{"_id":"626d370d36266a70b3268c8a","slug":"take-special-care-of-roster-in-promotion-of-principal-bhatia-hamirpur-hp-news-sml4073159124","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रधानाचार्य की पदोन्नति में रोस्टर का रखें विशेष ध्यान : भाटिया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रधानाचार्य की पदोन्नति में रोस्टर का रखें विशेष ध्यान : भाटिया
विज्ञापन
हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश अनुसूचित जाति, जनजाति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग कर्मचारी कल्याण महासंघ ने प्रदेश सरकार और शिक्षा विभाग से मांग की है कि प्रधानाचार्य की पदोन्नति में अनुसूचित जाति के प्रवक्ताओं तथा मुख्याध्यापकों की वरिष्ठता को नजरअंदाज न किया जाए। न ही मनमाने तरीके के नियम बनाकर उन्हें पदोन्नति से वंचित किया जाए। महासंघ के राष्ट्रीय महामंत्री एवं प्रदेश अध्यक्ष डॉ. ओंकार सिंह भाटिया ने प्रदेश सरकार से आग्रह किया है कि स्कूल कैडर प्रवक्ता की पदोन्नति सूचियों में 2013 से लेकर 2021 तक कोई रोस्टर प्रणाली लागू नहीं की गई।
परिणाम स्वरूप सैकड़ों पात्र प्रवक्ता जिन्हें बहुत पहले पदोन्नत होकर प्रधानाचार्य बन जाना चाहिए था, उन्हें प्रोन्नति से वंचित रखा गया। यहां तक बार-बार आग्रह करने पर भी कोई विशेष लाभ नहीं मिला। सैकड़ों ऐसे अपात्र प्रधानाचार्य बन गए जिन्हें अभी नहीं बनना चाहिए था, परंतु अनुसूचित जाति के प्रवक्ताओं की वरिष्ठता को नजरअंदाज किया गया।
इस बात को लेकर महासंघ का राज्यस्तरीय शिष्टमंडल बीते दिसंबर माह में शिक्षा मंत्री से मिला था तथा उनके ध्यान में सभी तथ्यों को लाया गया था। उसके बाद जो प्रोन्नति सूची दिसंबर 28 को निकली, उसमें अनुसूचित जाति के प्रवक्ताओं को रोस्टर प्रणाली लगाकर पदोन्नत किया था। इससे इस वर्ग के प्रवक्ताओं को प्रतिनिधित्व मिला, लेकिन 2013 से लेकर 2021 तक जो बाकी प्रोन्नति सूचियां जारी हुई हैं, उनमें अभी तक लगभग 40 अनुसूचित जाति के प्रवक्ताओं का बैकलॉग चल रहा है, जो बहुत पहले भर जाना चाहिए था। विभागीय लापरवाही से यह लाभ पात्र प्रवक्ताओं को नहीं मिल पाया।
विज्ञापन
विज्ञापन
परिणाम स्वरूप सैकड़ों पात्र प्रवक्ता जिन्हें बहुत पहले पदोन्नत होकर प्रधानाचार्य बन जाना चाहिए था, उन्हें प्रोन्नति से वंचित रखा गया। यहां तक बार-बार आग्रह करने पर भी कोई विशेष लाभ नहीं मिला। सैकड़ों ऐसे अपात्र प्रधानाचार्य बन गए जिन्हें अभी नहीं बनना चाहिए था, परंतु अनुसूचित जाति के प्रवक्ताओं की वरिष्ठता को नजरअंदाज किया गया।
विज्ञापन
इस बात को लेकर महासंघ का राज्यस्तरीय शिष्टमंडल बीते दिसंबर माह में शिक्षा मंत्री से मिला था तथा उनके ध्यान में सभी तथ्यों को लाया गया था। उसके बाद जो प्रोन्नति सूची दिसंबर 28 को निकली, उसमें अनुसूचित जाति के प्रवक्ताओं को रोस्टर प्रणाली लगाकर पदोन्नत किया था। इससे इस वर्ग के प्रवक्ताओं को प्रतिनिधित्व मिला, लेकिन 2013 से लेकर 2021 तक जो बाकी प्रोन्नति सूचियां जारी हुई हैं, उनमें अभी तक लगभग 40 अनुसूचित जाति के प्रवक्ताओं का बैकलॉग चल रहा है, जो बहुत पहले भर जाना चाहिए था। विभागीय लापरवाही से यह लाभ पात्र प्रवक्ताओं को नहीं मिल पाया।
विज्ञापन