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अल्ट्रासाउंड के लिए भूखे-प्यासे बैठे रहे लोग, नहीं आया चिकित्सक
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भोरंज अस्पताल में अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए इंतजार करते मरीज।
- फोटो : Hamirpur-HP
भोरंज (हमीरपुर)। समय.. सुबह दस बजकर 50 मिनट। स्थान सिविल अस्पताल भोरंज। यहां अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए मरीज लैब के बाहर बैठकर चिकित्सक का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन चिकित्सक लैब में नहीं है और अल्ट्रासाउंड नहीं हो रहे हैं। सुबह साढ़े नौ बजे से अस्पताल आए मरीज चिकित्सक की राह देख रहे हैं, लेकिन करीब डेढ़ घंटे बाद भी चिकित्सक नहीं है। आसपास के कमरों में जाकर अन्य कर्मचारियों से भी कुछ मरीज चिकित्सक के आने या न आने की पूछताछ कर रहे हैं। अब 11 बजकर दो मिनट हुए हैं और अस्पताल के एक कर्मचारी ने बताया कि अल्ट्रासाउंड नहीं होंगे। चिकित्सक कोर्ट में हैं, अब अगले सप्ताह अल्ट्रासाउंड होंगे। इस पर कुछ लोग तो कुछ देर लैब के बाहर ही बैठे रहे जबकि कुछ अस्पताल प्रशासन और विभाग को कोसते हुए बाहर चले गए।
सिविल अस्पताल भोरंज में हर वीरवार को अल्ट्रासाउंड होते हैं। हालांकि, यहां स्थायी रेडियोलॉजिस्ट नहीं है, लेकिन डेपुटेशन पर आने वाला चिकित्सक हर सप्ताह वीरवार को अल्ट्रासाउंड करता है। वीरवार को भी करीब चार दर्जन मरीज बिना अल्ट्रासाउंड के बैरंग लौटे। करीब डेढ़ घंटा लोग भूखे पेट चिकित्सक का इंतजार करते रहे, लेकिन चिकित्सक नहीं आया। कई मरीजों को निजी क्लीनिकों में महंगे दामों में अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ा। बता दें कि सिविल अस्पताल भोरंज में रेडियोलॉजिस्ट का पद ही नहीं है। हालांकि, अस्पताल में नई अल्ट्रासाउंड मशीन तो आ गई है लेकिन अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट का पद नहीं होने से लोग परेशान होते हैं। 16 दिसंबर को भी चिकित्सक की कोर्ट में गवाही होने के चलते वह अस्पताल नहीं आए और अब 23 को भी अस्पताल नहीं पहुंचे। जबकि दोनों दिनों के कुल मिलाकर करीब चार दर्जन लोगों को अल्ट्रासाउंड करवाने की तिथि 23 दिसंबर दे रखी थी। चिकित्सक न होने से अल्ट्रासाउंड मशीन शोपीस बनकर रह गई है। अस्पताल में 300 के करीब रोजाना की ओपीडी है और मरीजों को अल्ट्रासाउंड के लिए दो से ढाई माह बाद की तिथि मिलती है। अगर आपातकालीन किसी को अल्ट्रासाउंड करवाना हो तो उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। लोगों ने सरकार से मांग की है कि अल्ट्रासाउंड की सुविधा के लिए भोरंज अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट का पद सृजित किया जाए।
बयान-
कोर्ट में थी रेडियोलॉजिस्ट की गवाही: बीएमओ
बीएमओ भोरंज डा. ललित कालिया ने कहा कि अस्पताल में नई अल्ट्रासाउंड मशीन आ गई है, परंतु स्थायी रेडियोलॉजिस्ट का पद न होने से सप्ताह में एक बार ही अल्ट्रासाउंड होते है। वीरवार को डेपुटेशन पर आने वाले रेडियोलॉजिस्ट की कोर्ट में गवाही थी, इसके चलते वह नहीं आ पाए।
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क्या कहते हैं लोग -
डेढ़ घंटे इंतजार के बावजूद नहीं हुए अल्ट्रासाउंड : मोहित
मोहित ने कहा कि वीरवार को अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए अस्पताल आया। इस वीरवार का एक सप्ताह से इंतजार कर रहा था, लेकिन अस्पताल में डेढ़ घंटा इंतजार करने के बावजूद उन्हें बताया गया कि आज अल्ट्रासाउंड नहीं होंगे। इस कारण परेशानी हुई।
अस्पताल में सृजित हो रेडियोलॉजिस्ट का पद: संतोष
बीडीसी सदस्य संतोष कुमारी ने कहा कि 16 तारीख को वह अस्पताल में किसी मरीज को लेकर अल्ट्रासाउंड करवाने आई थी, लेकिन अल्ट्रासाउंड नहीं हुए। 23 दिसंबर की तिथि दी गई, लेकिन इस दिन भी अल्ट्रासाउंड नहीं हुए। अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट का पद सृजित कर स्थायी सुविधा देने की मांग की है।
सभी को बैरंग लौटना पड़ा : पवन
पवन कुमार ने कहा कि 16 तारीख वाले भी 23 को ही बुलाए थे। इस कारण करीब चार दर्जन मरीज एक दिन ही अल्ट्रासाउंड कराने पहुंचे, लेकिन सभी को निराश लौटना पड़ा। अस्पताल में शेष चिकित्सक तो हैं, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट की कमी खल रही है।
