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अनुबंध कर्मचारियों के नियमितीकरण को न रोके विभाग
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बड़सर (हमीरपुर)। अनुबंध कर्मचारियों के नियमितीकरण को आचार संहिता में न रोकने का टीजीटी कला संघ ने आह्वान किया है। संघ महासचिव विजय हीर ने अनुबंध शिक्षकों के एक अक्तूबर से नियमितीकरण की स्वीकृति के लिए चुनाव आयोग को अपील भेजी है।
कुछ विभागों में आचार संहिता में भी अनुबंध कर्मचारी नियमित हुए हैं। विजय हीर ने कहा कि समस्त अनुबंध कर्मचारियों को एक अक्तूबर से ही नियमित करने की अपील चुनाव आयोग को भेजी गई है।
अनुबंध कर्मचारियों के अलग-अलग तिथियों से नियमित होने से उनकी वरिष्ठता प्रभावित न हो और चुनाव आचार संहिता के चलते कर्मचारी सीनियर से जूनियर नहीं होने चाहिए। इसके अलावा पंजाब वेतन आयोग के जनवरी 2016 के बाद नियुक्त कर्मचारियों को 15 फीसदी वेतन बढ़ाने का विकल्प न देने के विरुद्ध संघ ने पंजाब वित्तमंत्री और पंजाब सरकार मुख्य सचिव को भी ज्ञापन भेजा है।
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हीर ने कहा कि जनवरी 2016 के बाद भर्ती कर्मचारियों पर केंद्रीय वेतन आयोग के कम स्केल दिए हैं और उनको 15 फीसदी वेतन बढ़ाने का विकल्प देने से भी मना किया गया है।
जनवरी 2016 से पहले नियमित कर्मचारियों को वेतन निर्धारण के लिए 2.25 या 2.59 फैक्टर एरियर सहित या बिना एरियर 15 फीसदी वेतन बढ़ोतरी का विकल्प दिया जा चुका है। ऐसे में प्रदेश के हजारों कर्मचारी 15 फीसदी वेतन बढ़ाने के विकल्प से वंचित हो गए हैं।
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कुछ विभागों में आचार संहिता में भी अनुबंध कर्मचारी नियमित हुए हैं। विजय हीर ने कहा कि समस्त अनुबंध कर्मचारियों को एक अक्तूबर से ही नियमित करने की अपील चुनाव आयोग को भेजी गई है।
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अनुबंध कर्मचारियों के अलग-अलग तिथियों से नियमित होने से उनकी वरिष्ठता प्रभावित न हो और चुनाव आचार संहिता के चलते कर्मचारी सीनियर से जूनियर नहीं होने चाहिए। इसके अलावा पंजाब वेतन आयोग के जनवरी 2016 के बाद नियुक्त कर्मचारियों को 15 फीसदी वेतन बढ़ाने का विकल्प न देने के विरुद्ध संघ ने पंजाब वित्तमंत्री और पंजाब सरकार मुख्य सचिव को भी ज्ञापन भेजा है।
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हीर ने कहा कि जनवरी 2016 के बाद भर्ती कर्मचारियों पर केंद्रीय वेतन आयोग के कम स्केल दिए हैं और उनको 15 फीसदी वेतन बढ़ाने का विकल्प देने से भी मना किया गया है।
जनवरी 2016 से पहले नियमित कर्मचारियों को वेतन निर्धारण के लिए 2.25 या 2.59 फैक्टर एरियर सहित या बिना एरियर 15 फीसदी वेतन बढ़ोतरी का विकल्प दिया जा चुका है। ऐसे में प्रदेश के हजारों कर्मचारी 15 फीसदी वेतन बढ़ाने के विकल्प से वंचित हो गए हैं।