{"_id":"66cc84cf21fe4db97e099411","slug":"elderly-man-injured-in-buffalo-fight-dies-hamirpur-hp-news-c-94-1-hmp1001-134437-2024-08-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hamirpur (Himachal) News: भैंसों की लड़ाई में घायल हुए बुजुर्ग व्यक्ति की मौत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hamirpur (Himachal) News: भैंसों की लड़ाई में घायल हुए बुजुर्ग व्यक्ति की मौत
Tue, 27 Aug 2024 07:04 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Tue, 27 Aug 2024 07:04 AM IST
विज्ञापन
नादौन (हमीरपुर)। पुलिस थाना नादौन के अंतर्गत ज्वालामुखी क्षेत्र की जखोटा पंचायत के गुरेहड़ गांव में भैंसों की लड़ाई की चपेट में आकर 72 वर्षीय विशंभर दास की मौत हो गई। विशंभर दास जो बीएसएनएल विभाग से सेवानिवृत्त थे। उन्होंने अपने शरीर और मानव अंग मेडिकल कॉलेज हमीरपुर को दान करने की इच्छा जताई थी, लेकिन उनकी मौत के बाद अंगों को सुरक्षित नहीं किया जा सका।
घटना उस समय घटी जब विशंभर दास अपनी भैंस को लेकर घर की ओर आ रहे थे। इसी दौरान एक अन्य भैंस ने उनकी भैंस पर हमला कर दिया। दोनों भैंसों की लड़ाई में विशंभर दास बुरी तरह घायल हो गए। गिरने के कारण उनके सिर पर गंभीर चोट आई। 20 मिनट तक तड़पते रहने के बाद जब एक व्यक्ति ने उन्हें देखा तो परिजन को सूचित किए।
इसके बाद परिजन उन्हें तुरंत निजी अस्पताल ले गए। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें टांडा मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, लेकिन वहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। टांडा में इलाज के दौरान ही परिवार को पता चला कि विशंभर दास ने अपने शरीर और अंग मेडिकल कॉलेज हमीरपुर को दान किए हैं। शव को हमीरपुर ले जाने की तैयारी की गई, लेकिन जब अंतिम जांच की गई तो पता चला कि अधिकांश अंग खराब हो चुके थे और उन्हें सुरक्षित नहीं निकाला जा सका। इस कारण विशंभर दास की अंतिम इच्छा पूरी नहीं हो सकी।
विज्ञापन
विशंभर दास की कोई संतान नहीं है और वे अपनी पत्नी के साथ रहते थे। इस मामले में पुलिस में कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई है। विशंभर दास की मौत से उनके परिवार और गांव में शोक की लहर है।
विज्ञापन
घटना उस समय घटी जब विशंभर दास अपनी भैंस को लेकर घर की ओर आ रहे थे। इसी दौरान एक अन्य भैंस ने उनकी भैंस पर हमला कर दिया। दोनों भैंसों की लड़ाई में विशंभर दास बुरी तरह घायल हो गए। गिरने के कारण उनके सिर पर गंभीर चोट आई। 20 मिनट तक तड़पते रहने के बाद जब एक व्यक्ति ने उन्हें देखा तो परिजन को सूचित किए।
विज्ञापन
इसके बाद परिजन उन्हें तुरंत निजी अस्पताल ले गए। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें टांडा मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, लेकिन वहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। टांडा में इलाज के दौरान ही परिवार को पता चला कि विशंभर दास ने अपने शरीर और अंग मेडिकल कॉलेज हमीरपुर को दान किए हैं। शव को हमीरपुर ले जाने की तैयारी की गई, लेकिन जब अंतिम जांच की गई तो पता चला कि अधिकांश अंग खराब हो चुके थे और उन्हें सुरक्षित नहीं निकाला जा सका। इस कारण विशंभर दास की अंतिम इच्छा पूरी नहीं हो सकी।
विज्ञापन
विशंभर दास की कोई संतान नहीं है और वे अपनी पत्नी के साथ रहते थे। इस मामले में पुलिस में कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई है। विशंभर दास की मौत से उनके परिवार और गांव में शोक की लहर है।