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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Hamirpur (Himachal) News ›   Court refuses anticipatory bail to two former inspectors accused in the Tal Sabha scam

Hamirpur (Himachal) News: ताल सभा घोटाले के आरोपी दो पूर्व निरीक्षकों को अदालत का अग्रिम जमानत देने से इन्कार

Tue, 08 Sep 2026 11:02 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.) Updated Tue, 08 Sep 2026 11:02 AM IST
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हमीरपुर। द ताल कोऑपरेटिव एग्रीकल्चर सर्विस सोसायटी लिमिटेड में कथित 2.46 करोड़ रुपये के चर्चित एफडीआर घोटाले में विशेष न्यायाधीश पंकज शर्मा की अदालत ने दो आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका पर फैसला सुनाया है।
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अदालत ने मामले के मुख्य आरोपियों में शामिल पूर्व निरीक्षक सुनील कुमार और सुरेश परमार की अग्रिम जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया है। सुरेश परमार सहकारिता विभाग से सेवानिवृत्त हो गए हैं, जबकि सुनील कुमार खंड विकास अधिकारी के पद पर पदोन्नत हो गए हैं।
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अभियोजन पक्ष अदालत को बताया कि 4 अगस्त 2026 की विजिलेंस जांच रिपोर्ट के आधार पर 19 अगस्त 2026 को मामला दर्ज किया गया था।
जांच में पाया गया कि वर्ष 2011-12 से 2023-24 की अवधि के दौरान आरोपियों ने आपस में मिलीभगत कर जाली दस्तावेज तैयार किए और खाताधारकों की एफडीआर में भारी धोखाधड़ी कर जनता की कमाई का गबन किया। इस मामले में छह लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें सभा का सचिव और अन्य लोग शामिल हैं।
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दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद अदालत ने कहा कि यह मामला केवल साधारण पैसों के लेन-देन का विवाद नहीं है बल्कि एक बड़ा संगठित धोखाधड़ी का मामला है, जिसमें जनता के करोड़ों रुपये दांव पर लगे हैं।
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि निष्पक्ष जांच, पूरी साजिश का पर्दाफाश करने और साक्ष्य जुटाने के लिए पुलिस हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। जांच शुरुआती चरण में है, इसलिए अग्रिम जमानत देकर जांच की प्रक्रिया को प्रभावित नहीं किया जा सकता।

इन सभी पहलुओं और अपराध की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए अदालत ने दोनों अग्रिम जमानत याचिकाओं को निरस्त कर दिया। विजिलेंस की जांच रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023-24 में सोसायटी के रिकॉर्ड में 5,17,62,690 रुपये की एफडीआर दर्ज थी, जबकि बैंक रिकॉर्ड में केवल 2,71,07,020 रुपये की एफडीआर का मिलान हुआ।
इस तरह 2,46,55,670 रुपये का अंतर सामने आया, जिसे जांच रिपोर्ट में गबन या दुरुपयोग से जुड़ा बताया गया है।
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