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दूसरे दिन सात लोगों पूछताछ, सीआईडी के सवालों से गर्माया नगर परिषद का माहौल
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हमीरपुर। नगर परिषद हमीरपुर में बिना टेंडर विकास कार्य करवाने और पार्षद के पति को टेंडर आवंटित करने के बहुचर्चित मामले में शुक्रवार को नगर परिषद में माहौल काफी गर्म रहा। न्यायालय के आदेशों के बाद शिमला सीआईडी क्राइम की टीम ने दूसरे दिन शुक्रवार को भी इस कथित भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में कुल सात लोगों से पूछताछ हुई और लिखित में बयान लिए गए। सीआईडी ने एक-एक कर कई तीखे सवाल नगर परिषद हमीरपुर के वर्तमान और पूर्व के पार्षदों से पूछे। इस कारण कयास लगाए जा रहे हैं कि इस मामले की सच्चाई शीघ्र सामने आएगी।
पार्षदों और पूर्व पार्षदों ने सीआईडी क्राइम के एडिशनल एसपी विनोद कुमार के सामने सवालों के जवाब दिए। दोपहर बाद नप के पूर्व वाइस चेयरमैन धमेंद्र शर्मा और शिकायतकर्ता को सीआईडी के जिला कार्यालय में बुलाकर पूछताछ हुई। धमेंद्र शर्मा ने बताया कि उनके रहते जब नगर परिषद ने बिना टेंडर निर्माण कार्य के भुगतान को लेकर प्रस्ताव रखा तो वे अकेले पार्षद थे, जिन्होंने जनरल हाउस में इसका विरोध किया। जबकि अन्य पार्षदों ने भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करने के बजाय बिना टेंडर करवाए गए निर्माण कार्य के भुगतान के लिए अपनी सहमति दे दी। धमेंद्र ने कहा वे भ्रष्टाचार को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं कर सकते।
शिकायतकर्ता ने यह लिखा नए शिकायत पत्र में
शिकायतकर्ता ने सीआईडी को एक और लंबी प्रश्नावली समेत शिकायत सौंपी, जिसमें लिखा गया है कि नगर परिषद ने जब बिना टेंडर हुए निर्माण कार्य के लिए भुगतान के लिए प्रस्ताव पारित किया तो उसमें यह नहीं लिखा गया कि निर्माण कार्य में कौन-कौन ठेकेदार शामिल थे और किन ठेकेदारों को भुगतान किया जाना है। आंखें बंद कर इस प्रस्ताव को पारित किया, जिसका न तो कोई औचित्य है और न ही वैधानिक मान्यता। ठेकेदारों ने रेत-बजरी का एम-फार्म किसके पास दिया। तारकोल, सीमेंट, पेवर ब्लॉक कहां से खरीदे और बिल इत्यादि कहां है? इत्यादि सवाल सीआईडी को सौंपे शिकायतकर्ता पत्र में शामिल हैं।
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इसलिए उठे निर्माण कार्य पर सवाल
वर्ष 2011-15 में नगर परिषद हमीरपुर ने वार्ड नंबर चार में निकासी नालियों के निर्माण, रास्ते में पेबर ब्लॉक बिछाने और ग्राम पंचायत दुगनेड़ी में सड़क की टारिंग के लिए दस लाख रुपये की लागत से कार्य करवाया। इस दौरान शहर के एक व्यक्ति ने प्रशासन और पुलिस तथा नगर परिषद को शिकायत दी कि ये सभी कार्य तीन ठेकेदारों को बिना टेंडर सौंपे गए। इन कार्यों को करने वाले ठेकेदारों में एक पार्षद का पति भी शामिल रहा, जबकि नियमानुसार पार्षद और कर्मचारी का कोई रिश्तेदार टेंडर फार्म नहीं भर सकता। मामला उजागर होने के बाद नगर परिषद ने इस कार्य के टेंडर किए। एसडीएम हमीरपुर ने मामले की जांच की और पाया कि ये कार्य टेंडर अवार्ड करने से पूर्व हो चुके थे, लेकिन सड़क की टारिंग का कार्य टेंडर के बाद भी नहीं हुआ। इस मामले में सीआईडी ने मामला दर्ज किया और जांच के बाद आगामी रिपोर्ट न्यायालय में सौंपी, लेकिन इसी बीच इस मामले को बंद करने को लेकर न्यायालय में क्लोजर रिपोर्ट भी सौंप दी गई। इसका शिकायतकर्ता ने विरोध किया। विरोध के बाद न्यायालय ने सीआईडी को दोबारा जांच कर रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा।
