{"_id":"6a5d226f18314fed6009158b","slug":"papna-became-self-reliant-through-sewing-skills-hamirpur-hp-news-c-94-1-ssml1011-201496-2026-07-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hamirpur (Himachal) News: सिलाई के हुनर से आत्मनिर्भर बनीं पपना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hamirpur (Himachal) News: सिलाई के हुनर से आत्मनिर्भर बनीं पपना
Mon, 20 Jul 2026 12:45 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Mon, 20 Jul 2026 12:45 AM IST
विज्ञापन
चबूतरा की पपना सिलाई करते हुए। संवाद
- फोटो : katra news
हमीरपुर। मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर महिलाएं आज हर क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना रही हैं। चबूतरा की पपना ने नौकरी छोड़कर स्वरोजगार का रास्ता चुना और सिलाई-कढ़ाई के हुनर को आमदनी का जरिया बना लिया।
आज वह न केवल हर माह 15 से 20 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं, बल्कि गांव की 20 युवतियों को भी आत्मनिर्भर बनने का प्रशिक्षण दे चुकी हैं। 41 वर्षीय पपना के पति एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं।
परिवार की जिम्मेदारियों के साथ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के उद्देश्य से उन्होंने कुछ वर्ष पहले दिल्ली में नौकरी शुरू की। वहीं काम के दौरान उन्होंने सिलाई-कढ़ाई के क्षेत्र में अपने कौशल को और निखारा। बाद में पारिवारिक जिम्मेदारियों को देखते हुए उन्होंने नौकरी छोड़कर गांव लौटने का फैसला किया।
विज्ञापन
गांव लौटने के बाद पपना ने घर से ही सिलाई-कढ़ाई का काम शुरू किया। वह महिलाओं और युवतियों के लिए डिजाइनर सूट, सलवार-कमीज, ब्लाउज सहित अन्य परिधानों की सिलाई करती हैं। साथ ही अपने बुटीक में युवतियों को प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रही हैं।
अब तक 20 युवतियां उनके मार्गदर्शन में सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण लेकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ा चुकी हैं।
विज्ञापन
आज वह न केवल हर माह 15 से 20 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं, बल्कि गांव की 20 युवतियों को भी आत्मनिर्भर बनने का प्रशिक्षण दे चुकी हैं। 41 वर्षीय पपना के पति एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं।
विज्ञापन
परिवार की जिम्मेदारियों के साथ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के उद्देश्य से उन्होंने कुछ वर्ष पहले दिल्ली में नौकरी शुरू की। वहीं काम के दौरान उन्होंने सिलाई-कढ़ाई के क्षेत्र में अपने कौशल को और निखारा। बाद में पारिवारिक जिम्मेदारियों को देखते हुए उन्होंने नौकरी छोड़कर गांव लौटने का फैसला किया।
विज्ञापन
गांव लौटने के बाद पपना ने घर से ही सिलाई-कढ़ाई का काम शुरू किया। वह महिलाओं और युवतियों के लिए डिजाइनर सूट, सलवार-कमीज, ब्लाउज सहित अन्य परिधानों की सिलाई करती हैं। साथ ही अपने बुटीक में युवतियों को प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रही हैं।
अब तक 20 युवतियां उनके मार्गदर्शन में सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण लेकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ा चुकी हैं।