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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Hamirpur (Himachal) News ›   Papa, do not put tiles on the slope of the gate, there will be difficulty in bringing the bike inside.

Hamirpur (Himachal) News: पापा गेट की ढलान पर टाइल मत लगाना, बाइक अंदर लाने में होगी दिक्कत

Mon, 16 Sep 2024 02:28 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, धनेटा (हमीरपुर)
संवाद न्यूज एजेंसी, धनेटा (हमीरपुर) Published by: शिमला ब्यूरो Updated Mon, 16 Sep 2024 02:28 AM IST
सार

आतंकियों से मुठभेड़ से डेढ़ घंटा पहले पिता और परिवार से अरविंद ने बातचीत की थी। उस बातचीत के कुछ ऐसे अंश सामने आ रहे हैं जिनको सुनकर सभी के आंसू आ जा रहे हैं।

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Papa, do not put tiles on the slope of the gate, there will be difficulty in bringing the bike inside.
बलिदानी बेटे के अंतिम दर्शन के दौरान बिलख बिलख कर रोती मां। संवाद।

विस्तार

पापा गेट के पास ढलान पर टाइलें मत लगाइएगा। बाइक और स्कूटर अंदर ले जाने में दिक्कत होगी। आतंकी मुठभेड़ से डेढ़ घंटा पहले सरहद पर मां भारती की सेवा में तैनात बलिदानी अरविंद सिंह की पिता राजेंद्र से यह बातचीत हो रही थी। अरविंद जन्माष्टमी पर घर आए थे और आंगन में टाइल डालने के खरीदारी कर गए थे। अपनी पसंद की टाइलें खरीदी और वीडियो कॉल पर कार्य को देख रहे थे।

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किश्तवाड़ के डोडा सेक्टर में ड्यूटी पर जाने से महज डेढ़ घंटे पहले वह पिता राजेंद्र से वीडियो कॉल पर बात कर रहे थे। इस बातचीत के डेढ़ घंटे बाद ही ऑपरेशन के दौरान घात लगाकर बैठे आतंकियों ने उनपर गोली चला दी। मुठभेड़ में वह देश के लिए बलिदान हो गए। पिता राजेंद्र कहते हैं कि जब अरविंद (सिंटू) छुट्टी आया था तो आंगन में टाइलें डालने के लिए खरीद गया था। अरविंद को प्यार से घर में सिंटू बुलाते हैं। सिंटू से शुक्रवार को साढ़े बारह बजे बात हुई। वीडियो कॉल पर टाइलों का कार्य भी उसने देखा।
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बेटे ने कहा कि गेट के पास ढलान पर टाइल के बजाय फर्श डालिये ताकि बाइक-स्कूटर अंदर आने में दिक्कत न हो। उन्होंने कहा कि इसके बाद सिंटू ने अपने बेटे रियांश और पत्नी से भी बात की। बेटे ने कहा कि अब डयूटी पर जा रहा हूं फिर वापस आकर बात करूंगा। लेकिन, अब वह तिरंगे में लिपटा आया है। इतना कहते कहते बलिदानी के पिता राजेंद्र का गला रुंद गया। बोले- अब यह टाइलें भी उसकी याद बन गई हैं।
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बचपन से सेना में जाने का शौक था। बीकॉम की पढ़ाई के दौरान ही भर्ती हो गया। भर्ती होने पर बोला कि देश सेवा के लिए बीकॉम जरूरी नहीं है। अब आंगन में लगी एक-एक टाइल भी उसकी याद दिला रही है। बलिदानी अरविंद सिंह के डेढ़ साल के बच्चे रियांश के सिर से पिता का साया छिन गया है। मासूम बेखबर है कि अब उसके पापा लौटकर नहीं आएंगे। जब रविवार को अरविंद की पार्थिव देह घर पर पहुंची तो चीखो पुकार के माहौल में मौजूद सैकड़ों लोगों की आंखें रियांश को देखकर भी नम हो रही थीं।

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