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Hamirpur (Himachal) News: बारिश-बाढ़ से 181.61 हेक्टेयर भूमि पर फसल प्रभावित, किसान चिंतित
Sat, 20 Sep 2025 06:44 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Sat, 20 Sep 2025 06:44 AM IST
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हमीरपुर। जिले में लगातार हो रही बारिश के कारण किसान चिंतित हैं। कई जगह नालों में अधिक पानी आने के कारण फसल बह गई है। आगामी समय में फसल बीजने पर भी समस्या बनी हुई है। जिले में करीब 27 हजार हेक्टेयर भूमि पर विभिन्न फसलों की बिजाई की गई। बारिश के कारण 181.61 हेक्टेयर भूमि पर फसल प्रभावित हुई है। इस कारण किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। कई जगह डंगे टूटने से मक्की की फसल भूमि सहित नीचे आ गई। इस कारण चिंतित हो गए हैं। कृषि विभाग को करीब 20 किसानों की रिपोर्ट प्राप्त हुई है जिनकी फसल भूमि सहित बह गई है। इनमें खैरी के दो किसान, नादौन के आठ किसान और चबूतरा के करीब दस किसान शामिल हैं। इसके अलावा कई ऐसे किसान हैं जिन्हें आंशिक नुकसान हुआ है।
जलाड़ी के रजनीश ने बताया कि उनकी करीब साढ़े चार कनाल कृषि योग्य भूमि डंगे के साथ नीचे गिर गई। उन्होंने बताया कि पटवारी ने मौके का निरीक्षण किया। अब जो भूमि बची है, वह खेती योग्य नहीं रही है। उस भूमि तक ट्रैक्टर सहित अन्य सामान कैसे पहुंचाया जाए, यह समस्या बनी है।
जोलसप्पड़ पंचायत के उपप्रधान संतोष कुमार ने बताया कि सोहरी गांव में 50 से अधिक किसानों की साढ़े तीन कनाल भूमि बही है। उन्होंने प्रशासन से उचित मुआवजे की गुहार लगाई गई है।
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वहीं गांव कश्मीर के रजिंद्र कुमार ने बताया कि उनकी करीब आठ कनाल भूमि बह गई है। अब समस्या उत्पन्न हो गई है कि जिस क्षेत्र से भूमि बही है, वहां पर पहले वाली स्थिति कब होगी। अब आगामी फसल लगाने पर भी संकट हो गया है। मेढ़ों के नष्ट होने पर अब किस किसान की भूमि की सीमा कहां तक है, इस पर किसान चिंतित हैं। जिले के करीब 18,600 किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत पंजीकरण करवाया है। फसल बीमा योजना में बारिश और आपदा से फसल का नुकसान होने पर किसानों को मुआवजा दिया जाता है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अब तक 18,600 किसानों ने पंजीकरण करवाया है। अभी तक 20 किसानों की रिपोर्ट आई है, जिनकी भूमि फसल सहित बह गई है। कई किसान ऐसे में भी हो सकते हैं, उनकी फसल को आंशिक नुकसान हुआ है।
-डॉ. शशि पाल अत्री, उपनिदेशक, कृषि विभाग हमीरपुर
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जलाड़ी के रजनीश ने बताया कि उनकी करीब साढ़े चार कनाल कृषि योग्य भूमि डंगे के साथ नीचे गिर गई। उन्होंने बताया कि पटवारी ने मौके का निरीक्षण किया। अब जो भूमि बची है, वह खेती योग्य नहीं रही है। उस भूमि तक ट्रैक्टर सहित अन्य सामान कैसे पहुंचाया जाए, यह समस्या बनी है।
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जोलसप्पड़ पंचायत के उपप्रधान संतोष कुमार ने बताया कि सोहरी गांव में 50 से अधिक किसानों की साढ़े तीन कनाल भूमि बही है। उन्होंने प्रशासन से उचित मुआवजे की गुहार लगाई गई है।
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वहीं गांव कश्मीर के रजिंद्र कुमार ने बताया कि उनकी करीब आठ कनाल भूमि बह गई है। अब समस्या उत्पन्न हो गई है कि जिस क्षेत्र से भूमि बही है, वहां पर पहले वाली स्थिति कब होगी। अब आगामी फसल लगाने पर भी संकट हो गया है। मेढ़ों के नष्ट होने पर अब किस किसान की भूमि की सीमा कहां तक है, इस पर किसान चिंतित हैं। जिले के करीब 18,600 किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत पंजीकरण करवाया है। फसल बीमा योजना में बारिश और आपदा से फसल का नुकसान होने पर किसानों को मुआवजा दिया जाता है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अब तक 18,600 किसानों ने पंजीकरण करवाया है। अभी तक 20 किसानों की रिपोर्ट आई है, जिनकी भूमि फसल सहित बह गई है। कई किसान ऐसे में भी हो सकते हैं, उनकी फसल को आंशिक नुकसान हुआ है।
-डॉ. शशि पाल अत्री, उपनिदेशक, कृषि विभाग हमीरपुर