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हिमाचल: सीएम सुक्खू बोले-जल अधिकारों और ऊर्जा क्षेत्र में हिमाचल के हितों की लड़ाई रहेगी जारी

Tue, 15 Sep 2026 08:24 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Tue, 15 Sep 2026 08:24 PM IST
सार

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि इस समझौते के अनुसार हिमाचल के लिए सबसे बड़ा लाभ यह है कि किशाऊ बांध से उत्पादित होने वाली 211 मेगावाट बिजली पर हजारों करोड़ का खर्चा आना था, वह अब हिमाचल को वहन नहीं करना पड़ेगा। यह सारा खर्च वही राज्य वहन करेंगे, जो पानी का उपयोग करेंगे। 

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Himachal: CM Sukhu says the fight for Himachal's interests regarding water rights and the energy sector will c
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि किशाऊ बांध परियोजना से हिमाचल प्रदेश को बड़ा आर्थिक लाभ होगा। उन्होंने कहा कि इस समझौते के अनुसार हिमाचल के लिए सबसे बड़ा लाभ यह है कि किशाऊ बांध से उत्पादित होने वाली 211 मेगावाट बिजली पर हजारों करोड़ का खर्चा आना था, वह अब हिमाचल को वहन नहीं करना पड़ेगा। यह सारा खर्च वही राज्य वहन करेंगे, जो पानी का उपयोग करेंगे। इससे हिमाचल के करीब 3,000 करोड़ रुपये बचेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल के इतिहास में यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। प्रदेश के जल संसाधनों को हमेशा से बहता हुआ सोना कहा जाता रहा है, लेकिन अब हिमाचल अपने जल संसाधनों से आर्थिक लाभ प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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मंगलवार को नई दिल्ली में किशाऊ विद्युत परियोजना पर विभिन्न राज्यों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के बाद पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में सीएम ने कहा कि हिमाचल देश को प्रति वर्ष लगभग 90,000 करोड़ रुपये की पारिस्थितिकी सेवाएं देता है। इनमें स्वच्छ हवा, ग्लेशियरों का संरक्षण और देश की नदियों के लिए जल उपलब्ध करवाना शामिल है। वहीं, आपदाओं के कारण प्रदेश को प्रतिवर्ष हजारों करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है। सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की प्राकृतिक संपदा का लाभ उठाने वाली संस्थाओं और कंपनियों से प्रदेश को उचित आर्थिक लाभ मिलना चाहिए। प्रदेश सरकार इस दिशा में भी अपने अधिकारों की लड़ाई जारी रखे हुए है।

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सीएम ने कहा कि आकलन के अनुसार किशाऊ विद्युत परियोजना से 600 करोड़ रुपये की आय होनी थी और परियोजना के पूरा होने के बाद वर्तमान अनुमान के अनुसार हिमाचल प्रदेश को प्रति वर्ष लगभग 1,200 करोड़ रुपये की आय होने की संभावना है। किशाऊ परियोजना के लिए पूर्व में हुए समझौते में परियोजना से बनने वाली बिजली की लागत का वहन हिमाचल प्रदेश को करना था। वर्तमान प्रदेश सरकार ने इस शर्त को स्वीकार नहीं किया और तीन वर्षों तक लगातार अपने अधिकारों के लिए बातचीत की।
 

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मुख्यमंत्री ने कहा कि किशाऊ परियोजना से प्रभावित होने वाले परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाएगा। हिमाचल प्रदेश में प्रभावित होने वाले गांवों की संख्या कम है, जबकि उत्तराखंड में अधिक गांव प्रभावित होंगे। प्रभावित लोगों को भूमि अधिग्रहण से संबंधित प्रावधानों के अनुसार मुआवजा देंगे। उन्होंने कहा कि भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ शानन पावर प्रोजेक्ट का मामला भी महत्वपूर्ण है। हिमाचल प्रदेश में लगभग 14,000 मेगावाट जलविद्युत एवं नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता से बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम लाभान्वित हो रहे हैं, जबकि प्रदेश को वर्तमान में 12 प्रतिशत मुफ्त बिजली रॉयल्टी और एक प्रतिशत लोकल एरिया डवेलपमेंट फंड प्राप्त होता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि किशाऊ परियोजना में हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। परियोजना में दोनों राज्यों के 50-50 प्रतिशत कर्मचारी होंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि परियोजना का कार्य शीघ्र पूरा किया जाएगा।

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