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मुस्लिम कन्याओं का पूजन कर भाईचारे का संदेश दे रहे पटयाऊ के बाशिंदे
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पटयाऊ में कन्या पूजन के दौरान मुस्लिम बच्चियां व अन्य।
- फोटो : Hamirpur-HP
हमीरपुर। जम्मू-कश्मीर में धर्म के नाम पर चल रहे तनाव के बीच जिला हमीरपुर के पटयाऊ गांव में हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की मिसाल पेश की गई है। आजकल नवरात्रों में कन्या पूजन किया जा रहा है। इसमें हिंदू धर्म की परंपराओं के अनुसार घरों में कन्या पूजन किया जाता है। लोग अपने ही धर्म की छोटी कन्याओं का पूजन करते हैं, लेकिन ग्राम पंचायत नाल्टी में ऐसा बिल्कुल भी नहीं हैं। नाल्टी पंचायत के गांव पटयाऊ के लोग गांव में बसे एक प्रवासी मुस्लिम परिवार को अपने धार्मिक कार्यक्रमों में ठीक वैसे ही शामिल करते हैं जैसे अन्य समुदाय के लोगों को किया जाता है। नवरात्रों में मंगलवार को सिंपल शर्मा पत्नी शशि पाल के घर में भजन कीर्तन था।
भजन कीर्तन के बाद कन्या पूजन किया गया। इसमें मुस्लिम समुदाय की भी बेटियों का पूजन किया गया। इलाके भर के लोग इसकी सराहना कर रहे हैं। आयोजक सिंपल ने कहा कि पड़ोस में ही प्रवासी मुस्लिम समुदाय का परिवार रहता है। उनके घर में कीर्तन था और उसके बाद कन्या पूजन किया गया। इसमें इस परिवार की बेटियों को भी शामिल किया गया।
उन्होंने कहा कि धर्म कोई भी हो, नवरात्र में हर बच्ची माता रानी का रूप होती है। इंसान ने धर्म बनाए हैं, भगवान ने नहीं। इस परिवार के लोग यहां के लोगों के साथ बहुत की प्रेम भावना के साथ रहते हैं और बहुत सहयोग करते हैं। वहीं, इन बेटियों की माता ऊरन कहती हैं कि वह उत्तर प्रदेश के जिला बदायूं की रहने वाली है। 15-16 वर्षों से यहीं रहती हैं।
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उनकी तीन बेटियां और एक बेटा है। बेटियों के नाम नरगिस, सिमरन, आलिया है और बेटे का नाम आरिश है। पति का नाम समसुदीन है। एक वर्ष पहले बीमार होने पर अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था। तब गांव के लोगों ने ही बच्चों को देखा। उन्होंने कहा कि लोग भी सहयोग करते हैं। धर्म से बड़ी इंसानियत होती है। आपस में झगड़ने की बजाय सभी धर्म के लोगों को प्यार से रहना चाहिए।
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भजन कीर्तन के बाद कन्या पूजन किया गया। इसमें मुस्लिम समुदाय की भी बेटियों का पूजन किया गया। इलाके भर के लोग इसकी सराहना कर रहे हैं। आयोजक सिंपल ने कहा कि पड़ोस में ही प्रवासी मुस्लिम समुदाय का परिवार रहता है। उनके घर में कीर्तन था और उसके बाद कन्या पूजन किया गया। इसमें इस परिवार की बेटियों को भी शामिल किया गया।
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उन्होंने कहा कि धर्म कोई भी हो, नवरात्र में हर बच्ची माता रानी का रूप होती है। इंसान ने धर्म बनाए हैं, भगवान ने नहीं। इस परिवार के लोग यहां के लोगों के साथ बहुत की प्रेम भावना के साथ रहते हैं और बहुत सहयोग करते हैं। वहीं, इन बेटियों की माता ऊरन कहती हैं कि वह उत्तर प्रदेश के जिला बदायूं की रहने वाली है। 15-16 वर्षों से यहीं रहती हैं।
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उनकी तीन बेटियां और एक बेटा है। बेटियों के नाम नरगिस, सिमरन, आलिया है और बेटे का नाम आरिश है। पति का नाम समसुदीन है। एक वर्ष पहले बीमार होने पर अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था। तब गांव के लोगों ने ही बच्चों को देखा। उन्होंने कहा कि लोग भी सहयोग करते हैं। धर्म से बड़ी इंसानियत होती है। आपस में झगड़ने की बजाय सभी धर्म के लोगों को प्यार से रहना चाहिए।