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नीट पेपरलीक की हो सीबीआई जांच : धर्माणी
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कैबिनेट मंत्री ने प्रदेश में उपचुनाव में जीत का किया दावा
कहा, गलत लोगों के हाथ लग गए निर्दलीय विधायक
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। नीट और यूजीसी नेट में पेपरलीक के आरोपों की सीबीआई जांच जरूरी है। इंटरनेट के जमाने में पर्चा लीक होने की रफ्तार बेहद अधिक रहती है। कितने अभ्यर्थियों के पास यह पेपर पहुंचा था, इसका कोई अंदाजा नहीं है। हिमाचल प्रदेश के तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने हमीरपुर की प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी पर सवाल उठे हैं। इस मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए, हालांकि सीबीआई से भी बड़ी निष्पक्ष जांच की उम्मीद आज के दौर में नहीं की जा सकती है लेकिन स्वतंत्र एजेंसी से मामले की जांच जरूरी है। इन परीक्षाओं का आयोजन दोबारा से होना चाहिए।
हमीरपुर उपचुनाव में कांग्रेस पार्टी के प्रभारी कैबिनेट मंत्री राजेश धर्माणी ने प्रदेश में हो रहे तीनों उपचुनाव में जीत का दावा किया है। जिला मुख्यालय में उन्होंने कहा कि हमीरपुर की जनता सत्ता पक्ष के उम्मीदवार के साथ चलेगी। हमीरपुर की जनता शिक्षित है और सत्ता पक्ष के साथ चलकर मुख्यमंत्री के हाथों को मजबूत करेगी। आगामी साढ़े तीन साल में लोगों ने अपने क्षेत्र के लिए सरकार का लाभ उठाना है, इसलिए लोग सत्ता पक्ष कांग्रेस सरकार के साथ चलेंगे। कैबिनेट मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि टिकट के लिए हर कार्यकर्ता मांग करता है लेकिन टिकट केवल एक ही व्यक्ति को मिलता है। देहरा में डाॅ. राजेश को भी हाईकमान ने पिछली बार टिकट दिया था और उस समय भी डाॅ. राजेश के साथ बाकी सभी कार्यकर्ता कांग्रेस के साथ डट गए थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की ओर से सशक्त उम्मीदवार मुख्यमंत्री की पत्नी कमलेश ठाकुर को उतारा है और जनता की मांग पर ही हाईकमान ने टिकट देने का फैसला लिया है। राजेश धर्माणी ने कहा कि हमीरपुर की जनता ने निर्दलीय विधायकों को जीता कर विधानसभा में भेजा था लेकिन छह माह बाद ही यहां के विधायक गलत लोगों के हाथों में फंस कर गलत राजनीति कर रहे हैं। इससे यहां पर उपचुनाव की नौबत आई है। उन्होंने कहा कि सरकार को गिराने के षड्यंत्र के साथ भाजपा के बड़े नेताओं ने जयराम ठाकुर और अनुराग ठाकुर को कमजोर करने का प्रयास किया है। तीन निर्दलीय विधायकों को समझदारी से काम लेना चाहिए था। यदि वह विपक्ष में कार्य करना चाहते थे तो भाजपा के एसोसिएट सदस्य बन जाते, उसके लिए इस्तीफा देने की जरूरत नहीं थी।
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कहा, गलत लोगों के हाथ लग गए निर्दलीय विधायक
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। नीट और यूजीसी नेट में पेपरलीक के आरोपों की सीबीआई जांच जरूरी है। इंटरनेट के जमाने में पर्चा लीक होने की रफ्तार बेहद अधिक रहती है। कितने अभ्यर्थियों के पास यह पेपर पहुंचा था, इसका कोई अंदाजा नहीं है। हिमाचल प्रदेश के तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने हमीरपुर की प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी पर सवाल उठे हैं। इस मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए, हालांकि सीबीआई से भी बड़ी निष्पक्ष जांच की उम्मीद आज के दौर में नहीं की जा सकती है लेकिन स्वतंत्र एजेंसी से मामले की जांच जरूरी है। इन परीक्षाओं का आयोजन दोबारा से होना चाहिए।
हमीरपुर उपचुनाव में कांग्रेस पार्टी के प्रभारी कैबिनेट मंत्री राजेश धर्माणी ने प्रदेश में हो रहे तीनों उपचुनाव में जीत का दावा किया है। जिला मुख्यालय में उन्होंने कहा कि हमीरपुर की जनता सत्ता पक्ष के उम्मीदवार के साथ चलेगी। हमीरपुर की जनता शिक्षित है और सत्ता पक्ष के साथ चलकर मुख्यमंत्री के हाथों को मजबूत करेगी। आगामी साढ़े तीन साल में लोगों ने अपने क्षेत्र के लिए सरकार का लाभ उठाना है, इसलिए लोग सत्ता पक्ष कांग्रेस सरकार के साथ चलेंगे। कैबिनेट मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि टिकट के लिए हर कार्यकर्ता मांग करता है लेकिन टिकट केवल एक ही व्यक्ति को मिलता है। देहरा में डाॅ. राजेश को भी हाईकमान ने पिछली बार टिकट दिया था और उस समय भी डाॅ. राजेश के साथ बाकी सभी कार्यकर्ता कांग्रेस के साथ डट गए थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की ओर से सशक्त उम्मीदवार मुख्यमंत्री की पत्नी कमलेश ठाकुर को उतारा है और जनता की मांग पर ही हाईकमान ने टिकट देने का फैसला लिया है। राजेश धर्माणी ने कहा कि हमीरपुर की जनता ने निर्दलीय विधायकों को जीता कर विधानसभा में भेजा था लेकिन छह माह बाद ही यहां के विधायक गलत लोगों के हाथों में फंस कर गलत राजनीति कर रहे हैं। इससे यहां पर उपचुनाव की नौबत आई है। उन्होंने कहा कि सरकार को गिराने के षड्यंत्र के साथ भाजपा के बड़े नेताओं ने जयराम ठाकुर और अनुराग ठाकुर को कमजोर करने का प्रयास किया है। तीन निर्दलीय विधायकों को समझदारी से काम लेना चाहिए था। यदि वह विपक्ष में कार्य करना चाहते थे तो भाजपा के एसोसिएट सदस्य बन जाते, उसके लिए इस्तीफा देने की जरूरत नहीं थी।
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