Himachal: द्रोणाचार्य की नगरी में चिट्टा का चक्रव्यूह... बिकता है पर दिखता नहीं, धृतराष्ट्र बने पहरेदार
गांव से शहर तक चिट्टा (हेरोइन) पर महाभारत के बीच तस्करों ने गुरु द्रोणाचार्य की नगरी ऊना के शिवबाड़ी में बड़ा चक्रव्यूह रचा है। यहां चिट्टा बिक रहा है पर दिख नहीं रहा।
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हिमाचल सरकार नशे के खिलाफ जितनी सख्त है, धरातल पर सिस्टम उतना ही नरम। नाके नदारद हैं। बैरियरों पर बदइंतजामी दिखती है। हाईवे पर बैरिकेड तो दिखते हैं पर वर्दी वाले नहीं। गांव से शहर तक चिट्टा (हेरोइन) पर महाभारत के बीच तस्करों ने गुरु द्रोणाचार्य की नगरी ऊना के शिवबाड़ी में बड़ा चक्रव्यूह रचा है। यहां चिट्टा बिक रहा है पर दिख नहीं रहा। गगरेट क्षेत्र के शिवबाड़ी, अंबोटा के अलावा हरोली के दुलैहड़ से चिट्टा सप्लाई का लोग दावा करते हैं। इसे आसपास के क्षेत्रों में खपाया जा रहा है।
चिट्टा सप्लाई के लिए होशियारपुर हॉटस्पॉट माना जा रहा
कांगड़ा, कुल्लू और मंडी तक तार जुड़े हुए हैं। चिट्टे के इस चक्रव्यूह को समझने के लिए अमर उजाला की टीम हिमाचल-पंजाब सीमा पर आशापुरी बैरियर पर पहुंची। बैरियर से करीब 25 किमी दूर पंजाब का होशियारपुर है। हिमाचल में चिट्टा सप्लाई के लिए होशियारपुर हॉटस्पॉट माना जा रहा है। टीम रात करीब 8:30 बजे बैरियर पर पहुंची। बैरियर पर टोल टैक्स वसूला जा रहा है। सामने आरटीओ की चेक पोस्ट भी है। इस पोस्ट के बाहर पुलिस की गाड़ी दिखी और पुलिस वाले भी, लेकिन किसी भी गाड़ी को न तो रोका और न ही चेक किया गया। इस बैरियर से हिमाचल की ओर दो से तीन किमी आगे पुलिस चौकी है। टीम रात 9:30 बजे यहां पहुंची। हाईवे पर यहां बैरिकेड तो थे लेकिन चेकिंग के लिए वर्दी वाला एक भी नहीं। रात करीब 11:30 बजे टीम पंडोगा बैरियर पर भी पहुंची। यहां भी बैरिकेड तो थे लेकिन पुलिस वाले नहीं। गाड़ियां इस बैरियर से भी आराम से आ-जा रही थीं।
थपलां टू ऑयल संपर्क मार्ग का चोर रास्ते के रूप में इस्तेमाल
आशापुरी बैरियर से हिमाचल की ओर 100 मीटर आगे थपलां टू ऑयल संपर्क मार्ग भी है। यह गगरेट से ऊना रोड के बीच में मिलता है। इस मार्ग का इस्तेमाल तस्कर चोर रास्ते के रूप में करते हैं। बैरियर से करीब 150 मीटर आगे बाईपास है। छह किमी का यह बाईपास अंबोटा होकर शिवबाड़ी निकलता है। इस मार्ग पर कोई पूछने वाला नहीं है। शिवबाड़ी में घना जंगल है। मान्यता की वजह से इस जंगल से कोई लकड़ी नहीं ले जा सकता। इसीलिए लोगों का यहां कम आना-जाना है। यही वजह है कि जंगल के आसपास चिट्टा बेचने और खरीदने वालों का जमघट रहता है।
महिलाएं और युवतियां भी शामिल
