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Hamirpur (Himachal) News: सख्ती के बाद सड़कों से हटाए गैर प्रमाणित पौधे, खेतों में दबाए
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संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। सरकार और उद्यान विभाग की सख्ती के बाद सड़कों के किनारे चल रही गैर प्रमाणित सेब सहित अन्य फलदार पौधों की बिक्री बंद हो गई है। विभाग के हरकत में आने के बाद गैर कानूनी कारोबार में जुटे बिचौलियों की परेशानी बढ़ गई है। कार्रवाई के डर से बिचौलियों ने सेब की नर्सरी खेतों में दबा दी है। चिंता की बात यह है कि सालों से चल रहे इस अवैध कारोबार से बागवानी पर संकट पैदा हो गया है। प्रदेश के बाहर से गैर प्रमाणित सेब के एक पौधे को बिचौलिए दो से तीन रुपये में मंगवाकर ग्राफ्टिंग करने के बाद तीन सौ रुपये और बिना ग्राफ्ट किए 40 रुपये में बेच रहे है। बीमारी से ग्रस्त व सूखे पौधे बेचकर बिचौलिए लाखों का धंधा कर कर रहे हैं लेकिन बागवान ठगी का शिकार हो रहा है। उद्यान विभाग ने दावा है कि केवल 19 नर्सरी ही रोहड़ू क्षेत्र में पंजीकृत है जबकि दर्जनों नर्सरियों में गैर प्रमाणित सेब के लाखों पौधों का स्टाॅक पड़ा हुआ है। इसमें प्रभावशाली लोगों के शामिल होने के कारण विभाग अनदेखी कर रहा है। सड़क के किनारे शुरू हुई सख्ती के बाद अब अवैध कारोबार से जुडे लोगों को परेशानियां जरूर बढ़ गई है लेकिन अभी भी ऐसे पौधों का बिकना पूरी तरह से बंद नहीं हुआ है। गौर हो कि बर्फबारी और बारिश के बाद हर साल सेब के नए पौधे रोपने का समय शुरू होता है। फरवरी से मार्च महीने तक इसकी अधिक मांग रहती है। बढ़ती मांग को देखकर बिचौलियों ने प्रदेश के बाहर से इसकी आपूर्ति शुरू कर दी है। विशेषज्ञ मानते है कि बाहर से आने वाले गैर प्रमाणित पौधे में वायरस और संक्रमण की आशंका बनी रहती है। दूसरे राज्य से आने वाले पौधों में यहां के जलवायु का भी प्रतिकूल असर रहता है। इसके कारण सर्दियों में रोपे जाने वाले पौधे दो महीने के बाद सूखने शुरू हो जाते हैं। इससे बागवानों का आर्थिक नुकसान के साथ जमीन के संक्रमित होने का भी खतरा बना हुआ है। बागवानी विभाग के एसएमएस संजय चौहान ने बताया कि गैर प्रमाणित पौधे बेचने वालों पर लगातार कार्रवाई जारी रहेगी। बागवान भी केवल पंजीकृत नर्सरियों से पौधे खरीदें। खरीदे गए पौधे का नर्सरी मालिक से बिल जरूर लें।
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रोहड़ू। सरकार और उद्यान विभाग की सख्ती के बाद सड़कों के किनारे चल रही गैर प्रमाणित सेब सहित अन्य फलदार पौधों की बिक्री बंद हो गई है। विभाग के हरकत में आने के बाद गैर कानूनी कारोबार में जुटे बिचौलियों की परेशानी बढ़ गई है। कार्रवाई के डर से बिचौलियों ने सेब की नर्सरी खेतों में दबा दी है। चिंता की बात यह है कि सालों से चल रहे इस अवैध कारोबार से बागवानी पर संकट पैदा हो गया है। प्रदेश के बाहर से गैर प्रमाणित सेब के एक पौधे को बिचौलिए दो से तीन रुपये में मंगवाकर ग्राफ्टिंग करने के बाद तीन सौ रुपये और बिना ग्राफ्ट किए 40 रुपये में बेच रहे है। बीमारी से ग्रस्त व सूखे पौधे बेचकर बिचौलिए लाखों का धंधा कर कर रहे हैं लेकिन बागवान ठगी का शिकार हो रहा है। उद्यान विभाग ने दावा है कि केवल 19 नर्सरी ही रोहड़ू क्षेत्र में पंजीकृत है जबकि दर्जनों नर्सरियों में गैर प्रमाणित सेब के लाखों पौधों का स्टाॅक पड़ा हुआ है। इसमें प्रभावशाली लोगों के शामिल होने के कारण विभाग अनदेखी कर रहा है। सड़क के किनारे शुरू हुई सख्ती के बाद अब अवैध कारोबार से जुडे लोगों को परेशानियां जरूर बढ़ गई है लेकिन अभी भी ऐसे पौधों का बिकना पूरी तरह से बंद नहीं हुआ है। गौर हो कि बर्फबारी और बारिश के बाद हर साल सेब के नए पौधे रोपने का समय शुरू होता है। फरवरी से मार्च महीने तक इसकी अधिक मांग रहती है। बढ़ती मांग को देखकर बिचौलियों ने प्रदेश के बाहर से इसकी आपूर्ति शुरू कर दी है। विशेषज्ञ मानते है कि बाहर से आने वाले गैर प्रमाणित पौधे में वायरस और संक्रमण की आशंका बनी रहती है। दूसरे राज्य से आने वाले पौधों में यहां के जलवायु का भी प्रतिकूल असर रहता है। इसके कारण सर्दियों में रोपे जाने वाले पौधे दो महीने के बाद सूखने शुरू हो जाते हैं। इससे बागवानों का आर्थिक नुकसान के साथ जमीन के संक्रमित होने का भी खतरा बना हुआ है। बागवानी विभाग के एसएमएस संजय चौहान ने बताया कि गैर प्रमाणित पौधे बेचने वालों पर लगातार कार्रवाई जारी रहेगी। बागवान भी केवल पंजीकृत नर्सरियों से पौधे खरीदें। खरीदे गए पौधे का नर्सरी मालिक से बिल जरूर लें।