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पदोन्नति कोटे में न किया जाए बदलाव
ब्यूरो/अमर उजाला, हमीरपुर
Updated Mon, 04 Jan 2016 10:44 PM IST
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हिमाचल प्रदेश राजकीय अध्यापक संघ ने प्रधानाचार्य और उपनिदेशकों के पदों पर पदोन्नति के लिए मुख्याध्यापकों और प्रवक्ताओं के निर्धारित कोटे में बदलाव न करने की मांग की है।
संघ के राज्य अध्यक्ष विरेंद्र चौहान, महासचिव संजय मोगूू, अखिल भारतीय माध्यमिक शिक्षक संघ के उपाध्यक्ष सरोज मेहता, वरिष्ठ उपाध्यक्ष तपिशा थापा, प्रदेश प्रवक्ता अश्वनी भट्ट, नरेश कुमार और सुरेश नरयाल ने कहा कि कुछ स्वयंभू कर्मचारी नेता अपनी कुर्सी बचाने के लिए तथ्यहीन बयानबाजी कर रहे हैं।
प्रदेश में प्रधानाचार्य पदों पर पदोन्नति के लिए प्रवक्ताओं व मुख्याध्यापकों का अनुपात पूर्व में 60 और 40 था। इसे बाद में 50-50 कर दिया गया। प्रदेश में प्रवक्ताओं के दो वर्ग हैं एक सीधी भर्ती का है तो दूसरा पदोन्नत प्रवक्ताओं का है। प्रधानाचार्य पदों पर भर्ती के लिए पदोन्नत प्रवक्ताओं की वरिष्ठता टीजीटी से ली जाती है।
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उन्हें पहले मुख्याध्यापक बनना पड़ता है। इस प्रकार टीजीटी व पदोन्नत प्रवक्ताओं की संख्या का आंकड़ा तीस हजार से अधिक बनता है, जबकि सीधी भर्ती प्रवक्ताओं की संख्या मात्र तीन हजार भी नहीं है। यही कारण है कि एक टीजीटी अपने जीवन के अंतिम वर्षों में बड़ी मुश्किल से प्रधानाचार्य और मुख्याध्यापक बन पाता है। सीधी भर्ती के प्रवक्ता उनसे कहीं पहले प्रधानाचार्य बन जाते हैं।
प्रधानाचार्य पद से उपनिदेशक के पद पर पदोन्नति का कोटा मुख्याध्यापक कोटे से बने प्रधानाचार्यों के लिए 60 और प्रवक्ताओं के लिए 40 है। प्रदेश में मुख्याध्यापकों, टीजीटी अध्यापकों व पदोन्नत प्रवक्ताओं की संख्या सबसे ज्यादा है। इस कोटे में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ इन वर्गों के अध्यापकों के साथ अन्याय होगा। संघ ने मांग की कि प्रदेश में मुख्याध्यापक कोटे से खाली चल रहे प्रधानाचार्य के पदों को शीघ्र ही भरा जाए।
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संघ के राज्य अध्यक्ष विरेंद्र चौहान, महासचिव संजय मोगूू, अखिल भारतीय माध्यमिक शिक्षक संघ के उपाध्यक्ष सरोज मेहता, वरिष्ठ उपाध्यक्ष तपिशा थापा, प्रदेश प्रवक्ता अश्वनी भट्ट, नरेश कुमार और सुरेश नरयाल ने कहा कि कुछ स्वयंभू कर्मचारी नेता अपनी कुर्सी बचाने के लिए तथ्यहीन बयानबाजी कर रहे हैं।
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प्रदेश में प्रधानाचार्य पदों पर पदोन्नति के लिए प्रवक्ताओं व मुख्याध्यापकों का अनुपात पूर्व में 60 और 40 था। इसे बाद में 50-50 कर दिया गया। प्रदेश में प्रवक्ताओं के दो वर्ग हैं एक सीधी भर्ती का है तो दूसरा पदोन्नत प्रवक्ताओं का है। प्रधानाचार्य पदों पर भर्ती के लिए पदोन्नत प्रवक्ताओं की वरिष्ठता टीजीटी से ली जाती है।
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उन्हें पहले मुख्याध्यापक बनना पड़ता है। इस प्रकार टीजीटी व पदोन्नत प्रवक्ताओं की संख्या का आंकड़ा तीस हजार से अधिक बनता है, जबकि सीधी भर्ती प्रवक्ताओं की संख्या मात्र तीन हजार भी नहीं है। यही कारण है कि एक टीजीटी अपने जीवन के अंतिम वर्षों में बड़ी मुश्किल से प्रधानाचार्य और मुख्याध्यापक बन पाता है। सीधी भर्ती के प्रवक्ता उनसे कहीं पहले प्रधानाचार्य बन जाते हैं।
प्रधानाचार्य पद से उपनिदेशक के पद पर पदोन्नति का कोटा मुख्याध्यापक कोटे से बने प्रधानाचार्यों के लिए 60 और प्रवक्ताओं के लिए 40 है। प्रदेश में मुख्याध्यापकों, टीजीटी अध्यापकों व पदोन्नत प्रवक्ताओं की संख्या सबसे ज्यादा है। इस कोटे में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ इन वर्गों के अध्यापकों के साथ अन्याय होगा। संघ ने मांग की कि प्रदेश में मुख्याध्यापक कोटे से खाली चल रहे प्रधानाचार्य के पदों को शीघ्र ही भरा जाए।