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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Hamirpur (Himachal) News ›   Order to pay Rs 10.22 lakh to cable networking company with 11.45% annual interest

Hamirpur (Himachal) News: केबल नेटवर्किंग कंपनी को 10.22 लाख रुपये 11.45% वार्षिक ब्याज के साथ चुकाने के आदेश

Mon, 13 Apr 2026 12:37 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.) Updated Mon, 13 Apr 2026 12:37 AM IST
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हमीरपुर। वरिष्ठ सिविल जज सूर्य प्रकाश की अदालत ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के पक्ष में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। मैसर्ज रॉयल सर्विस डिजिनेट विजन प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशकों को बैंक का बकाया ऋण चुकाने का आदेश दिया है।
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अदालत ने प्रतिवादियों को 10,22,386 की वसूली राशि, 11.45% वार्षिक ब्याज के साथ लौटाने का आदेश दिया है। यह मामला 2014 में शुरू हुआ था, जब कंपनी के प्रबंध निदेशक राजिंदर ठाकुर और निदेशक विनोद कुमार निवासी बजरोल तहसील सुजानपुर ने अपने केबल नेटवर्किंग व्यवसाय के लिए एसबीआई की टौणीदेवी शाखा से 8 लाख की कैश क्रेडिट सीमा ली थी।
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बाद में, दिसंबर 2014 में इस सीमा को बढ़ाकर 10 लाख कर दिया गया। सुभाष ठाकुर निवासी बजरोल तहसील सुजानपुर ने इस ऋण के लिए गारंटी दी थी, जिससे वे भी इस भुगतान के लिए संयुक्त रूप से उत्तरदायी बन गए।
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बैंक के अनुसार, प्रतिवादी नियमित रूप से आय जमा करने में विफल रहे, जिसके कारण 28 अक्टूबर 2017 को उनका खाता गैर-निष्पादित संपत्ति (एनपीए) घोषित कर दिया गया। बैंक द्वारा नोटिस दिए जाने के बावजूद बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया, जिसके परिणामस्वरूप 2018 में यह सिविल सूट दायर किया गया।
शुरुआत में प्रतिवादियों ने लिखित बयान दर्ज कर व्यावसायिक विफलता का हवाला दिया था, लेकिन बाद में वे अदालत में पेश नहीं हुए। प्रतिवादियों के उपस्थित न होने के कारण अदालत ने उनके खिलाफ प्रतिकूल अनुमान लगाया और मामला एकतरफा (एक्सपार्टी) तय किया।
बैंक की ओर से शाखा प्रबंधक मनोज कुमार ने गवाही दी और ऋण संबंधी महत्वपूर्ण दस्तावेज जैसे लोन एप्लीकेशन, गारंटी एग्रीमेंट और खाता विवरण अदालत में पेश किए गए।

अदालत ने बैंक के दावों को सही पाया और आदेश दिया कि प्रतिवादी संयुक्त और व्यक्तिगत रूप से 10,22,386 की राशि, मुकदमा शुरू होने की तारीख से वसूली तक 11.45 फीसदी ब्याज और मुकदमे के खर्च के साथ बैंक को भुगतान करें। यह फैसला 10 अप्रैल को सुनाया गया।
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