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Hamirpur (Himachal) News: लदरौर का ऐतिहासिक सायर मेला आज से होगा शुरू
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लदरौर स्कूल के लेकर संतोषी माता मंदिर तक सजेंगी मेले में दुकानें
बाबा लखमीर दास के मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ होगा मेले का शुभारंभ
संवाद न्यूज एजेंसी
जाहू (हमीरपुर)। लदरौर का ऐतिहासिक सायर मेला हर वर्ष सितंबर की अश्विन संक्रांति के दिन धूमधाम से मनाया जाता है। इस बार यह मेला 15 सितंबर से शुरू होगा और 17 तक लगेगा। जिस तरह गेंहू के पकने पर बैसाखी मनाई जाती है, उसी तर्ज पर सायर भी मक्की के पकने की खुशी पर मनाई जाती है। सायर का त्योहार काला महीना खत्म होते ही दूसरे दिन शुरू होता है। किसान इस दिन मक्की की फसल को काटना भी शुभ मानते हैं। हर घर में सायर पूजन किया जाता है तथा रक्षाबंधन के दिन हाथ में बांधी गई राखी को खोल कर वृक्ष पर बांधा जाता है। हमीरपुर जिला के उप मंडल भोरंज के अंतर्गत लदरौर में सायर मेला दो जिलों बिलासपुर और हमीरपुर के संगम स्थल पर लगता है।
मान्यता के अनुसार करीब 400 वर्ष पहले सिखों के 10वें गुरु गोबिंद सिंह का छोटा भाई बाबा लखमीर सिंह का हिमाचल आना हुआ। उन्होंने गांव-गांव में घूमकर सनातन धर्म का प्रचार किया। संत लखमीर सिंह किसी के घर नहीं ठहरते थे। अपितु गांव के किसी वट वृक्ष या पीपल के पेड़ के नीचे अपना आसन लगाते थे और वहां भजन कीर्तन, सत्संग के साथ लंगर का बंदोबस्त भी करते थे। इस दौरान क्षेत्र में पानी की गंभीर समस्या थी, लेकिन बाबा लखमीर सिंह जिस गांव में अपने भक्तों के साथ प्रवेश करते थे वहां योग साधना से पानी का स्रोत आता था। लदरौर का सायर का मेला भी ऐसी ही चमत्कारी घटना व बलिदान की घटना का नतीजा है। कहा जाता है कि बाबा लखमीर सिंह लदरौर कस्बे में अपने शिष्यों के साथ पधारे। वह अपने घोड़े पर सवार होकर लदरौर खुर्द के पास निकल रहे थे तो अचानक बरगद की टहनियों से उनकी पगड़ी अचानक टकरा गई और धरती पर गिर गई। इसे अपमान समझकर बाबा लखमीर सिंह ने क्रोधित हो गए और उन्होंने गुस्से में बरगद को श्राप दे दिया। क्षेत्रवासियों ने देखा कि कुछ ही दिनों के बाद बरगद का पेड़ सूख कर गिरने लगा था। जब बाबा दोबारा इसी क्षेत्र से अपनी यात्रा कर रहे थे तो लोगो ने बरगद को पुन: हरा-भरा करने की प्रार्थना की। बाबा लखमीर सिंह ने लोगों की प्रार्थना को स्वीकारते हुए अपने श्राप को वापस ले लिया। कुछ दिनों के उपरांत बरगद का वृक्ष हरा-भरा हो गया। इस खुशी में लोगों ने यहां पर एक मंदिर का निर्माण किया है। आज भी वर्षों पुराना बूढ़ा बरगद हरा-भरा है। यहां पर वर्षों से लोग सायर मेला मनाते आ रहे हैं। इसके लिए बाकायदा मंदिर कमेटी का गठन किया गया है। इस बारे में मंदिर कमेटी के सचिव संजीव कुमार ने कहा कि मंदिर में पूजा अर्चना के बाद तीन दिनों तक चलने वाले मेले का शुभारंभ होगी। मंदिर कमेटी श्रद्धालुओं के लिए 15, 16 व 17 सितंबर तक हर रोज लंगर लगाएगी। उन्होंने कहा कि मेले का शुभारंभ भोरंज विधायक सुरेश कुमार 15 सितंबर को करेंगे। झरलोग पंचायत उप प्रधान अरुण ठाकुर ने कहा कि पंचायत मेले में आने वाले दुकानदारों के लिए पानी की सुविधा के लिए 16 नल लगाएगी। चार शौचालयों व स्नानागार की सुविधा भी मुहैया करवाई जा रही है। इसके अलावा दुकानदारों को साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना होगा। इसके लिए भोरंज के एसडीएम संजय स्वरूप में बैठक करके आदेश जारी किए हैं।
