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Hamirpur (Himachal) News: संतोष अध्यक्ष और जोगिंदर सीटू के जिला महासचिव बने
Sun, 14 Sep 2025 01:13 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Sun, 14 Sep 2025 01:13 AM IST
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हमीरपुर। शनिवार को सीटू का ग्यारहवां जिला सम्मेलन हमीरपुर मुख्यालय में हुआ। सम्मेलन का शुभारंभ जिला अध्यक्ष प्रताप राणा ने सीटू का झंडा फहराकर किया। इस मौके पर संतोष कुमार को अध्यक्ष और जोगिंदर कुमार को महासचिव, प्रताप राणा, कुलदीप, राज कुमारी को उपाध्यक्ष व रंजन शर्मा, ब्रह्मा दास, नवीन कुमार को सचिव चुना गया।
सम्मेलन में 35 सदस्यीय समिति का चुनाव किया गया। सम्मेलन में सीटू के राज्य अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा बतौर मुख्यातिथि उपस्थित हुए। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने देश की मेहनतकश जनता को बंधुआ मजदूरी में बदलने का कार्य कर रहा है। देशभर में मजदूरों की सुरक्षा के लिए बने 44 श्रम कानूनों को समाप्त करके नई श्रम संहिताओं का गठन किया है। जब तक इन श्रम संहिताओं को बदला नहीं जाता है, तब तक लड़ाई लड़ने की आवश्यकता है।
इसके उपरांत सीटू के जिला सचिव जोगिंदर कुमार ने तीन सालों की रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट पर बारह लोगों ने चर्चा की। सीटू के राष्ट्रीय सचिव डॉ. कश्मीर ने नई कमेटी का प्रस्ताव रखा और सम्मेलन का मार्गदर्शन किया। सम्मेलन में मंहगाई, सांप्रदायिकता, नई श्रम संहिताओं के विरोध में, मनरेगा के संबंध में प्रस्ताव पारित किए गए और संघर्ष चलाने का आह्वान किया। सम्मेलन में मजदूरों के मामलों को लेकर 22 सितंबर को श्रम कल्याण बोर्ड राज्य मुख्यालय पर प्रदर्शन करने का फैसला लिया गया।
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सम्मेलन में 35 सदस्यीय समिति का चुनाव किया गया। सम्मेलन में सीटू के राज्य अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा बतौर मुख्यातिथि उपस्थित हुए। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने देश की मेहनतकश जनता को बंधुआ मजदूरी में बदलने का कार्य कर रहा है। देशभर में मजदूरों की सुरक्षा के लिए बने 44 श्रम कानूनों को समाप्त करके नई श्रम संहिताओं का गठन किया है। जब तक इन श्रम संहिताओं को बदला नहीं जाता है, तब तक लड़ाई लड़ने की आवश्यकता है।
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इसके उपरांत सीटू के जिला सचिव जोगिंदर कुमार ने तीन सालों की रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट पर बारह लोगों ने चर्चा की। सीटू के राष्ट्रीय सचिव डॉ. कश्मीर ने नई कमेटी का प्रस्ताव रखा और सम्मेलन का मार्गदर्शन किया। सम्मेलन में मंहगाई, सांप्रदायिकता, नई श्रम संहिताओं के विरोध में, मनरेगा के संबंध में प्रस्ताव पारित किए गए और संघर्ष चलाने का आह्वान किया। सम्मेलन में मजदूरों के मामलों को लेकर 22 सितंबर को श्रम कल्याण बोर्ड राज्य मुख्यालय पर प्रदर्शन करने का फैसला लिया गया।
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