फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Himachal: Allegations against former DGP Kundu baseless; High Court dismisses businessman Nishant's petition.

Himachal: पूर्व डीजीपी कुंडू पर लगाए आरोप बेबुनियाद, कारोबारी निशांत की याचिका हाईकोर्ट में खारिज

Thu, 09 Jul 2026 06:00 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Thu, 09 Jul 2026 06:00 AM IST
सार

 प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) संजय कुंडू और पालमपुर के कारोबारी निशांत शर्मा के बीच लंबे समय से चल रहे बहुचर्चित विवाद में अहम फैसला सुनाया है। 

विज्ञापन
Himachal: Allegations against former DGP Kundu baseless; High Court dismisses businessman Nishant's petition.
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) संजय कुंडू और पालमपुर के कारोबारी निशांत शर्मा के बीच लंबे समय से चल रहे बहुचर्चित विवाद में अहम फैसला सुनाया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) की क्लोजर रिपोर्ट पर संतोष व्यक्त किया है। अदालत ने कारोबारी की याचिका खारिज करते हुए कहा कि एसआईटी जांच में कोई दुर्भावना या कमी नहीं पाई गई है। अदालत ने रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद कहा कि निशांत शर्मा की ओर से मैक्लोडगंज में खुद पर हुए हमले की कहानी मनगढ़ंत थी।

विज्ञापन

एसआईटी की जांच के अनुसार निशांत शर्मा का अपने व्यावसायिक साझेदार केशव दत्त श्रीधर के साथ कंपनी के पैसों की हेरफेर को लेकर विवाद चल रहा था। इस कानूनी कार्रवाई से ध्यान भटकाने और खुद को पीड़ित दिखाने के लिए यह झूठी शिकायत दर्ज कराई गई थी। अदालत ने इस मामले पर अपनी निगरानी को समाप्त करते हुए दोनों पक्षों को संबंधित निचली अदालतों (सीजेएम कांगड़ा और एसीजेएम शिमला) में अपनी बात रखने की छूट दी है। सुप्रीम कोर्ट के सिद्धांतों के अनुसार, अब यह पूरी तरह से संबंधित मजिस्ट्रेटों के विवेक पर निर्भर है कि वे इस क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करते हैं या फिर इस पर संज्ञान लेकर आगे की जांच का आदेश देते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

यह है मामला
अक्टूबर 2023 में निशांत शर्मा ने तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश को ईमेल भेजकर आरोप लगाया था कि मैक्लोडगंज में दो अज्ञात बाइक सवारों ने उन्हें और उनके परिवार को जान से मारने की धमकी दी। उन्होंने इसके पीछे अपने बिजनेस पार्टनर केशव दत्त श्रीधर और तत्कालीन डीजीपी संजय कुंडू की भूमिका होने का आरोप लगाया था। हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद दोनों पक्षों की ओर से क्रॉस-एफआईआर दर्ज हुई थीं और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर एसआईटी गठित की गई थी। जांच में यह भी पाया गया कि तत्कालीन डीजीपी ने 27 अक्टूबर 2023 को निशांत शर्मा से अपने आधिकारिक लैंडलाइन से 63 सेकंड की बातचीत की थी, जिसका उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच विवाद को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने का प्रयास था, न कि किसी प्रकार की धमकी देना।

विज्ञापन

पीडब्ल्यूडी प्रमुख अभियंता के सेवा विस्तार पर सुनवाई, सरकार ने कहा-दो हफ्ते में होगी डीपीसी
प्रदेश हाईकोर्ट में लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता नरेंद्र पाल सिंह को दिए गए सेवा विस्तार को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य सरकार ने अदालत को आश्वस्त किया है कि वह याचिकाकर्ता मंडी जोन के चीफ इंजीनियर नरेंद्र पाल सिंह चौहान के अधिकारों और पदोन्नति से जुड़े हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस मामले की सुनवाई न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ कर रही है। अदालत की कार्यवाही के दौरान महाधिवक्ता ने सरकार से मिले निर्देशों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि इस समय लोक निर्माण विभाग में कुछ महत्वपूर्ण निर्माण कार्य चल रहे हैं। इन कार्यों की सीधी देखरेख नरेंद्र पाल सिंह की ओर से की जा रही है।

इसी प्रशासनिक अनिवार्यता और काम की निरंतरता को बनाए रखने के लिए सरकार ने उन्हें सेवा विस्तार देने का निर्णय लिया है। महाधिवक्ता ने आश्वासन दिया है कि नरेंद्र पाल सिंह को मिले इस सेवा विस्तार की वजह से याचिकाकर्ता का हक नहीं मारा जाएगा और न ही उनके कॅरिअर पर कोई बुरा असर पड़ेगा। सरकार अगले दो सप्ताह के भीतर विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक बुलाकर सभी आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी कर लेगी। सरकार का दावा है कि इस समयसीमा के भीतर याचिकाकर्ता की शिकायत का पूरी तरह से निवारण कर दिया जाएगा। इसी आधार पर सरकार ने मामले को दो सप्ताह बाद सूचीबद्ध करने का आग्रह किया। इस मामले में याचिकाकर्ता ने हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव, कार्मिक सचिव, लोक निर्माण विभाग के सचिव और वर्तमान प्रमुख अभियंता नरेंद्र पाल को प्रतिवादी बनाया है। आधिकारिक आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए हाईकोर्ट अब 24 जुलाई को इस मामले की सुनवाई करेगा।

विधायक हंसराज मामले में याचिकाकर्ता के प्रति-उत्तर को रिकॉर्ड पर लाने के निर्देश

 हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में बुधवार को चंबा के चुराह से भाजपा विधायक डॉ. हंसराज को पोक्सो के केस में मिली जमानत के खिलाफ दायर मामले में सुनवाई हुई। पीड़िता याचिकाकर्ता ने प्रतिवादी हंसराज की ओर से दायर जवाब पर अपना प्रति-उत्तर दायर कर दिया है, लेकिन वह फिलहाल कोर्ट के आधिकारिक रिकॉर्ड पर मौजूद नहीं है। इस पर अदालत ने रजिस्ट्री को निर्देश दिए हैं कि उस जवाब को जल्द से जल्द रिकॉर्ड पर सही तरीके से शामिल किया जाए। न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 6 अगस्त की तारीख तय की है, जिसमें रिकॉर्ड पूरे होने के बाद आगे की कार्यवाही बढ़ाई जाएगी। इस दौरान राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो बिलासपुर की ओर से इंस्पेक्टर रिकॉर्ड के साथ अदालत में मौजूद रही। उल्लेखनीय है कि चुराह से भाजपा विधायक डॉ. हंसराज के खिलाफ दर्ज पोक्सो मामले से जुड़ी याचिका हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में चल रही है। पीड़िता ने चंबा सेशन कोर्ट द्वारा विधायक को दी गई जमानत को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि विधायक ने उनके नाबालिग होने पर यौन शोषण किया था। चंबा सेशन कोर्ट से अग्रिम और नियमित जमानत मिलने के बाद पीड़िता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed