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Hamirpur (Himachal) News: आभा आईडी से ओपीडी पर्ची बनवाना बुजुर्गों के लिए आफत, परेशानी बढ़ी
Sun, 19 Jan 2025 12:29 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Sun, 19 Jan 2025 12:29 AM IST
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डॉ राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज में ओपीडी पर्ची बनाते हुए मरीज। स्रोत : संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में आभा आईडी के माध्यम से ओपीडी पर्ची बनाने की सुविधा दी गई है। यह सुविधा बुजुर्गों के लिए आफत बन गई है।
इस सुविधा का प्रयोग करने के लिए नेटयुक्त एंड्रॉयड मोबाइल की जरूरत रहती है। पर्ची बनाने की इस नई सुविधा से मरीज खासकर बुजुर्ग परेशान हो रहे हैं। कभी इंटरनेट की समस्या तो कभी एंड्रायड मोबाइल के अभाव में पर्ची बनाने में दो से तीन घंटे लग रहे हैं।
ऐसे में इलाज के लिए ग्रामीण क्षेत्र से पहुंच रही महिलाएं, वृद्ध काफी परेशान हो रहे हैं। पहले ओपीडी में इलाज के लिए मरीज को काउंटर पर जाकर केवल नाम, पता और उम्र बताना होता था।
अब आभा आईडी से स्कैन के माध्यम से पर्ची बनाई जा रही है, जिनके पास नेटयुक्त एंड्राॅयड मोबाइल है, उनकी तो आसानी से पर्ची बन रही है, लेकिन जिनके पास मोबाइल नहीं हैं, वह पर्ची के लिए भटकते नजर आ रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में रोजाना करीब 1000 से 1500 ओपीडी रहती है। यहां पर जिला के अलावा अन्य जिलों से भी मरीज आते हैं। सुबह 9:00 बजे से ही पर्ची बनाने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।
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हमीरपुर। डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में आभा आईडी के माध्यम से ओपीडी पर्ची बनाने की सुविधा दी गई है। यह सुविधा बुजुर्गों के लिए आफत बन गई है।
इस सुविधा का प्रयोग करने के लिए नेटयुक्त एंड्रॉयड मोबाइल की जरूरत रहती है। पर्ची बनाने की इस नई सुविधा से मरीज खासकर बुजुर्ग परेशान हो रहे हैं। कभी इंटरनेट की समस्या तो कभी एंड्रायड मोबाइल के अभाव में पर्ची बनाने में दो से तीन घंटे लग रहे हैं।
ऐसे में इलाज के लिए ग्रामीण क्षेत्र से पहुंच रही महिलाएं, वृद्ध काफी परेशान हो रहे हैं। पहले ओपीडी में इलाज के लिए मरीज को काउंटर पर जाकर केवल नाम, पता और उम्र बताना होता था।
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अब आभा आईडी से स्कैन के माध्यम से पर्ची बनाई जा रही है, जिनके पास नेटयुक्त एंड्राॅयड मोबाइल है, उनकी तो आसानी से पर्ची बन रही है, लेकिन जिनके पास मोबाइल नहीं हैं, वह पर्ची के लिए भटकते नजर आ रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में रोजाना करीब 1000 से 1500 ओपीडी रहती है। यहां पर जिला के अलावा अन्य जिलों से भी मरीज आते हैं। सुबह 9:00 बजे से ही पर्ची बनाने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।

डॉ राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज में ओपीडी पर्ची बनाते हुए मरीज। स्रोत : संवाद

डॉ राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज में ओपीडी पर्ची बनाते हुए मरीज। स्रोत : संवाद

डॉ राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज में ओपीडी पर्ची बनाते हुए मरीज। स्रोत : संवाद
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