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Hamirpur (Himachal) News: पीला रतुआ से गेहूं को बचाने के लिए कृषि विभाग ने गठित की टीमें
Tue, 30 Dec 2025 05:24 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Tue, 30 Dec 2025 05:24 AM IST
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जल्द ही खेतों का दौरा शुरू करेंगी, व्हाट्सएप ग्रुप में साझा की जाएगी जानकारी
छह सदस्यीय टीम में कृषि विशेषज्ञ, एडीओ सहित अन्य अधिकारी शामिल
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। गेहूं की फसल को पीला रतुआ रोग से बचाने के लिए कृषि विभाग हमीरपुर ने छह टीमें गठित कर दी हैं। हर टीम में पांच से छह सदस्य होंगे। इनमें कृषि विशेषज्ञ, एडीओ सहित अन्य अधिकारी शामिल हैं। टीमें शीघ्र ही फील्ड का दौरा आरंभ कर देंगी।
इसके लिए एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया है। इस ग्रुप में विभागीय अधिकारी शामिल हैं। फील्ड विजिट के दौरान यदि पीला रतुआ का मामला आता है तो इस ग्रुप में जानकारी साझा होगी, ताकि रोकथाम के लिए कदम उठाए जा सकें।
हालांकि अभी तक पीला रतुआ का कोई मामला नहीं आया है। वहीं कृषि विभाग ने किसानों से भी आग्रह किया है कि खेतों का समय-समय पर निरीक्षण करें। पीला रतुआ रोग का संक्रमण आने से गेहूं की पैदावर में कमी हो जाती है। पीला रतुआ को कई इलाकों में धारीदार रतुआ के नाम से भी जाना जाता है। इसका प्रकोप जनवरी के बीच दिखाई देता है। ठंड और अधिक नमी के मौसम में इसकी ज्यादा आशंका रहती है। फसल में अधिक प्रकोप होने पर यह रोग तने और बालियों तक फैल जाता है।
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बॉक्स
इस दवाई का प्रयोग करें किसान
फफूंदनाशक दवाई प्रोपिकोनाजोल 25-ईसी भी समस्त विक्रय केंद्रों में उपलब्ध करवा दी गई है। इस रोग के प्रबंधन के लिए कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र हमीरपुर ने किसानों को इस रोग के लक्षण दिखते ही खेत में फफूंदनाशक दवाई प्रोपिकोनाजोल 25-ईसी का छिड़काव करने की सलाह दी है। किसान एक एमएल फफूंदनाशक प्रति लीटर पानी में घोलकर तीस लीटर घोल प्रति कनाल की दर से खेतों में छिड़काव करें। रोग के फैलने पर हर पंद्रह से बीस दिनों के अंतराल पर छिड़काव दोहराएं।
कोट
-अभी तक पीला रतुआ का मामला नहीं आया है। टीमें गठित कर दी हैं। ये टीमें शीघ्र ही फील्ड विजिट शुरू कर देंगी।-डॉ. शशिपाल, कृषि उपनिदेशक, हमीरपुर।
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छह सदस्यीय टीम में कृषि विशेषज्ञ, एडीओ सहित अन्य अधिकारी शामिल
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। गेहूं की फसल को पीला रतुआ रोग से बचाने के लिए कृषि विभाग हमीरपुर ने छह टीमें गठित कर दी हैं। हर टीम में पांच से छह सदस्य होंगे। इनमें कृषि विशेषज्ञ, एडीओ सहित अन्य अधिकारी शामिल हैं। टीमें शीघ्र ही फील्ड का दौरा आरंभ कर देंगी।
इसके लिए एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया है। इस ग्रुप में विभागीय अधिकारी शामिल हैं। फील्ड विजिट के दौरान यदि पीला रतुआ का मामला आता है तो इस ग्रुप में जानकारी साझा होगी, ताकि रोकथाम के लिए कदम उठाए जा सकें।
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हालांकि अभी तक पीला रतुआ का कोई मामला नहीं आया है। वहीं कृषि विभाग ने किसानों से भी आग्रह किया है कि खेतों का समय-समय पर निरीक्षण करें। पीला रतुआ रोग का संक्रमण आने से गेहूं की पैदावर में कमी हो जाती है। पीला रतुआ को कई इलाकों में धारीदार रतुआ के नाम से भी जाना जाता है। इसका प्रकोप जनवरी के बीच दिखाई देता है। ठंड और अधिक नमी के मौसम में इसकी ज्यादा आशंका रहती है। फसल में अधिक प्रकोप होने पर यह रोग तने और बालियों तक फैल जाता है।
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इस दवाई का प्रयोग करें किसान
फफूंदनाशक दवाई प्रोपिकोनाजोल 25-ईसी भी समस्त विक्रय केंद्रों में उपलब्ध करवा दी गई है। इस रोग के प्रबंधन के लिए कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र हमीरपुर ने किसानों को इस रोग के लक्षण दिखते ही खेत में फफूंदनाशक दवाई प्रोपिकोनाजोल 25-ईसी का छिड़काव करने की सलाह दी है। किसान एक एमएल फफूंदनाशक प्रति लीटर पानी में घोलकर तीस लीटर घोल प्रति कनाल की दर से खेतों में छिड़काव करें। रोग के फैलने पर हर पंद्रह से बीस दिनों के अंतराल पर छिड़काव दोहराएं।
कोट
-अभी तक पीला रतुआ का मामला नहीं आया है। टीमें गठित कर दी हैं। ये टीमें शीघ्र ही फील्ड विजिट शुरू कर देंगी।-डॉ. शशिपाल, कृषि उपनिदेशक, हमीरपुर।