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उच्च जोखिम गर्भवती महिलाओं को समय पर मिले उपचार : डॉ. प्रवीण
Tue, 13 Aug 2024 07:01 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Tue, 13 Aug 2024 07:01 AM IST
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सीएमओ कार्यालय में आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते सीएमओ। स्रोत : डीपीआरओ
हमीरपुर। मुख्य चिकित्सा अधिकारी हमीरपुर डॉ. प्रवीण चौधरी ने कहा कि खंड चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी गर्भवती महिलाओं का नियमित रूप से जांच सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान कर उचित चिकित्सा प्रदान की जाए। डॉ. प्रवीण सोमवार को सीएमओ ऑफिस के कांफ्रेंस हॉल में जिला स्तरीय मासिक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि 35 वर्ष से अधिक या 18 वर्ष से कम उम्र की गर्भवती महिलाओं में उच्च जोखिम हो सकता है। इसके साथ ही गर्भवती महिला उच्च रक्तचाप, मधुमेह, गुर्दे की बीमारियां से भी पीड़ित हो सकती है। गर्भ में जुड़वां शिशु, पिछली गर्भावस्थाओं में गर्भपात, समय से पहले जन्म सहित अन्य जटिलताएं हो सकती हैं। इससे महिला और आने वाले शिशु को खतरा हो सकता है। इससे महिला और शिशु को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
डॉ. चौधरी ने कहा कि जोखिम पूर्ण गर्भावस्थाओं का सही समय पर निदान और उचित प्रबंधन अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे में सभी खंड चिकित्सा अधिकारी गर्भवती महिलाओं का नियमित रूप से जांच सुनिश्चित करें और उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उन्हें उचित चिकित्सा प्रदान की जाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के दौरान हर माह की नौ तारीख को गर्भवती महिला की सही तरीके से जांच होनी चाहिए और इसकी रिपोर्टिंग भी समय पर की जानी चाहिए।
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उन्होंने यह भी कहा की आशा कार्यकर्ता जो घर पर नवजात शिशु की देखभाल के लिए सात बार जाती हैं, उनका स्वास्थ्य कार्यकर्ता के द्वारा समय-समय पर पर्यवेक्षण भी किया जाना चाहिए। उन्होंने इस अवसर पर खण्ड चिकित्सा अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए कि परिवार नियोजन का लक्ष्य पूरा करने के लिए गर्भवती महिलाओं को गर्भ काल से ही उनकी परिवार नियोजन के तरीकों को अपनाने के लिए काउंसलिंग की जानी चाहिए।
इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रवीण चौधरी ने स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने खंड चिकित्सा अधिकारियों को गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण और बच्चे के टीकाकरण का डाटा सही और समय पर एक्सेल शीट पर पंजीकृत करने के निर्देश दिए।
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उन्होंने कहा कि 35 वर्ष से अधिक या 18 वर्ष से कम उम्र की गर्भवती महिलाओं में उच्च जोखिम हो सकता है। इसके साथ ही गर्भवती महिला उच्च रक्तचाप, मधुमेह, गुर्दे की बीमारियां से भी पीड़ित हो सकती है। गर्भ में जुड़वां शिशु, पिछली गर्भावस्थाओं में गर्भपात, समय से पहले जन्म सहित अन्य जटिलताएं हो सकती हैं। इससे महिला और आने वाले शिशु को खतरा हो सकता है। इससे महिला और शिशु को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
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डॉ. चौधरी ने कहा कि जोखिम पूर्ण गर्भावस्थाओं का सही समय पर निदान और उचित प्रबंधन अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे में सभी खंड चिकित्सा अधिकारी गर्भवती महिलाओं का नियमित रूप से जांच सुनिश्चित करें और उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उन्हें उचित चिकित्सा प्रदान की जाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के दौरान हर माह की नौ तारीख को गर्भवती महिला की सही तरीके से जांच होनी चाहिए और इसकी रिपोर्टिंग भी समय पर की जानी चाहिए।
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उन्होंने यह भी कहा की आशा कार्यकर्ता जो घर पर नवजात शिशु की देखभाल के लिए सात बार जाती हैं, उनका स्वास्थ्य कार्यकर्ता के द्वारा समय-समय पर पर्यवेक्षण भी किया जाना चाहिए। उन्होंने इस अवसर पर खण्ड चिकित्सा अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए कि परिवार नियोजन का लक्ष्य पूरा करने के लिए गर्भवती महिलाओं को गर्भ काल से ही उनकी परिवार नियोजन के तरीकों को अपनाने के लिए काउंसलिंग की जानी चाहिए।
इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रवीण चौधरी ने स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने खंड चिकित्सा अधिकारियों को गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण और बच्चे के टीकाकरण का डाटा सही और समय पर एक्सेल शीट पर पंजीकृत करने के निर्देश दिए।