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Hamirpur (Himachal) News: ओशिन ने कपड़े सिलकर लिखी आत्मनिर्भरता की कहानी
Mon, 23 Feb 2026 12:21 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Mon, 23 Feb 2026 12:21 AM IST
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बगारटी की ओशिन कपड़ों की सिलाई करते हुए। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। जिला मुख्यालय के सीमावर्ती क्षेत्र बगारटी की युवा महिला ओशिन भाटिया ने सिलाई के हुनर को अपना आधार बनाकर न केवल खुद को आर्थिक रूप से सक्षम बनाया है, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी मिसाल पेश की है।
ओशिन कुछ वर्ष पहले घरेलू जिम्मेदारियों में व्यस्त रहती थी। परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य थी, लेकिन बढ़ती जरूरतों के चलते आय अपर्याप्त साबित हो रही थी। ऐसे में ओशिन ने सोचा कि वे अपने हुनर को आय के साधन में बदल सकती है।
बचपन से ही उन्हें सिलाई-कढ़ाई में रुचि थी। वह घर में उपलब्ध पुरानी सिलाई मशीन से अपने और पड़ोस की महिलाओं के कपड़े सिल लिया करती थीं।
शादी के बाद उन्होंने बगारटी में एक निजी दुकान में कार्य करना शुरू किया। कार्य के दौरान उन्होंने आधुनिक डिजाइन, नाप लेने की तकनीक, बच्चों और महिलाओं के परिधानों की कटिंग तथा फिनिशिंग के बारे में विस्तार से प्रशिक्षण लिया। इसके उपरांत निजी संस्था के माध्यम से उन्होंने अपना निजी तौर पर कार्य शुरू करने का निर्णय लिया।
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संस्था से उन्हें तैयार किए गए सूटों को बेचने का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के बाद उन्होंने टेस्ट उत्तीर्ण किया। इसके बाद संस्था ने उन्हें इंटरलॉक मशीन, कटिंग टेबल के साथ काउंटर, अंबरेला मशीन और कुर्सी प्रदान की, ताकि उन्हें सिलाई करने में सहायता मिल सके।
मशीनरी मिलने के बाद ओशिन ने एक कमरे को ही कार्यस्थल में बदल दिया। शुरुआत में उन्होंने पड़ोस की महिलाओं के सूट, ब्लाउज और बच्चों के कपड़े सिलने शुरू किए। धीरे-धीरे उनके पास कई ऑर्डर आने लगे। अब वह हर महीने सिलाई के जरिए आठ से 10 हजार रुपये तक कमा रही हैं। त्योहारों और विवाह के सीजन में उनकी आय इससे भी अधिक हो जाती है।
ओशिन भविष्य में अपने कारोबार को और विस्तार देना चाहती हैं। उनका सपना है कि वे गांव में एक छोटा सिलाई प्रशिक्षण केंद्र खोलें, जहां अधिक से अधिक लड़कियां और महिलाएं प्रशिक्षण लेकर आत्मनिर्भर बन सकें।
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हमीरपुर। जिला मुख्यालय के सीमावर्ती क्षेत्र बगारटी की युवा महिला ओशिन भाटिया ने सिलाई के हुनर को अपना आधार बनाकर न केवल खुद को आर्थिक रूप से सक्षम बनाया है, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी मिसाल पेश की है।
ओशिन कुछ वर्ष पहले घरेलू जिम्मेदारियों में व्यस्त रहती थी। परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य थी, लेकिन बढ़ती जरूरतों के चलते आय अपर्याप्त साबित हो रही थी। ऐसे में ओशिन ने सोचा कि वे अपने हुनर को आय के साधन में बदल सकती है।
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बचपन से ही उन्हें सिलाई-कढ़ाई में रुचि थी। वह घर में उपलब्ध पुरानी सिलाई मशीन से अपने और पड़ोस की महिलाओं के कपड़े सिल लिया करती थीं।
शादी के बाद उन्होंने बगारटी में एक निजी दुकान में कार्य करना शुरू किया। कार्य के दौरान उन्होंने आधुनिक डिजाइन, नाप लेने की तकनीक, बच्चों और महिलाओं के परिधानों की कटिंग तथा फिनिशिंग के बारे में विस्तार से प्रशिक्षण लिया। इसके उपरांत निजी संस्था के माध्यम से उन्होंने अपना निजी तौर पर कार्य शुरू करने का निर्णय लिया।
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संस्था से उन्हें तैयार किए गए सूटों को बेचने का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के बाद उन्होंने टेस्ट उत्तीर्ण किया। इसके बाद संस्था ने उन्हें इंटरलॉक मशीन, कटिंग टेबल के साथ काउंटर, अंबरेला मशीन और कुर्सी प्रदान की, ताकि उन्हें सिलाई करने में सहायता मिल सके।
मशीनरी मिलने के बाद ओशिन ने एक कमरे को ही कार्यस्थल में बदल दिया। शुरुआत में उन्होंने पड़ोस की महिलाओं के सूट, ब्लाउज और बच्चों के कपड़े सिलने शुरू किए। धीरे-धीरे उनके पास कई ऑर्डर आने लगे। अब वह हर महीने सिलाई के जरिए आठ से 10 हजार रुपये तक कमा रही हैं। त्योहारों और विवाह के सीजन में उनकी आय इससे भी अधिक हो जाती है।
ओशिन भविष्य में अपने कारोबार को और विस्तार देना चाहती हैं। उनका सपना है कि वे गांव में एक छोटा सिलाई प्रशिक्षण केंद्र खोलें, जहां अधिक से अधिक लड़कियां और महिलाएं प्रशिक्षण लेकर आत्मनिर्भर बन सकें।