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निजी स्कूलों के वार्षिक शुल्क पर भड़के अभिभावक
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हमीरपुर। विद्यार्थियों से वार्षिक शुल्क वसूलने पर डीएवी स्कूल प्रबंधन हमीरपुर पर अभिभावक भड़क गए हैं। सोमवार को अभिभावकों ने गांधी चौक हमीरपुर पर एकत्रित होकर स्कूल प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की। अभिभावकों ने कहा कि अगर वार्षिक शुल्क वसूलने के आदेश वापस नहीं लिए तो मजबूर आंदोलन तेज करना पड़ेगा, जिसकी सारी जिम्मेवारी स्कूल प्रबंधन और जिला प्रशासन की होगी।
गांधी चौक से लेकर उपायुक्त कार्यालय तक अभिभावकों ने नारेबाजी करते हुए रैली भी निकाली। अभिभावकों ने एडीएम हमीरपुर के माध्यम से प्रदेश सरकार को ज्ञापन भेजा। जिसमें उन्होंने निजी स्कूलों की मनमानी को रोकने की गुहार लगाई। अभिभावकों का कहना है कि कोरोनाकाल की वजह से उनके बच्चों ने स्कूल का मुंह तक नहीं देखा। लोगों से पैसे उधार लेकर उन्होंने बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई के लिए मोबाइल खरीदे। बच्चों को मोबाइल पर मिलने वाले होमवर्क को खुद घर पर करवाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने केवल ट्यूशन फीस वसूलने के आदेश दिए थे, जबकि अन्य शुल्क वसूलने के लिए पीटीए और एसएमसी की बैठक में निर्णय लेने के लिए कहा था। डीएवी स्कूल में पीटीए और एसएमसी में स्कूल प्रबंधन के खुद के लोग शामिल हैं, जिसके चलते वह वार्षिक फीस का विरोध नहीं कर रहे। वार्षिक शुल्क न देने पर विद्यार्थियों को स्कूल से निकालने की धमकियां मिल रही हैं। उन्होंने सरकार से इस मामले में शीघ्र हस्तक्षेप कर उचित कार्रवाई की मांग की है।
इधर, एडीएम हमीरपुर जितेंद्र सांजटा ने कहा कि डीएवी स्कूल के विद्यार्थियों के अभिभावकों ने ज्ञापन सौंपा है। इस मामले में शिक्षा उपनिदेशक को आगामी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसके बाद अभिभावक शांत हुए और अपने घरों के लिए निकले।
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वहीं डीएवी स्कूल हमीरपुर के प्रधानाचार्य विश्वास कुमार ने कहा कि प्रदेश सरकार से वार्षिक शुल्क न वसूलने बारे लिखित में कोई आदेश नहीं मिले हैं। उन्होंने कहा कि स्कूल बसों का टैक्स, स्कूल में सैनिटाइजेशन कार्य और स्कूल स्टाफ को वेतन आदि कई खर्च करने पड़ते हैं, जिसकी भरपाई करने के लिए वार्षिक शुल्क वसूलना जरूरी है।
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गांधी चौक से लेकर उपायुक्त कार्यालय तक अभिभावकों ने नारेबाजी करते हुए रैली भी निकाली। अभिभावकों ने एडीएम हमीरपुर के माध्यम से प्रदेश सरकार को ज्ञापन भेजा। जिसमें उन्होंने निजी स्कूलों की मनमानी को रोकने की गुहार लगाई। अभिभावकों का कहना है कि कोरोनाकाल की वजह से उनके बच्चों ने स्कूल का मुंह तक नहीं देखा। लोगों से पैसे उधार लेकर उन्होंने बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई के लिए मोबाइल खरीदे। बच्चों को मोबाइल पर मिलने वाले होमवर्क को खुद घर पर करवाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने केवल ट्यूशन फीस वसूलने के आदेश दिए थे, जबकि अन्य शुल्क वसूलने के लिए पीटीए और एसएमसी की बैठक में निर्णय लेने के लिए कहा था। डीएवी स्कूल में पीटीए और एसएमसी में स्कूल प्रबंधन के खुद के लोग शामिल हैं, जिसके चलते वह वार्षिक फीस का विरोध नहीं कर रहे। वार्षिक शुल्क न देने पर विद्यार्थियों को स्कूल से निकालने की धमकियां मिल रही हैं। उन्होंने सरकार से इस मामले में शीघ्र हस्तक्षेप कर उचित कार्रवाई की मांग की है।
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इधर, एडीएम हमीरपुर जितेंद्र सांजटा ने कहा कि डीएवी स्कूल के विद्यार्थियों के अभिभावकों ने ज्ञापन सौंपा है। इस मामले में शिक्षा उपनिदेशक को आगामी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसके बाद अभिभावक शांत हुए और अपने घरों के लिए निकले।
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वहीं डीएवी स्कूल हमीरपुर के प्रधानाचार्य विश्वास कुमार ने कहा कि प्रदेश सरकार से वार्षिक शुल्क न वसूलने बारे लिखित में कोई आदेश नहीं मिले हैं। उन्होंने कहा कि स्कूल बसों का टैक्स, स्कूल में सैनिटाइजेशन कार्य और स्कूल स्टाफ को वेतन आदि कई खर्च करने पड़ते हैं, जिसकी भरपाई करने के लिए वार्षिक शुल्क वसूलना जरूरी है।