{"_id":"61bdefba4ce02b55c42c1e34","slug":"sheepkeepers-moved-from-mountains-to-plains-hamirpur-hp-news-sml3938433189","type":"story","status":"publish","title_hn":"भेड़पालकों ने पहाड़ों से मैदानों का किया रुख","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भेड़पालकों ने पहाड़ों से मैदानों का किया रुख
विज्ञापन
रंगस पहुंचे भेड़पालक।
- फोटो : Hamirpur-HP
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रंगस (नादौन)। पहाड़ों पर बर्फबारी शुरू होते ही भेड़पालकों ने मैदानी इलाकों का रुख कर लिया है।
ऊपरी हिमाचल से भेड़ और बकरी पालक नादौन उपमंडल में पहुुंच गए हैं। शनिवार को भी नादौन में भेड़ पालक पहुंचे। भेड़ पालक बहादुर सिंह, रमेश चंद तथा मदनलाल ने कहा कि छह से सात माह तक वे भेड़-बकरियों समेत घर से बाहर रहते हैं। इस दौरान कठिन जीवन गुजरना पड़ता है। कई बार तो कई साथी जंगलों के बीच में ही बीमारी के कारण या फिर जंगली जानवरों के आक्रमण के कारण मर जात हैं।
सर्दियों में पहाड़ों पर अत्यधिक बर्फ गिरने के कारण भेड़ पालक निचले क्षेत्रों के प्रवास पर निकलते हैं तब जाकर अपनी भेड़ बकरियों को सुरक्षित रख पाते हैं। उन्होंने कहा कि करीब दो माह पहले मनाली के प्रवास पर थे फिर ज्यादा बर्फ गिरने की वजह से एक माह तक मंडी में रुके रहे। अब जैसे-जैसे ठंड बढ़ने लगी है तो ज्वाला जी के क्षेत्र में अपना प्रवास काल पूरा किया जाएगा। उसके बाद फिर अपने गांव बंदला पालमपुर की ओर करीबन छह माह के बाद वापस जाएंगे। कई बार तो दूरदराज के क्षेत्रों के प्रवास पर निकलने की वजह से घर से किसी से संपर्क नहीं हो पाता।
उन्होंने कहा कि पहले भेड़-बकरी पालकों के दो बच्चों को 1200 रुपये प्रति बच्चे के हिसाब से अनुदान दिया जाता था लेकिन अब वह भी बंद कर दिया है। इससे समुदाय में गहरा रोष है। उन्होंने सरकार से मांग की इस अनुदान को दोबारा शुरू किया जाए तथा जो भेड़ पालक लोग घर से बाहर प्रवास पर निकलते हैं उनका पांच लाख रुपये तक का सुरक्षा बीमा भी किया जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन
ऊपरी हिमाचल से भेड़ और बकरी पालक नादौन उपमंडल में पहुुंच गए हैं। शनिवार को भी नादौन में भेड़ पालक पहुंचे। भेड़ पालक बहादुर सिंह, रमेश चंद तथा मदनलाल ने कहा कि छह से सात माह तक वे भेड़-बकरियों समेत घर से बाहर रहते हैं। इस दौरान कठिन जीवन गुजरना पड़ता है। कई बार तो कई साथी जंगलों के बीच में ही बीमारी के कारण या फिर जंगली जानवरों के आक्रमण के कारण मर जात हैं।
सर्दियों में पहाड़ों पर अत्यधिक बर्फ गिरने के कारण भेड़ पालक निचले क्षेत्रों के प्रवास पर निकलते हैं तब जाकर अपनी भेड़ बकरियों को सुरक्षित रख पाते हैं। उन्होंने कहा कि करीब दो माह पहले मनाली के प्रवास पर थे फिर ज्यादा बर्फ गिरने की वजह से एक माह तक मंडी में रुके रहे। अब जैसे-जैसे ठंड बढ़ने लगी है तो ज्वाला जी के क्षेत्र में अपना प्रवास काल पूरा किया जाएगा। उसके बाद फिर अपने गांव बंदला पालमपुर की ओर करीबन छह माह के बाद वापस जाएंगे। कई बार तो दूरदराज के क्षेत्रों के प्रवास पर निकलने की वजह से घर से किसी से संपर्क नहीं हो पाता।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि पहले भेड़-बकरी पालकों के दो बच्चों को 1200 रुपये प्रति बच्चे के हिसाब से अनुदान दिया जाता था लेकिन अब वह भी बंद कर दिया है। इससे समुदाय में गहरा रोष है। उन्होंने सरकार से मांग की इस अनुदान को दोबारा शुरू किया जाए तथा जो भेड़ पालक लोग घर से बाहर प्रवास पर निकलते हैं उनका पांच लाख रुपये तक का सुरक्षा बीमा भी किया जाए।
विज्ञापन