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Himachal: जोगिंद्रनगर फार्मेसी में विभिन्न रोगों की बनेगी 34,000 क्विंटल दवा, 14 तरह की दवाओं का होगा निर्माण

Mon, 25 Nov 2024 08:57 PM IST
अंकेश डोगरा संवाद न्यूज एजेंसी, जोगिंद्रनगर (मंडी)।
संवाद न्यूज एजेंसी, जोगिंद्रनगर (मंडी)। Published by: अंकेश डोगरा Updated Mon, 25 Nov 2024 08:57 PM IST
सार

जोगिंद्रनगर में हृदय, शुगर और चर्म रोगों के लिए लगभग 34 हजार क्विंटल दवाओं का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए कच्चे माल की आपूर्ति शुरू हो गई है।
 

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Himachal 34000 quintals of medicines for various diseases will be made in Jogindernagar Pharmacy
जोगिंद्रनगर आयुर्वेदिक फार्मेसी में तैयार की जा रही दवा के लिए कच्चे माल की खेप पहुंची। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

हिमाचल प्रदेश की सबसे बड़ी आयुर्वेदिक फार्मेसी जोगिंद्रनगर में हृदय, शुगर और चर्म रोगों के लिए लगभग 34 हजार क्विंटल दवाओं का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए कच्चे माल की आपूर्ति शुरू हो गई है। 14 तरह की आयुर्वेदिक दवाओं के साथ आयुष काढ़े भी बनेंगे। दर्द निवारक तेल और गले के रोगों के लिए भी आयुर्वेदिक दवाओं का निर्माण किया जाएगा।
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निर्मित होने वाली औषधियों की आपूर्ति प्रदेश के करीब 1200 आयुष हेल्थ केंद्रों सहित जिलों के आयुर्वेदिक अस्पतालों में होगी। वर्ष 2023 में करीब 36,500 किलोग्राम दवाओं का निर्माण पूरा होने के बाद अब 2024-25 के लिए भी आयुर्वेदिक दवाओं के निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इनमें सितोप्लादी चूर्ण 5,818, अविपत्रिका चूर्ण 5,646 और अश्वगंधा चूर्ण लगभग 2500 किलोग्राम तैयार होगा। इसके अलावा पंचगुणा तेल 4,292 लीटर तैयार होगा। कार्वलिक चूर्ण 4,250 किग्रा, त्रिफला और बिल्ब चूर्ण का निर्माण भी 3000 क्विंटल करने का लक्ष्य रखा गया है। तुलस्यादी कसाय भी 5631 किलोग्राम तैयार होगा। उधर, आयुर्वेदिक फार्मेसी जोगिंद्रनगर के प्रभारी डॉ. नीलम ने बताया कि बीते साल करीब तीन करोड़ रुपये से 36,500 किलोग्राम दवाओं का निर्माण किया गया था। अब 14 तरह की आयुर्वेदिक दवाओं का निर्माण करने का लक्ष्य मिला है। इसके लिए कच्चे माल की आपूर्ति शुरू हो गई है।
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आयुर्वेदिक फार्मेसी में हृदय, चर्म रोग, शुगर और गले के रोगों की औषधियों का निर्माण की तमाम औपचारिकताओं का पूरा कर कच्चे माल की आपूर्ति तय समय में पूरी करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। दर्द निवारक तेल और आयुष काढ़ों का निर्माण भी आयुष पद्धति के तहत होगा- डॉ. आनंदी शैली, उपनिदेशक आयुर्वेदिक विभाग
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