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HP High Court : हिमाचल हाईकोर्ट ने निचली अदालत के गैर-जमानती वारंट किए खारिज, जमानत बहाल; जानें पूरा मामला

Sat, 30 Aug 2025 06:00 AM IST
अंकेश डोगरा भारती मेहता, संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला
भारती मेहता, संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला Published by: अंकेश डोगरा Updated Sat, 30 Aug 2025 06:00 AM IST
सार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अदालतों को व्यक्तियों की स्वतंत्रता के अधिकार का सम्मान करना चाहिए और वारंट जारी करने से पहले उचित प्रक्रिया का पालन करना चाहिए। जानें पूरा मामला...

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Himachal High Court dismissed the non-bailable warrants of the lower court, restored bail know the whole case
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने निचली अदालत की ओर से जारी किए गए 6 अगस्त और 5 नवंबर 2024 के गैर-जमानती वारंट के आदेशों को खारिज कर दिया है। अदालत ने याचिका कर्ता की रद्द की गई जमानत को तत्काल प्रभाव से बहाल कर दिया और उनके जमानती मुचलकों को भी पुनर्जीवित करने का आदेश दिया है।

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न्यायाधीश विजेंद्र सिंह की अदालत ने निर्देश दिए कि यदि याचिकाकर्ता का जमानतदार अब उनकी जमानत नहीं लेना चाहता है तो याचिकाकर्ता को निचली अदालत में पेश होकर 7 दिन के भीतर नए जमानत मुचलके प्रस्तुत करने होंगे। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद पाया कि निचली अदालत का आदेश कानून के बुनियादी सिद्धांतों के खिलाफ है। कोर्ट ने कहा, अदालतों को व्यक्तियों की स्वतंत्रता के अधिकार का सम्मान करना चाहिए और वारंट जारी करने से पहले उचित प्रक्रिया का पालन करना चाहिए। गैर जमानती वारंट जारी करने से पहले मजिस्ट्रेट को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आरोपी की उपस्थिति जमानती वारंट से नहीं हो सकती। जमानती वारंट मनमाने ढंग से जारी नहीं किए जाने चाहिए उन्होंने जोर देकर कहा कि वारंट जारी करने से पहले अदालतों को मामले की गंभीरता, आरोपी का पिछला आचरण और उसके फरार होने की संभावना जैसे कारकों पर विचार करना चाहिए।

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याचिकाकर्ता के खिलाफ भारतीय दंड संहिता ए की धारा 306 आत्महत्या के लिए उकसाने के तहत 31 मार्च 2022 को एक एफआईआर दर्ज की गई थी। बाद में उन्हें हाईकोर्ट से 15 जून 2022 को जमानत मिल गई थी। मामले की जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने निचली अदालत में चार्जशीट दाखिल की। 6 अगस्त 2024 को मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता कोर्ट ने अपने वकील को पेश न होने के लिए आवेदन देने का निर्देश दिया था।लेकिन वकील न तो खुद पेश हुए और न ही आवेदन दायर किया। इसके चलते निचली अदालत (ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट शिमला) ने याचिकाकर्ता के निजी और जमानती मुचलकों (बेल बॉन्ड्स) को रद्द कर दिया और उनके खिलाफ सीधे गैर जमानती वारंट (नॉन बेलेबल वारंट) जारी कर दिए।

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