कई याचिकाओं पर सुनवाई की। न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत ने कहा कि सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के आरोपियों के खिलाफ रिट याचिकाएं विचारणीय नहीं है। इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने अदालत से नए सिरे से चुनाव याचिका दायर करने की अनुमति मांगी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर दिया। इसके बाद अदालत ने याचिकाकर्ताओं की ओर से रिट याचिकाओं को वापस लेने के बाद खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता अब हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 175 और धारा 162 के तहत उपलब्ध वैधानिक उपाय को अपनाते हुए चुनाव याचिका दायर करेंगे। दायर याचिकाओं में अदालत से मांग की थी कि प्रतिवादी उम्मीदवार को पंचायत चुनाव में भाग लेने से रोका जाए।