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बाबा लखमीर दास के मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ होगा मेले का शुभारंभ
संवाद न्यूज एजेंसी
जाहू (हमीरपुर)। लदरौर का ऐतिहासिक सायर मेला हर वर्ष सितंबर की अश्विन संक्रांति के दिन धूमधाम से मनाया जाता है। इस बार यह मेला 15 सितंबर से शुरू होगा और 17 तक लगेगा। जिस तरह गेंहू के पकने पर बैसाखी मनाई जाती है, उसी तर्ज पर सायर भी मक्की के पकने की खुशी पर मनाई जाती है। सायर का त्योहार काला महीना खत्म होते ही दूसरे दिन शुरू होता है। किसान इस दिन मक्की की फसल को काटना भी शुभ मानते हैं। हर घर में सायर पूजन किया जाता है तथा रक्षाबंधन के दिन हाथ में बांधी गई राखी को खोल कर वृक्ष पर बांधा जाता है। हमीरपुर जिला के उप मंडल भोरंज के अंतर्गत लदरौर में सायर मेला दो जिलों बिलासपुर और हमीरपुर के संगम स्थल पर लगता है।
मान्यता के अनुसार करीब 400 वर्ष पहले सिखों के 10वें गुरु गोबिंद सिंह का छोटा भाई बाबा लखमीर सिंह का हिमाचल आना हुआ। उन्होंने गांव-गांव में घूमकर सनातन धर्म का प्रचार किया। संत लखमीर सिंह किसी के घर नहीं ठहरते थे। अपितु गांव के किसी वट वृक्ष या पीपल के पेड़ के नीचे अपना आसन लगाते थे और वहां भजन कीर्तन, सत्संग के साथ लंगर का बंदोबस्त भी करते थे। इस दौरान क्षेत्र में पानी की गंभीर समस्या थी, लेकिन बाबा लखमीर सिंह जिस गांव में अपने भक्तों के साथ प्रवेश करते थे वहां योग साधना से पानी का स्रोत आता था। लदरौर का सायर का मेला भी ऐसी ही चमत्कारी घटना व बलिदान की घटना का नतीजा है। कहा जाता है कि बाबा लखमीर सिंह लदरौर कस्बे में अपने शिष्यों के साथ पधारे। वह अपने घोड़े पर सवार होकर लदरौर खुर्द के पास निकल रहे थे तो अचानक बरगद की टहनियों से उनकी पगड़ी अचानक टकरा गई और धरती पर गिर गई। इसे अपमान समझकर बाबा लखमीर सिंह ने क्रोधित हो गए और उन्होंने गुस्से में बरगद को श्राप दे दिया। क्षेत्रवासियों ने देखा कि कुछ ही दिनों के बाद बरगद का पेड़ सूख कर गिरने लगा था। जब बाबा दोबारा इसी क्षेत्र से अपनी यात्रा कर रहे थे तो लोगो ने बरगद को पुन: हरा-भरा करने की प्रार्थना की। बाबा लखमीर सिंह ने लोगों की प्रार्थना को स्वीकारते हुए अपने श्राप को वापस ले लिया। कुछ दिनों के उपरांत बरगद का वृक्ष हरा-भरा हो गया। इस खुशी में लोगों ने यहां पर एक मंदिर का निर्माण किया है। आज भी वर्षों पुराना बूढ़ा बरगद हरा-भरा है। यहां पर वर्षों से लोग सायर मेला मनाते आ रहे हैं। इसके लिए बाकायदा मंदिर कमेटी का गठन किया गया है। इस बारे में मंदिर कमेटी के सचिव संजीव कुमार ने कहा कि मंदिर में पूजा अर्चना के बाद तीन दिनों तक चलने वाले मेले का शुभारंभ होगी। मंदिर कमेटी श्रद्धालुओं के लिए 15, 16 व 17 सितंबर तक हर रोज लंगर लगाएगी। उन्होंने कहा कि मेले का शुभारंभ भोरंज विधायक सुरेश कुमार 15 सितंबर को करेंगे। झरलोग पंचायत उप प्रधान अरुण ठाकुर ने कहा कि पंचायत मेले में आने वाले दुकानदारों के लिए पानी की सुविधा के लिए 16 नल लगाएगी। चार शौचालयों व स्नानागार की सुविधा भी मुहैया करवाई जा रही है। इसके अलावा दुकानदारों को साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना होगा। इसके लिए भोरंज के एसडीएम संजय स्वरूप में बैठक करके आदेश जारी किए हैं।
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