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पुलिस आरक्षी परीक्षा : जूते, ब्रेसलेट और हाथ में पहनी मौली भी खुलवाई

Sun, 03 Jul 2022 11:51 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 03 Jul 2022 11:51 PM IST
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Police constable exam: Shoes, bracelet and Molly worn in hand were also opened
राजकीय बहुतकनीकी कॉलेज बड़ू में पुलिस भर्ती परीक्षा के लिए पहुंचे अभ्यर्थी प्रवेश के लिए कतार म? - फोटो : Hamirpur-HP
हमीरपुर। समय: सुबह 9: 54 बजे हैं। स्थान: राजकीय बहुतकनीकी महाविद्यालय हमीरपुर है। यहां पुलिस आरक्षी भर्ती की लिखित परीक्षा देने के लिए अभ्यर्थी 9:00 बजे पहुंच गए हैं। बारिश में अभ्यर्थी अपने निजी वाहनों, सरकारी व निजी बसों में परीक्षा केंद्र के बाहर पहुंचे हैं। केंद्र के बाहर मेटल डिटेक्टर लगाने के लिए कर्मचारी काम कर रहे हैं। 9:57 बजे हैं। कई अभ्यर्थी कॉलेज के ऑडिटोरियम हॉल के बाहर हाथ में कार्डबोर्ड और एडमिट कार्ड लेकर प्रवेश पाने के लिए खड़े हैं। पुलिस कर्मचारी इनके एडमिट कार्ड जांच रहे हैं और इनकी तलाशी के बाद इन्हें प्रवेश मिल रहा है।
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कई अभ्यर्थी अभी-अभी पहुंचे हैं और कॉलेज के बाहर सड़क की दूसरी ओर लगे सिटिंग प्लान को देख रहे हैं। सुबह बारिश के कारण कई अभ्यर्थी 9:00 बजे के बजाय 10:00 बजे भी पहुंचे हैं। अभ्यर्थियों के आने का सिलसिला जारी है। 10:03 बजे हैं।
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अभ्यर्थियों की गहनता से तलाशी लेकर इन्हें परीक्षा केंद्र भेजा जा रहा है। इस दौरान हाथ में पहनी घड़ी, ब्रेसलेट, कड़ा या धार्मिक धागा व मौली, बेल्ट, हेयर पिन, पानी की बेातल, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट के बिना प्रवेश दिया गया। जूते खुलवाने के बाद उनकी जांच की गई और इसके बाद दोबारा से अभ्यर्थियों ने जूते पहने। खास बात यह है कि इस बार धार्मिक धागे भी परीक्षा केंद्र में पहनकर नहीं जाने दिया। अभ्यर्थियों की तलाशी के बाद ही उन्हें परीक्षा केंद्र भेजा गया। अब 12:00 बजे हूटर बजने के साथ ही परीक्षा शुरू हुई। 1:00 बजे दो बार हूटर बजने के साथ परीक्षा समाप्त हो गई है। 1:03 बजे अभ्यर्थी बाहर आना शुरू हुए और अपने गंतव्य पर रवाना हुए।
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जिले के तीन परीक्षा केंद्रों में इस परीक्षा में 4,833 अभ्यर्थियों को एडमिट कार्ड जारी हुए थे। इनमें से 4,565 ने परीक्षा दी। जबकि पिछली परीक्षा में प्रश्न पत्र लीक मामले में संलिप्त सात अभ्यर्थियों को इस बार परीक्षा में बैठने नहीं दिया गया। जिले के तीन केंद्रों में से राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान हमीरपुर में बुलाए गए 2,041 में से 1,952 ने परीक्षा दी जबकि 89 अनुपस्थित रहे। वहीं, राजकीय बहुतकनीकी महाविद्यालय हमीरपुर में बुलाए गए 1,070 में से 1,004 ने परीक्षा दी और 66 अनुपस्थित रहे। डीएवी सलासी में बुलाए गए 1,722 में से 1,610 ने परीक्षा दी और 112 अनुपस्थित रहे। पुलिस अधीक्षक डॉ. आकृति शर्मा ने कहा कि परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई है। पुलिस ने परीक्षा के लिए पुख्ता प्रबंध किए थे।
बड़ू केंद्र में नहीं लगी थी घड़ी, अभ्यर्थियों को हुई परेशानी
हमीरपुर। राजकीय बहुतकनीकी महाविद्यालय के परीक्षा केंद्र में घड़ी न होने के कारण अभ्यर्थियों को समय का पता नहीं चला। अभ्यर्थियों को केंद्र में घड़ी ले जाने पर मनाही थी, लेकिन अंदर भी घड़ी न होने से अभ्यर्थियों को समय का पता नहीं चल सका। अभ्यर्थियों ने कहा कि समय जितना बचा हो, उस गति से प्रश्न हल किए जाते हैं, लेकिन घड़ी न होने से उन्हें परेशानी हुई।
समय पर बसें न चलने से नहीं मिला निशुल्क सफर का लाभ
