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मिनी सचिवालय में अफसरों तक पहुंचने में दिव्यांगों को पेश आ रहीं दिक्कतें
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मिनी सचिवालय हमीरपुर में अपनी किसी काम से आए एक व्यक्ति को रैंप न होने के कारण परेशानी पेश आई। इस द
- फोटो : Hamirpur-HP
हमीरपुर। मिनी सचिवालय हमीरपुर में रैंप की सुविधा न होने से दिव्यांगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। तीन मंजिला भवन में स्थित विभिन्न कार्यालयों के लिए सीढ़ियां चढ़नी और उतरनी पड़ती हैं। जबकि, सर्वोच्च न्यायालय और केंद्र सरकार के आदेशानुसार सभी सरकारी कार्यालयों में दिव्यांगों के लिए रैंप और विशेष शौचालय समेत अन्य सुविधाओं की व्यवस्था होनी चाहिए। अगर रैंप की सुविधा हो तो व्हीलचेयर से फरियादी संबंधित कार्यालय तक पहुंच सकते हैं। इस बहुमंजिला भवन के धरातल पर एसडीएम कार्यालय, जिला कोषाधिकारी कार्यालय और वाहन लाइसेंस एवं रजिस्ट्रेशन शाखा है। पहली मंजिल पर उपायुक्त, अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी, सहायक आयुक्त तथा जिला राजस्व अधिकारी समेत अन्य विभागों के कार्यालय हैं।
दूसरी मंजिल पर पुलिस अधीक्षक, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, पुलिस उपाधीक्षक, राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो के कार्यालय हैं। कभी प्रशासन तो कभी पुलिस और कभी अपने राजस्व संबंधी कार्यों के लिए रोजाना यहां पर लोगों का आना-जाना लगा रहता है। पूर्व में यहां पर रैंप बनाने की कई बार योजना बनी, लेकिन अभी तक यह योजना धरातल में नहीं उतर पाई। पूर्व में उपायुक्त रहे राकेश प्रजापति और मदन चौहान के समय मिनी सचिवालय के साथ निर्माणाधीन बहुमंजिला पार्किंग से मिनी सचिवालय के लिए रैंप बनाने को लेकर कार्य योजना बनी, लेकिन अधिकारियों के तबादलों के साथ ही यह योजना ठंडे बस्ते में पड़ गई।
हर साल दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम-2016 के तहत गठित जिलास्तरीय दिव्यांगता समिति की बैठकें भी होती रहती हैं, लेकिन अभी तक न तो जिला प्रशासन और न ही सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की ओर से इस समस्या के समाधान पर गोर किया गया। वहीं, बस स्टैंड नादौन और सुजानपुर समेत अन्य बस स्टैंडों पर भी दिव्यांगजनों के लिए प्रतीक्षा कक्षा व अन्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
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इधर, हिमाचल प्रदेश नेचुरल डिसेबल एसोसिएशन के प्रधान राजेंद्र सिपहिया और महासचिव रविकांत शर्मा ने कहा कि वह तीन अलग-अलग उपायुक्तों को मिनी सचिवालय में रैंप बनाने को लेकर ज्ञापन सौंप चुके हैं। लेकिन, अभी तक इस बारे में कोई कार्रवाई नहीं हुई। सर्वोच्च न्यायालय ने भी दिव्यांगों को सुविधा उपलब्ध करवाने के बारे में सभी राज्य सरकारों को आदेश जारी किए हैं। उधर, अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी हमीरपुर जितेंद्र सांजटा ने कहा कि समस्या ध्यान में है। शीघ्र ही इस बारे में उचित निर्णय लिया जाएगा।
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दूसरी मंजिल पर पुलिस अधीक्षक, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, पुलिस उपाधीक्षक, राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो के कार्यालय हैं। कभी प्रशासन तो कभी पुलिस और कभी अपने राजस्व संबंधी कार्यों के लिए रोजाना यहां पर लोगों का आना-जाना लगा रहता है। पूर्व में यहां पर रैंप बनाने की कई बार योजना बनी, लेकिन अभी तक यह योजना धरातल में नहीं उतर पाई। पूर्व में उपायुक्त रहे राकेश प्रजापति और मदन चौहान के समय मिनी सचिवालय के साथ निर्माणाधीन बहुमंजिला पार्किंग से मिनी सचिवालय के लिए रैंप बनाने को लेकर कार्य योजना बनी, लेकिन अधिकारियों के तबादलों के साथ ही यह योजना ठंडे बस्ते में पड़ गई।
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हर साल दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम-2016 के तहत गठित जिलास्तरीय दिव्यांगता समिति की बैठकें भी होती रहती हैं, लेकिन अभी तक न तो जिला प्रशासन और न ही सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की ओर से इस समस्या के समाधान पर गोर किया गया। वहीं, बस स्टैंड नादौन और सुजानपुर समेत अन्य बस स्टैंडों पर भी दिव्यांगजनों के लिए प्रतीक्षा कक्षा व अन्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
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इधर, हिमाचल प्रदेश नेचुरल डिसेबल एसोसिएशन के प्रधान राजेंद्र सिपहिया और महासचिव रविकांत शर्मा ने कहा कि वह तीन अलग-अलग उपायुक्तों को मिनी सचिवालय में रैंप बनाने को लेकर ज्ञापन सौंप चुके हैं। लेकिन, अभी तक इस बारे में कोई कार्रवाई नहीं हुई। सर्वोच्च न्यायालय ने भी दिव्यांगों को सुविधा उपलब्ध करवाने के बारे में सभी राज्य सरकारों को आदेश जारी किए हैं। उधर, अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी हमीरपुर जितेंद्र सांजटा ने कहा कि समस्या ध्यान में है। शीघ्र ही इस बारे में उचित निर्णय लिया जाएगा।