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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Hamirpur (Himachal) News ›   One year imprisonment for not following the order of Consumer Disputes Redressal Commission

Hamirpur (Himachal) News: उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग का आदेश न मानने पर एक साल कारावास की सजा

Thu, 14 May 2026 01:55 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.) Updated Thu, 14 May 2026 01:55 AM IST
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अदालत से
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हमीरपुर। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग हमीरपुर ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 72 के तहत महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए लुधियाना स्थित हरे कृष्णा आर्ट्स के नए स्वामियों एवं उत्तराधिकारियों को एक-एक वर्ष के साधारण कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है।
यह मामला वर्ष 2015 में खरीदी गई एक खराब मशीन से जुड़ा है। ‘द एड्स’ के प्रोपराइटर सुमित अग्निहोत्री ने मशीन खराब होने पर उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज करवाई थी। आयोग ने 8 अगस्त 2019 को आदेश दिया था कि फर्म मशीन बदले अथवा 8.16 लाख रुपये की राशि 9 प्रतिशत ब्याज सहित लौटाए।
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साथ ही मानसिक उत्पीड़न के लिए 25 हजार रुपये और कानूनी खर्च के लिए 10 हजार रुपये देने के निर्देश भी दिए गए थे। मामले में मूल प्रोपराइटर विनोद कुमार की नवंबर 2019 में मृत्यु हो गई थी।
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इसके बाद उनकी पत्नी पूजा और पुत्र नीतीश और नमन ने आयोग में कहा कि फर्म बंद हो चुकी है और वे जिम्मेदार नहीं हैं। हालांकि आयोग ने पाया कि प्रतिवादी अब भी हरे कृष्णा आर्ट्स नाम से कारोबार कर रहे हैं और फर्म की गुडविल का लाभ उठा रहे हैं।

आयोग ने यह भी माना कि जून 2022 में फर्म के नाम पर 31 हजार रुपये का भुगतान स्वीकार किया गया था, जिससे व्यवसाय जारी रहने की पुष्टि होती है। आयोग के अनुसार जीएसटी पंजीकरण रद्द करने का प्रयास भी कानूनी कार्रवाई से बचने के लक्ष्य से किया गया था।
आयोग के अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा, सदस्य स्नेह लता और जोगिंदर महाजन ने अपने फैसले में कहा कि कानूनी वारिस केवल व्यवसाय के लाभ ही नहीं, बल्कि उससे जुड़े दायित्वों के भी उत्तरदायी होते हैं।

आयोग ने तीनों दोषियों को एक-एक साल के साधारण कारावास और पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने पर छह महीने की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी।

हालांकि आयोग ने राहत देते हुए कहा कि यदि दोषी 30 दिन के भीतर वर्ष 2019 के मूल आदेश का पालन कर देते हैं, तो सजा और जुर्माना रद्द कर दिया जाएगा। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी अधिवक्ता विवेक शर्मा ने की है।
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