गगरेट क्षेत्र में कथित दीदी गैंग को लेकर चर्चाएं हैं। कुछ महिलाएं और युवतियां इस गैंग का हिस्सा बन नशे की सप्लाई में संलिप्त बताई जा रही हैं। एक जनवरी 2026 से 12 जून तक जिले में 45 मामले दर्ज हुए हैं। इस अवधि में 1.222 किग्रा चिट्टा, 1.782 किग्रा चरस, 142.05 ग्राम अफीम और 9.09 किग्रा गांजा बरामद किया गया है। 15.904 किग्रा भुक्की भी जब्त की है। 31,800 नशीली गोलियां, इंजेक्शन और 5,22,800 रुपये की नकदी भी बरामद की है।
नियमित नाके नहीं
मैहतपुर बैरियर ऊना-नंगल और चंडीगढ़ मार्ग का सबसे व्यस्त प्रवेश द्वार माना जाता है। संतोषगढ़ और अजौली से आनंदपुर साहिब, रोपड़ की ओर जाने वाले मार्ग, बथड़ी से पंजाब के औद्योगिक क्षेत्रों को जोड़ने वाला रास्ता और मरवाड़ी क्षेत्र के सीमांत मार्ग संवेदनशील माने जाते हैं। पोलियां, सिंगा, गोंदपुर जयचंद और आशापुरी जैसे क्षेत्रों में नियमित पुलिस नाकों की आवश्यकता है।
कब-कब पकड़े चिट्टे के मामले
ऑपरेशन नया सवेरा में 24 मई से 5 जून तक पुलिस ने 19 आरोपियों को गिरफ्तार किया। 167.18 ग्राम चिट्टा बरामद किया। इस नेटवर्क के तार जालंधर से जुड़े हैं। गिरोह का सरगना अभिषेक सहोता जालंधर से पूरे नेटवर्क को नियंत्रित कर रहा था। पांच जून को कांगड़ा पुलिस ने एक साथ, एक ही समय पर पंजाब और चंडीगढ़ में कार्रवाई कर अभिषेक सहोता के सिंडिकेट को ध्वस्त कर 80 लाख रुपये का लेनदेन पकड़ा है।
13 जून को ऊना के भटोली में शिव मंदिर के समीप एक बाइक में छिपाकर रखा चिट्टा बरामद कर पंजाब के रोपड़ के राहुल कुमार और अभिषेक को गिरफ्तार किया। इसी दिन कंडवाल चेकपोस्ट पर कार से 43.56 ग्राम चिट्टा बरामद। पुलिस ने कांगड़ा के अक्षय कुमार और पंजाब के बबेहाली के स्वर्ण सिंह (28) को गिरफ्तार किया।
15 जून को कंडवाल क्षेत्र में नागनी माता मंदिर सर्विस रोड के समीप अमृतसर के अनिल शर्मा 15.18 ग्राम चिट्टा के साथ गिरफ्तार।
15 जून : विशेष जांच इकाई ऊना की टीम ने संतोषगढ़ पुल के समीप पंजाब के होशियारपुर के सतीश कुमार और मंजीत कुमार को गिरफ्तार किया।
पंजाब को जाने वाले मुख्य सड़क मार्गों पर पुलिस का 24 घंटे पहरा है। सीमावर्ती इलाकों से वाहनों की अधिक आवाजाही वाले सात इलाके चिह्नित किए गए हैं। इनमें मैहतपुर, संतोषगढ़, बाथड़ी, पंडोगा, आशापुरी और मरवाड़ी शामिल हैं। नाकों पर विशेष तौर पर बटालियन से जवानों की तैनाती की गई है। नाकों की जांच के लिए थानों के प्रभारियों को भी नियमित निरीक्षण के लिए निर्देश दिए गए हैं। अगर कहीं लापरवाही बरती जा रही है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। - सचिन हिरेमठ, पुलिस अधीक्षक, ऊना