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Hamirpur (Himachal) News: टीबी के बढ़ते मामलों ने बढ़ाई चिंता, अब तक 709 मामले
Fri, 30 Oct 2026 06:52 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Fri, 30 Oct 2026 06:52 AM IST
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एक्सरे स्क्रीनिंग शिविरों में लक्षण मिलने वाले मरीजों की पहचान
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। जिले में टीबी के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इस वर्ष अब तक टीबी के 709 मामले सामने आ चुके हैं। बीते वर्ष जिले में टीबी के कुल 908 मामले दर्ज किए गए थे। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि लगातार जांच बढ़ाई जा रही है, जिससे टीबी को जड़ से समाप्त किया जा सके। टीबी की बीमारी छह माह से एक साल के भीतर खत्म हो जाती है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से टीबी की रोकथाम और प्रभावी निगरानी के लिए संदिग्ध मरीजों की समय पर जांच करवाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
बीमारी की जल्द पहचान होने से मरीज का समय पर उपचार शुरू किया जा सकता है। संक्रमण को अन्य लोगों तक फैलने से रोकने में मदद मिलती है। टीबी के संभावित लक्षणों वाले लोगों की जांच में किसी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए। लगातार खांसी, बुखार, वजन कम होना, रात को पसीना आना या कमजोरी जैसे लक्षण पाए जाने पर स्वास्थ्य केंद्र में जांच करवाना जरूरी है। स्वास्थ्य विभाग अब संदिग्ध मरीजों की पहचान, जांच, उपचार शुरू करने और उपचार के दौरान नियमित निगरानी की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने पर काम कर रहा है, ताकि टीबी के मामलों में कमी लाई जा सके।
बॉक्स
एक्सरे शिविरों से बीमारी पकड़ने की कोशिश
स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाए जा रहे एक्सरे शिविरों के माध्यम से लक्षण वाले मरीजों की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर उनकी आगे की जांच और उपचार शुरू किया जा सके। टीबी से लड़ाई केवल दवाओं तक सीमित नहीं है। उपचार के दौरान पौष्टिक भोजन और नियमित देखभाल भी महत्वपूर्ण हैं। इसी उद्देश्य से निक्षय मित्रों के माध्यम से मरीजों को पोषण सहायता दी जा रही है।
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कोट
नियमित दवा लेना और निर्धारित अवधि तक उपचार पूरा करना बेहद जरूरी है। बीच में दवा छोड़ने से उपचार प्रभावित हो सकता है। मरीजों के परिवार के सदस्यों और निकट संपर्क में रहने वाले लोगों को भी स्वास्थ्य कर्मियों की सलाह के अनुसार जांच करवानी चाहिए। -डॉ. सतीश कुमार, सीएमओ हमीरपुर
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हमीरपुर। जिले में टीबी के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इस वर्ष अब तक टीबी के 709 मामले सामने आ चुके हैं। बीते वर्ष जिले में टीबी के कुल 908 मामले दर्ज किए गए थे। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि लगातार जांच बढ़ाई जा रही है, जिससे टीबी को जड़ से समाप्त किया जा सके। टीबी की बीमारी छह माह से एक साल के भीतर खत्म हो जाती है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से टीबी की रोकथाम और प्रभावी निगरानी के लिए संदिग्ध मरीजों की समय पर जांच करवाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
बीमारी की जल्द पहचान होने से मरीज का समय पर उपचार शुरू किया जा सकता है। संक्रमण को अन्य लोगों तक फैलने से रोकने में मदद मिलती है। टीबी के संभावित लक्षणों वाले लोगों की जांच में किसी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए। लगातार खांसी, बुखार, वजन कम होना, रात को पसीना आना या कमजोरी जैसे लक्षण पाए जाने पर स्वास्थ्य केंद्र में जांच करवाना जरूरी है। स्वास्थ्य विभाग अब संदिग्ध मरीजों की पहचान, जांच, उपचार शुरू करने और उपचार के दौरान नियमित निगरानी की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने पर काम कर रहा है, ताकि टीबी के मामलों में कमी लाई जा सके।
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एक्सरे शिविरों से बीमारी पकड़ने की कोशिश
स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाए जा रहे एक्सरे शिविरों के माध्यम से लक्षण वाले मरीजों की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर उनकी आगे की जांच और उपचार शुरू किया जा सके। टीबी से लड़ाई केवल दवाओं तक सीमित नहीं है। उपचार के दौरान पौष्टिक भोजन और नियमित देखभाल भी महत्वपूर्ण हैं। इसी उद्देश्य से निक्षय मित्रों के माध्यम से मरीजों को पोषण सहायता दी जा रही है।
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नियमित दवा लेना और निर्धारित अवधि तक उपचार पूरा करना बेहद जरूरी है। बीच में दवा छोड़ने से उपचार प्रभावित हो सकता है। मरीजों के परिवार के सदस्यों और निकट संपर्क में रहने वाले लोगों को भी स्वास्थ्य कर्मियों की सलाह के अनुसार जांच करवानी चाहिए। -डॉ. सतीश कुमार, सीएमओ हमीरपुर