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स्वरोजगार अपना अपनी और परिवार की जिंदगी में रंग भर रहीं महिला शक्ति
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स्वयं सहायता समूह कोहलवीं की महिलाएं सीरा बनाती हुईं।
- फोटो : Hamirpur-HP
हमीरपुर। जिले की महिला शक्ति कड़ी मेहनत से स्वरोजगार अपनाकर अपनी और परिवार की जिंदगी में रंग भर रही हैं। वहीं, दूसरों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रही हैं और आत्मनिर्भरता का संदेश दे रही हैं। स्वयं सहायता समूह ओम नमो शिवाय कोहलवीं की 13 महिलाओं ने घर बैठने के बजाय स्वरोजगार को चुना। इन्होंने अपनी आर्थिकी सुदृढ़ करने की ठानी है।
ये महिलाएं अब समूह के माध्यम से सीरा, सेवइयां और बड़ियां बनाकर इनसे मुनाफा कमाने में लग गई हैं और घर खर्च में भी हाथ बंटा रही हैं। आंगनबाड़ी केंद्र के सहयोग से खुले इस स्वयं सहायता समूह को महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से मशीन खरीदने के लिए 35 हजार रुपये मिले हैं। इन महिलाओं ने करीब छह हजार रुपये समूह की बचत के डालकर मशीन खरीदकर उत्पाद बनाना शुरू किए। उत्पाद बनाने के बाद इनकी मांग क्षेत्र में बढ़ी और मुनाफा भी हुआ तो अब महिलाएं इसे बड़े स्तर पर बनाने लगी हैं। आंगनबाड़ी केंद्र कोहलवीं की कार्यकर्ता सरोज कुमारी ने कहा कि विभाग की ओर से महिलाओं को मशीन खरीदने के लिए मदद मिली तो इन्होंने स्वरोजगार अपनाने के लिए हामी भरी और अब उत्पाद बना रही हैं।
स्वयं सहायता समूह की प्रधान अनीता देवी और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सरोज कुमारी ने बताया कि एक किलोग्राम गेहूं 20 रुपये में मिलता है। ऐसे में दस किलोग्राम गेहूं से छह किलोग्राम सीरा निकलता है। जबकि, एक किलोग्राम सीरा 300 रुपये में बिक रहा है। इस हिसाब से 200 रुपये के गेहूं से यह महिलाएं 1800 रुपये अर्जित कर रही हैं। इसमें से करीब 1400 रुपये शुद्ध मुनाफा है, क्योंकि 200 रुपये बिजली और अन्य खर्च के भी लगते हैं।
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ऐसे ही 30 रुपये के एक किलोग्राम मैदा और 35 रुपये की एक किलोग्राम सूजी से बनने वाली दो किलो सेवइयां 360 रुपये में बिकती हैं। ऐेसे में महिलाओं को इस कारोबार में मुनाफा काफी है। इसलिए अब महिलाएं इस स्वरोजगार से जुड़ी हैं और मांग पर उत्पाद बना रही हैं। उन्हें क्षेत्र से काफी मांग आ रही है। इस समूह की प्रधान अनीता देवी और सचिव अनु शर्मा समेत कुल 13 महिलाएं उत्पाद बना रही हैं और स्वरोजगार से जुड़ी हैं। प्रधान अनीता देवी ने क्षेत्र की अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार अपनाने की सलाह दी है।
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ये महिलाएं अब समूह के माध्यम से सीरा, सेवइयां और बड़ियां बनाकर इनसे मुनाफा कमाने में लग गई हैं और घर खर्च में भी हाथ बंटा रही हैं। आंगनबाड़ी केंद्र के सहयोग से खुले इस स्वयं सहायता समूह को महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से मशीन खरीदने के लिए 35 हजार रुपये मिले हैं। इन महिलाओं ने करीब छह हजार रुपये समूह की बचत के डालकर मशीन खरीदकर उत्पाद बनाना शुरू किए। उत्पाद बनाने के बाद इनकी मांग क्षेत्र में बढ़ी और मुनाफा भी हुआ तो अब महिलाएं इसे बड़े स्तर पर बनाने लगी हैं। आंगनबाड़ी केंद्र कोहलवीं की कार्यकर्ता सरोज कुमारी ने कहा कि विभाग की ओर से महिलाओं को मशीन खरीदने के लिए मदद मिली तो इन्होंने स्वरोजगार अपनाने के लिए हामी भरी और अब उत्पाद बना रही हैं।
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स्वयं सहायता समूह की प्रधान अनीता देवी और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सरोज कुमारी ने बताया कि एक किलोग्राम गेहूं 20 रुपये में मिलता है। ऐसे में दस किलोग्राम गेहूं से छह किलोग्राम सीरा निकलता है। जबकि, एक किलोग्राम सीरा 300 रुपये में बिक रहा है। इस हिसाब से 200 रुपये के गेहूं से यह महिलाएं 1800 रुपये अर्जित कर रही हैं। इसमें से करीब 1400 रुपये शुद्ध मुनाफा है, क्योंकि 200 रुपये बिजली और अन्य खर्च के भी लगते हैं।
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ऐसे ही 30 रुपये के एक किलोग्राम मैदा और 35 रुपये की एक किलोग्राम सूजी से बनने वाली दो किलो सेवइयां 360 रुपये में बिकती हैं। ऐेसे में महिलाओं को इस कारोबार में मुनाफा काफी है। इसलिए अब महिलाएं इस स्वरोजगार से जुड़ी हैं और मांग पर उत्पाद बना रही हैं। उन्हें क्षेत्र से काफी मांग आ रही है। इस समूह की प्रधान अनीता देवी और सचिव अनु शर्मा समेत कुल 13 महिलाएं उत्पाद बना रही हैं और स्वरोजगार से जुड़ी हैं। प्रधान अनीता देवी ने क्षेत्र की अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार अपनाने की सलाह दी है।