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Hamirpur (Himachal) News: जिले में यूरिया खाद की बिक्री शुरू 266 रुपये रखी प्रति बैग कीमत
Sun, 09 Nov 2025 12:24 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Sun, 09 Nov 2025 12:24 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। जिले में गेहूं की बिजाई का कार्य शुरू होने वाला है। गेहूं की बिजाई के बाद किसानों को यूरिया खाद की किल्लत नहीं होगी। इफको हमीरपुर के पास करीब 270 मीट्रिक टन यूरिया खाद की खेप पहुंच चुकी है।
वहीं, सोसायटियों के माध्यम से किसानों ने यूरिया खाद को खरीदना शुरू कर दिया है। प्रति यूरिया बैग 45 किलोग्राम है। इसकी कीमत करीब 266 रुपये है। गेहूं की बिजाई के 25 दिन बाद यूरिया खाद के प्रयोग की सलाह दी जाती है। जिले में करीब 27 हजार हेक्टेयर में खेती की जाती है। आगामी सप्ताह में गेहूं की बिजाई का कार्य शुरू हो जाएगा।
गेहूं का बीज भी कृषि विक्रय केंद्रों में मिलना शुरू हो गया है। समय पर यूरिया खाद नहीं मिलने के कारण किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। हालांकि इस वर्ष संभावना है कि किसानों को यूरिया खाद की कमी नहीं होगी।
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पहली सिंचाई के साथ-साथ यूरिया खाद का प्रयोग करने का उपयुक्त समय है। इस समय यूरिया डालने से फसल की जड़ें मजबूत होती हैं और पौधे तेजी से बढ़ते हैं। इससे पैदावार में वृद्धि होती है।
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हमीरपुर। जिले में गेहूं की बिजाई का कार्य शुरू होने वाला है। गेहूं की बिजाई के बाद किसानों को यूरिया खाद की किल्लत नहीं होगी। इफको हमीरपुर के पास करीब 270 मीट्रिक टन यूरिया खाद की खेप पहुंच चुकी है।
वहीं, सोसायटियों के माध्यम से किसानों ने यूरिया खाद को खरीदना शुरू कर दिया है। प्रति यूरिया बैग 45 किलोग्राम है। इसकी कीमत करीब 266 रुपये है। गेहूं की बिजाई के 25 दिन बाद यूरिया खाद के प्रयोग की सलाह दी जाती है। जिले में करीब 27 हजार हेक्टेयर में खेती की जाती है। आगामी सप्ताह में गेहूं की बिजाई का कार्य शुरू हो जाएगा।
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गेहूं का बीज भी कृषि विक्रय केंद्रों में मिलना शुरू हो गया है। समय पर यूरिया खाद नहीं मिलने के कारण किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। हालांकि इस वर्ष संभावना है कि किसानों को यूरिया खाद की कमी नहीं होगी।
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पहली सिंचाई के साथ-साथ यूरिया खाद का प्रयोग करने का उपयुक्त समय है। इस समय यूरिया डालने से फसल की जड़ें मजबूत होती हैं और पौधे तेजी से बढ़ते हैं। इससे पैदावार में वृद्धि होती है।