सप्ताह में दो बार डेपुटेशन पर आए चिकित्सक : विकास
विकास कुमार का कहना है कि जब तक अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट का पद सृजित नहीं होता है, तब तक सप्ताह में दो दिन डेपुटेशन के लिए रखे जाएं, ताकि एक दिन यदि चिकित्सक किन्हीं कारणों से नहीं आ पाता है तो जल्द ही लोगों को दूसरे दिन सुविधा मिल सके। नहीं तो लोगों को एक से दो माह इंतजार करना पड़ रहा है।
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सिविल अस्पताल भोरंज में हर वीरवार को अल्ट्रासाउंड होते हैं। हालांकि, यहां स्थायी रेडियोलॉजिस्ट नहीं है, लेकिन डेपुटेशन पर आने वाला चिकित्सक हर सप्ताह वीरवार को अल्ट्रासाउंड करता है। वीरवार को भी करीब चार दर्जन मरीज बिना अल्ट्रासाउंड के बैरंग लौटे। करीब डेढ़ घंटा लोग भूखे पेट चिकित्सक का इंतजार करते रहे, लेकिन चिकित्सक नहीं आया। कई मरीजों को निजी क्लीनिकों में महंगे दामों में अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ा। बता दें कि सिविल अस्पताल भोरंज में रेडियोलॉजिस्ट का पद ही नहीं है। हालांकि, अस्पताल में नई अल्ट्रासाउंड मशीन तो आ गई है लेकिन अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट का पद नहीं होने से लोग परेशान होते हैं। 16 दिसंबर को भी चिकित्सक की कोर्ट में गवाही होने के चलते वह अस्पताल नहीं आए और अब 23 को भी अस्पताल नहीं पहुंचे। जबकि दोनों दिनों के कुल मिलाकर करीब चार दर्जन लोगों को अल्ट्रासाउंड करवाने की तिथि 23 दिसंबर दे रखी थी। चिकित्सक न होने से अल्ट्रासाउंड मशीन शोपीस बनकर रह गई है। अस्पताल में 300 के करीब रोजाना की ओपीडी है और मरीजों को अल्ट्रासाउंड के लिए दो से ढाई माह बाद की तिथि मिलती है। अगर आपातकालीन किसी को अल्ट्रासाउंड करवाना हो तो उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। लोगों ने सरकार से मांग की है कि अल्ट्रासाउंड की सुविधा के लिए भोरंज अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट का पद सृजित किया जाए।
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कोर्ट में थी रेडियोलॉजिस्ट की गवाही: बीएमओ
बीएमओ भोरंज डा. ललित कालिया ने कहा कि अस्पताल में नई अल्ट्रासाउंड मशीन आ गई है, परंतु स्थायी रेडियोलॉजिस्ट का पद न होने से सप्ताह में एक बार ही अल्ट्रासाउंड होते है। वीरवार को डेपुटेशन पर आने वाले रेडियोलॉजिस्ट की कोर्ट में गवाही थी, इसके चलते वह नहीं आ पाए।
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क्या कहते हैं लोग -
डेढ़ घंटे इंतजार के बावजूद नहीं हुए अल्ट्रासाउंड : मोहित
मोहित ने कहा कि वीरवार को अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए अस्पताल आया। इस वीरवार का एक सप्ताह से इंतजार कर रहा था, लेकिन अस्पताल में डेढ़ घंटा इंतजार करने के बावजूद उन्हें बताया गया कि आज अल्ट्रासाउंड नहीं होंगे। इस कारण परेशानी हुई।
अस्पताल में सृजित हो रेडियोलॉजिस्ट का पद: संतोष
बीडीसी सदस्य संतोष कुमारी ने कहा कि 16 तारीख को वह अस्पताल में किसी मरीज को लेकर अल्ट्रासाउंड करवाने आई थी, लेकिन अल्ट्रासाउंड नहीं हुए। 23 दिसंबर की तिथि दी गई, लेकिन इस दिन भी अल्ट्रासाउंड नहीं हुए। अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट का पद सृजित कर स्थायी सुविधा देने की मांग की है।
सभी को बैरंग लौटना पड़ा : पवन
पवन कुमार ने कहा कि 16 तारीख वाले भी 23 को ही बुलाए थे। इस कारण करीब चार दर्जन मरीज एक दिन ही अल्ट्रासाउंड कराने पहुंचे, लेकिन सभी को निराश लौटना पड़ा। अस्पताल में शेष चिकित्सक तो हैं, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट की कमी खल रही है।
सप्ताह में दो बार डेपुटेशन पर आए चिकित्सक : विकास
विकास कुमार का कहना है कि जब तक अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट का पद सृजित नहीं होता है, तब तक सप्ताह में दो दिन डेपुटेशन के लिए रखे जाएं, ताकि एक दिन यदि चिकित्सक किन्हीं कारणों से नहीं आ पाता है तो जल्द ही लोगों को दूसरे दिन सुविधा मिल सके। नहीं तो लोगों को एक से दो माह इंतजार करना पड़ रहा है।