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पार्षदों और पूर्व पार्षदों ने सीआईडी क्राइम के एडिशनल एसपी विनोद कुमार के सामने सवालों के जवाब दिए। दोपहर बाद नप के पूर्व वाइस चेयरमैन धमेंद्र शर्मा और शिकायतकर्ता को सीआईडी के जिला कार्यालय में बुलाकर पूछताछ हुई। धमेंद्र शर्मा ने बताया कि उनके रहते जब नगर परिषद ने बिना टेंडर निर्माण कार्य के भुगतान को लेकर प्रस्ताव रखा तो वे अकेले पार्षद थे, जिन्होंने जनरल हाउस में इसका विरोध किया। जबकि अन्य पार्षदों ने भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करने के बजाय बिना टेंडर करवाए गए निर्माण कार्य के भुगतान के लिए अपनी सहमति दे दी। धमेंद्र ने कहा वे भ्रष्टाचार को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं कर सकते।
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शिकायतकर्ता ने यह लिखा नए शिकायत पत्र में
शिकायतकर्ता ने सीआईडी को एक और लंबी प्रश्नावली समेत शिकायत सौंपी, जिसमें लिखा गया है कि नगर परिषद ने जब बिना टेंडर हुए निर्माण कार्य के लिए भुगतान के लिए प्रस्ताव पारित किया तो उसमें यह नहीं लिखा गया कि निर्माण कार्य में कौन-कौन ठेकेदार शामिल थे और किन ठेकेदारों को भुगतान किया जाना है। आंखें बंद कर इस प्रस्ताव को पारित किया, जिसका न तो कोई औचित्य है और न ही वैधानिक मान्यता। ठेकेदारों ने रेत-बजरी का एम-फार्म किसके पास दिया। तारकोल, सीमेंट, पेवर ब्लॉक कहां से खरीदे और बिल इत्यादि कहां है? इत्यादि सवाल सीआईडी को सौंपे शिकायतकर्ता पत्र में शामिल हैं।
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इसलिए उठे निर्माण कार्य पर सवाल
वर्ष 2011-15 में नगर परिषद हमीरपुर ने वार्ड नंबर चार में निकासी नालियों के निर्माण, रास्ते में पेबर ब्लॉक बिछाने और ग्राम पंचायत दुगनेड़ी में सड़क की टारिंग के लिए दस लाख रुपये की लागत से कार्य करवाया। इस दौरान शहर के एक व्यक्ति ने प्रशासन और पुलिस तथा नगर परिषद को शिकायत दी कि ये सभी कार्य तीन ठेकेदारों को बिना टेंडर सौंपे गए। इन कार्यों को करने वाले ठेकेदारों में एक पार्षद का पति भी शामिल रहा, जबकि नियमानुसार पार्षद और कर्मचारी का कोई रिश्तेदार टेंडर फार्म नहीं भर सकता। मामला उजागर होने के बाद नगर परिषद ने इस कार्य के टेंडर किए। एसडीएम हमीरपुर ने मामले की जांच की और पाया कि ये कार्य टेंडर अवार्ड करने से पूर्व हो चुके थे, लेकिन सड़क की टारिंग का कार्य टेंडर के बाद भी नहीं हुआ। इस मामले में सीआईडी ने मामला दर्ज किया और जांच के बाद आगामी रिपोर्ट न्यायालय में सौंपी, लेकिन इसी बीच इस मामले को बंद करने को लेकर न्यायालय में क्लोजर रिपोर्ट भी सौंप दी गई। इसका शिकायतकर्ता ने विरोध किया। विरोध के बाद न्यायालय ने सीआईडी को दोबारा जांच कर रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा।