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कर्मचारी और पेंशनर अब सुक्खू सरकार को सिखाएंगे सबक : राजेंद्र राणा
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कहा, झूठी गारंटियां ही सुक्खू सरकार के गले की बन गई हैं फांस
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। पूर्व विधायक और सुजानपुर उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी राजेंद्र राणा ने बुधवार को सुजानपुर विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर एक दर्जन से अधिक नुक्कड़ सभाओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि खुद को कर्मचारियों की हितैषी बताने वाली सुक्खू सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनरों को नए वेतन आयोग के तहत मिलने वाले एरियर का एक नया पैसा नहीं दिया है। हर वर्ग की तरह कर्मचारियों और पेंशनरों को भी ठगने का काम किया है। इसका माकूल जवाब अब कर्मचारी और पेंशनर पहली जून को अपने वोट की चोट से देंगे। मुख्यमंत्री सुक्खू षड्यंत्र रचने, झूठ बोलने, कर्ज लेने और विकास के प्रोजेक्ट छीनने के माहिर हैं, जबकि उनसे पहले प्रदेश के सभी मुख्यमंत्री जनता के हितों को प्राथमिकता देते थे। जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, सुक्खू सरकार की उलटी गिनती तेज होती जा रही है। झूठी गारंटियां ही सुक्खू सरकार के गले की फांस बन गई हैं। स्थिति यह हो गई है कि इन गारंटियों का नाम सुनते ही मुख्यमंत्री परेशान हो जाते हैं और यही परेशानियां आजकल उनके भाषणों में भी झलक रही हैं। सुक्खू प्रदेश के इतिहास के पहले मुख्यमंत्री हैं जो झूठी गारंटियां देकर लोगों के सवालों से कतरा रहे हैं और 14 महीने की अपनी एक भी दमदार उपलब्धि जनता को नहीं बता पा रहे हैं। सुक्खू सरकार ने अपने निक्कमेपन से प्रदेश के कर्ज को 93,000 करोड़ तक पहुंचा दिया है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। पूर्व विधायक और सुजानपुर उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी राजेंद्र राणा ने बुधवार को सुजानपुर विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर एक दर्जन से अधिक नुक्कड़ सभाओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि खुद को कर्मचारियों की हितैषी बताने वाली सुक्खू सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनरों को नए वेतन आयोग के तहत मिलने वाले एरियर का एक नया पैसा नहीं दिया है। हर वर्ग की तरह कर्मचारियों और पेंशनरों को भी ठगने का काम किया है। इसका माकूल जवाब अब कर्मचारी और पेंशनर पहली जून को अपने वोट की चोट से देंगे। मुख्यमंत्री सुक्खू षड्यंत्र रचने, झूठ बोलने, कर्ज लेने और विकास के प्रोजेक्ट छीनने के माहिर हैं, जबकि उनसे पहले प्रदेश के सभी मुख्यमंत्री जनता के हितों को प्राथमिकता देते थे। जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, सुक्खू सरकार की उलटी गिनती तेज होती जा रही है। झूठी गारंटियां ही सुक्खू सरकार के गले की फांस बन गई हैं। स्थिति यह हो गई है कि इन गारंटियों का नाम सुनते ही मुख्यमंत्री परेशान हो जाते हैं और यही परेशानियां आजकल उनके भाषणों में भी झलक रही हैं। सुक्खू प्रदेश के इतिहास के पहले मुख्यमंत्री हैं जो झूठी गारंटियां देकर लोगों के सवालों से कतरा रहे हैं और 14 महीने की अपनी एक भी दमदार उपलब्धि जनता को नहीं बता पा रहे हैं। सुक्खू सरकार ने अपने निक्कमेपन से प्रदेश के कर्ज को 93,000 करोड़ तक पहुंचा दिया है।