एचआरटीसी ने दो दिन एडमिट कार्ड दिखाकर निशुल्क सफर का लाभ तो अभ्यर्थियों को दिया था, लेकिन इसका लाभ केवल उन रूटों के अभ्यर्थियों को ही मिला, जहां से तड़के हमीरपुर के लिए बस थी या परीक्षा खत्म होने के बाद बस थी। जबकि, कई अभ्यर्थियों को निजी वाहनों, टैक्सियों में ही आवाजाही करनी पड़ी। हालांकि, अधिकतर ने सरकारी बसों में सफर का लाभ भी लिया। कई बसें परीक्षा केंद्रों से होकर अभ्यर्थियों को बैठाकर लाईं। परीक्षा खत्म होने के बाद कई रूटों पर बसें न मिलने से कुछ अभ्यर्थियों को परेशानी जरूर हुई।
पिछली बार की अपेक्षा इस बार उनका पेपर ज्यादा अच्छा हुआ है। परीक्षा रद्द होने का उन्हें लाभ मिला है और तैयारी के लिए भी अधिक समय मिला है। -(अभ्यर्थी आकाश कटोच।)
इस बार तो पेपर थोड़ा कठिन था, लेकिन पढ़ाई की है तो इस बार भी परीक्षा सही हुई है। पुलिस की निगरानी भी बेहतर है और उम्मीद है कि जैसे पिछली बार पेपर उत्तीर्ण किया है, वह इस बार भी हो। कुछ लोगों की वजह से परीक्षा रद्द हुई और जिसका खामियाजा अन्य अभ्यर्थियों को भुगतना पड़ा। -(पिछली बार भी उत्तीर्ण रहा अभ्यर्थी आदर्श)
परीक्षा पूर्व के मुकाबले अच्छी हुई है। पेपर भी सही आया है और किसी प्रकार की कोई गलती प्रश्नों में नहीं है। उम्मीद है कि इस बार परीक्षा उत्तीर्ण होगी, क्योंकि पिछली बार के बाद पढ़ाई के लिए भी समय मिला है। -(अभ्यर्थी अभय सांख्यान।)
पेपर थोड़ा कठिन आया। पिछली बार परीक्षा अच्छी हुई थी। इस बार परीक्षा उत्तीर्ण होने की उम्मीद नहीं है, पर पुलिस ने इस बार परीक्षा के लिए उचित व्यवस्थाएं की हैं।-(अजय कुमार अभ्यर्थी)
पिछली बार परीक्षा उत्तीर्ण की है। इस बार भी परीक्षा उत्तीर्ण करेंगे। हालांकि पिछली बार की अपेक्षा इस बार प्रश्नपत्र थोड़ा कठिन था। पुलिस ने इस बार उचित निगरानी में परीक्षा संपन्न करवाई है। अब परिणाम का इंतजार रहेगा।-(पिछली बार की परीक्षा का उत्तीर्ण अभ्यर्थी अभिषेक)
प्रश्नपत्र हाई लेवल का था। पुलिस आरक्षी भर्ती के बजाय एचएएस लेवल की परीक्षा थी। परीक्षा केंद्र में जाने से पहले बेल्ट और हाथ में पहनी जाने वाली मौली व धागा तक खुलवा दिया गया।(अभ्यर्थी अभिषेक शर्मा)
राजकीय बहुतकनीकी महाविद्यालय बड़ू के परीक्षा केंद्र में पुलिस विभाग ने समय देखने के लिए कोई घड़ी नहीं लगाई थी। जबकि, अभ्यर्थियों को खुद की घड़ी ले जाना भी प्रतिबंधित था। ऐसे में एक घंटा कैसे बीत गया, पता नहीं चला। समय का पता चलता रहे तो उस अनुसार अभ्यर्थी परीक्षा देता है। (अभ्यर्थी अभिषेक कुमार)
पुलिस ने तलाशी के पुख्ता प्रबंध किए। हर अभ्यर्थी की तलाशी लेकर भेजा गया। जूते भी खुलवाए गए और उनकी जांच करने के बाद ही अभ्यर्थी को जूते पहनकर अंदर जाने दिया। पुलिस की निगरानी पिछली बार की अपेक्षा इस बार उचित थी।(अभ्यर्थी, आदित्य कौशल )
-पिछली बार भी परीक्षा उत्तीर्ण की है और इस बार भी पेपर अच्छा हुआ है। कुछ शरारती तत्वों के कारण अन्य अभ्यर्थियों को परेशानी झेलनी पड़ी और दो-दो बार परीक्षा देनी पड़ी। पढ़ाई की है तो इसका फल अवश्य मिलेगा। (पिछली बार का उत्तीर्ण अभ्यर्थी अख्तर खान)
परीक्षा केंद्र में पहुंचने पर अंगूठी, ब्रेसलेट व बालों में लगाए हेयर क्लिप भी पुलिस कर्मियों ने उतरवाए। बैग परीक्षा केंद्र के बाहर ही रखवाए गए। कड़ी निगरानी में परीक्षा हुई है। परीक्षा अच्छी हुई है, शेष परिणाम पर निर्भर है। (अभ्यर्थी शालू)
परीक्षा अच्छी हुई है। हालांकि, बीती परीक्षा में उत्तीर्ण नहीं हो पाई थी और तीन नंबर से रह गई थी, लेकिन परीक्षा दोबारा देने का मौका मिलने से खुश हैं और इस बार उत्तीर्ण होने की संभावना है।(अभ्यर्थी ज्योति)

एचआरटीसी की बसों में सफर तो निशुल्क है, लेकिन परीक्षा खत्म होने के एक घंटा बाद तक भी मैहरे के लिए निगम की बस नहीं मिली। ऐसे में निगम की बस में निशुल्क सफर का लाभ भी उन्हें नहीं मिला। (दीपक कुमार)
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