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मेडिकल कॉलेज की सीटी स्कैन मशीन फिर खराब
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हमीरपुर। हर साल 13 लाख खर्च करने के बावजूद मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में लगी सीटी स्कैन मशीन आए दिन खराब हो रही है। यह मशीन फिर साथ छोड़ गई है। जबकि, इसकी मरम्मत को प्रत्येक साल मेडिकल कॉलेज प्रबंधन 13 लाख रुपये खर्च करता है। तीन दिनों से मशीन खराब होने के कारण मरीज बाहरी लैबों में महंगे दामों पर टेस्ट करवाने को मजबूर हैं। ऐसे में लोगों को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ शारीरिक परेशानी भी झेलनी पड़ रही है। मशीन के आए दिन खराब होने से मेडिकल कॉलेज में लगी इस मशीन की रिपोर्ट से भी लोगों का विश्वास उठने सा लगा है।
इस मशीन में बाहरी लैबों से काफी कम दामों पर शरीर के प्रत्येक हिस्से की जांच होती है। ऐसे में गरीब और मध्यम वर्ग के लोग अधिकतर मेडिकल कॉलेज की मशीन में ही टेस्ट करवाने को प्राथमिकता देते हैं। लेकिन, जब यह मशीन खराब हो जाती है, तब मध्यम वर्ग के लोग तो बाहरी लैबों में जांच करवाने की सोच लेते हैं, लेकिन गरीब जिन्हें आयुष्मान या हिमकेयर कार्ड का भी लाभ लेना है, महंगे दामों पर टेस्ट करवाने से कतराते हैं।
अगर जरूरत में उन्हें यह टेस्ट करवाना भी पड़े तो जेब खाली हो जाती है। लोगों में संतोष कुमार, वीना देवी, कमलेश कुमार, विनय आदि ने मेडिकल कॉलेज प्रबंधन से नई मशीन लगाने की मांग की है। इस संबंध में चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनिल वर्मा का कहना है कि मशीन पुरानी है। हर साल 13 लाख रुपये से इसकी मरम्मत करवाई जाती है। रेडियोलॉजी विभाग के एचओडी को एस्टिमेट बनाने के लिए लिखा गया है। वहीं, सरकार से नई मशीन भी उपलब्ध होगी। जिसकी प्रक्रिया चल रही है।
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इस मशीन में बाहरी लैबों से काफी कम दामों पर शरीर के प्रत्येक हिस्से की जांच होती है। ऐसे में गरीब और मध्यम वर्ग के लोग अधिकतर मेडिकल कॉलेज की मशीन में ही टेस्ट करवाने को प्राथमिकता देते हैं। लेकिन, जब यह मशीन खराब हो जाती है, तब मध्यम वर्ग के लोग तो बाहरी लैबों में जांच करवाने की सोच लेते हैं, लेकिन गरीब जिन्हें आयुष्मान या हिमकेयर कार्ड का भी लाभ लेना है, महंगे दामों पर टेस्ट करवाने से कतराते हैं।
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अगर जरूरत में उन्हें यह टेस्ट करवाना भी पड़े तो जेब खाली हो जाती है। लोगों में संतोष कुमार, वीना देवी, कमलेश कुमार, विनय आदि ने मेडिकल कॉलेज प्रबंधन से नई मशीन लगाने की मांग की है। इस संबंध में चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनिल वर्मा का कहना है कि मशीन पुरानी है। हर साल 13 लाख रुपये से इसकी मरम्मत करवाई जाती है। रेडियोलॉजी विभाग के एचओडी को एस्टिमेट बनाने के लिए लिखा गया है। वहीं, सरकार से नई मशीन भी उपलब्ध होगी। जिसकी प्रक्रिया चल रही है।
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