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Hamirpur (Himachal) News: पहले सूखा, अब बेमौसमी बारिश और ओलावृष्टि का कहर
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रंगस (हमीरपुर)। हमीरपुर के अलावा आसपास के क्षेत्रों में किसानों की फसलों पर पहले सूखे की मार पड़ी और अब बेमौसमी बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं की फसल और फलदार पौधों पर निकलने वाला अंकुरण बुरी तरह नष्ट हो गया है। इससे किसानों को काफी बड़ा आघात पहुंचा है। क्षेत्र के किसान रमेश चंद, रांझा राम, देवराज ठाकुर और कुलदीप सिंह ने कहा कि काफी लंबे समय तक किसान सूखे की स्थिति को झेलते रहे। इससे गेहूं की फसल पर विपरीत असर पड़ा। यहां तक की पीला रतुआ रोग से फसल बुरी तरह प्रभावित हुई। अब तीन दिन पूर्व बेमौसमी और जोरदार बारिश के साथ ओलावृष्टि होने पर बची हुई और भी ज्यादा तहस-नहस हो गई है।
गेहूं की फसल के अलावा फलदार पौधे जैसे आम और लीची आदि गुठलीदार पौधों में निकलने वाला फूल ओलावृष्टि होने से अधिकतर झड़ गया है। इससे जहां किसान निराश हुए हैं। वहीं, प्रदेश के निचले क्षेत्र में किसानों की आए पर भी बुरा असर पड़ा है। क्योंकि निचले क्षेत्र के किसान अधिकतर परंपरागत फसलों पर ही निर्भर करते हैं। यहां के किसान खेतों में होने वाली परंपरागत फसलों की पैदावार का कुछ हिस्सा अपने खाने के लिए रख लेते हैं और बाकी की पैदावार को व्यापारियों को बेचकर अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं। इसलिए मौसम का अनुकूल होना उनके लिए बहुत ही अनिवार्य है। सभी किसानों ने कृषि विभाग और बागवानी विभाग के अलावा प्रशासन और शासन से भी मांग की है कि किसानों की फसल को होने वाले नुकसान का एक सर्वेक्षण करवा कर उनके लिए उचित मुआवजे की व्यवस्था की जाए। ताकि किसानों को थोड़ी राहत मिल सके। उधर, कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. अतुल डोगरा ने बताया कि सूखे और पीला रतुए के कारण जिले में गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचा है।
बीमा राशि की कर सकते हैं मांग
उद्यानिकी विभाग के उपनिदेशक डॉ. राजेश्वर सिंह परमार ने कहा कि वैसे तो बागवानी के क्षेत्र में बारिश का लाभ होता है और अभी तक फिलहाल हमारे ध्यान में ऐसा कोई मामला नहीं आया है कि बागवानी के क्षेत्र में इस बारिश से या ओलावृष्टि से कोई नुकसान हुआ है। यदि फिर भी किसी किसान और बागवान का कोई फसल का नुकसान हुआ होगा तो इसमें फसल बीमा योजना के तहत जिन किसान और बागवानों ने अपनी फसल का बीमा करवाया होगा, इनको बीमा करने वाली कंपनी की ओर से ही मुआवजा देने का प्रावधान होता है। किसान संबंधित कंपनी या जिस बैंक से कंपनी का करार है, उसको सूचना दे सकते हैं। बागवानी के क्षेत्र में आम और नींबू प्रजाति के फलों का फसल बीमा करवाने का प्रावधान है जिस भी किसी किसान भाई ने उपरोक्त फसलों का बीमा करवाया है वह बीमा कंपनी से संपर्क कर सकता है। बाकी सीधे तौर पर विभाग से या सरकार से कोई भी आर्थिक मदद मिलने का प्रावधान फिलहाल नहीं है।
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गेहूं की फसल के अलावा फलदार पौधे जैसे आम और लीची आदि गुठलीदार पौधों में निकलने वाला फूल ओलावृष्टि होने से अधिकतर झड़ गया है। इससे जहां किसान निराश हुए हैं। वहीं, प्रदेश के निचले क्षेत्र में किसानों की आए पर भी बुरा असर पड़ा है। क्योंकि निचले क्षेत्र के किसान अधिकतर परंपरागत फसलों पर ही निर्भर करते हैं। यहां के किसान खेतों में होने वाली परंपरागत फसलों की पैदावार का कुछ हिस्सा अपने खाने के लिए रख लेते हैं और बाकी की पैदावार को व्यापारियों को बेचकर अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं। इसलिए मौसम का अनुकूल होना उनके लिए बहुत ही अनिवार्य है। सभी किसानों ने कृषि विभाग और बागवानी विभाग के अलावा प्रशासन और शासन से भी मांग की है कि किसानों की फसल को होने वाले नुकसान का एक सर्वेक्षण करवा कर उनके लिए उचित मुआवजे की व्यवस्था की जाए। ताकि किसानों को थोड़ी राहत मिल सके। उधर, कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. अतुल डोगरा ने बताया कि सूखे और पीला रतुए के कारण जिले में गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचा है।
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बीमा राशि की कर सकते हैं मांग
उद्यानिकी विभाग के उपनिदेशक डॉ. राजेश्वर सिंह परमार ने कहा कि वैसे तो बागवानी के क्षेत्र में बारिश का लाभ होता है और अभी तक फिलहाल हमारे ध्यान में ऐसा कोई मामला नहीं आया है कि बागवानी के क्षेत्र में इस बारिश से या ओलावृष्टि से कोई नुकसान हुआ है। यदि फिर भी किसी किसान और बागवान का कोई फसल का नुकसान हुआ होगा तो इसमें फसल बीमा योजना के तहत जिन किसान और बागवानों ने अपनी फसल का बीमा करवाया होगा, इनको बीमा करने वाली कंपनी की ओर से ही मुआवजा देने का प्रावधान होता है। किसान संबंधित कंपनी या जिस बैंक से कंपनी का करार है, उसको सूचना दे सकते हैं। बागवानी के क्षेत्र में आम और नींबू प्रजाति के फलों का फसल बीमा करवाने का प्रावधान है जिस भी किसी किसान भाई ने उपरोक्त फसलों का बीमा करवाया है वह बीमा कंपनी से संपर्क कर सकता है। बाकी सीधे तौर पर विभाग से या सरकार से कोई भी आर्थिक मदद मिलने का प्रावधान फिलहाल नहीं है।
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