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कोरोना की मार, दुकानों के लिए नहीं मिल रहे किरायेदार
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हमीरपुर। कोरोना महामारी ने बड़े से लेकर छोटे कारोबारियों को प्रभावित किया है। मार्केट के हालात ऐसे हैं कि जो दुकानें या शोरूम खाली हो गए, वे दोबारा किराये पर नहीं चढ़ रहे हैं। कुछ बूथ और शोरूम मालिकों ने किराया आधा कर दिया है, इसके बावजूद कोई लेने को तैयार नहीं।
कोरोना काल में व्यापारियों को चारों ओर से आर्थिक मंदी की मार झेलनी पड़ रही है। लॉकडाउन और कोरोना कर्फ्यू के दौरान सरकार के आदेशों के अनुसार बीच-बीच में दुकानें बंद होती रहीं और खुलती भी रहीं। दुकान पर काम करने वाले सेल्समैन के वेतन से लेकर दुकान के रोजमर्रा की खर्चे भी किसी तरह कारोबारी वहन करते रहे, लेकिन मार्केट में ग्राहकों के न होने से मुनाफे की जगह लगातार घाटा होता गया। वहीं, जिन कारोबारियों ने दुकानें किराये पर ली थीं, अब उन्होंने व्यवसाय में घाटे के कारण दुकानें खाली कर दी हैं। इसमें नामी कंपनी के शोरूम भी शामिल हैं। पहले कारोबार चौपट हुआ, अब दुकानें खाली हो गईं। इससे व्यापारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
इनसेट-
जिला मुख्यालय में करीब दो हजार कारोबारी हैं। इनमें 130 के करीब कपड़ा कारोबारी, 95 के करीब हार्डवेयर की दुकानें, 100 के करीब इलेक्ट्रॉनिक्स और 250 के करीब किराना की दुकानें हैं। इसके अलावा मेकेनिक, जूतों की दुकानें, स्टेशनरी, सब्जियां-फल, मेडिकल स्टोर समेत अन्य कारोबारी हैं, लेकिन कोरोना के कारण सभी का कारोबार प्रभावित हुआ। शहर में दुकानों का किराया 10 हजार से लेकर 50 हजार रुपये मासिक है।
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कारोबारियों ने बयां की दास्तां
बैंक से ऋण लेकर शॉपिंग कांप्लेक्स का निर्माण करवाया, लेकिन कोरोना के चलते कुछेक पुराने किरायेदारों ने किराया कम कर दिया है। कई दुकानें किराये पर नहीं चढ़ रहीं। बैंक ने पहले चार माह तक किस्तें नहीं काटी, अब 50 हजार से अधिक पेनल्टी लगा दी। बैंक प्रबंधन की गलती का खामियाजा कारोबारियों को भुगतना पड़ रहा है। दुकान पर करीब छह कर्मचारी काम करते हैं, उन्हें मासिक वेतन देना पड़ रहा है, लेकिन कोरोना काल में धंधा चौपट है। सरकार को इस बारे में उचित कदम उठाने चाहिए।
-शांति वर्मा, मालिक, शांति ट्रेड सेंटर हमीरपुर।
कोरोना के चलते कांप्लेक्स में कुछ दुकानें खाली हुई हैं। कोरोना की तीसरी लहर के भय के चलते कई लोग नया व्यवसाय शुरू करने से डर रहे हैं। नए बिजनेस स्टार्टअप भी इस महामारी के दौर में मार्केट में उतरने से कतरा रहे हैं। अगर समय पर कोरोना की रोकथाम नहीं हो पाई तो कारोबारियों को और अधिक घाटा उठाना पड़ सकता है।
-प्रदीप रोशन, रोशन शॉपिंग कांप्लेक्स गांधी चौक हमीरपुर।
बैंकों से लोन लेकर जिन लोगों ने अपने परिवार के पालन पोषण के लिए शॉपिंग कांप्लेक्स या तीन चार दुकानों का निर्माण करवाया है, वह अब काफी परेशान हैं। कोरोना काल में दुकानें किराये पर नहीं चढ़ रहीं। हमारी दुकान भी करीब एक साल से खाली है। नए कारोबारी भी दुकान किराये पर लेने के लिए नहीं आ रहे।
-अश्वनी शर्मा, कारोबारी एवं पूर्व पार्षद हमीरपुर।
जब तक कोरोना महामारी खत्म नहीं होती, तब तक नए कारोबार की कोई संभावना नजर नहीं आ रही। दुकानेें करीब सवा साल से खाली पड़ी हैं। सरकार की तरफ से भी छोटे कारोबारियों को कोई आर्थिक पैकेज अभी तक नहीं मिल पाया है। बैंक से कारोबार के लिए बनाई लिमिट इत्यादि को नुकसान पहुंच रहा है।
-सुनील वर्मा, कारोबारी गांधी चौक हमीरपुर।
25 हजार रुपये किराये वाली दुकान अब 10 हजार में चढ़ रही हैै। दुकानों का किराया कम करने के बावजूद कोई किरायेदार नहीं मिल रहा। कोरोनाकाल में कइयों के रोजगार और नौकरियों प्रभावित हुई हैं, जिसके चलते बाजार में खरीदार भी कम हैं। कुल मिलाकर कारोबार काफी प्रभावित हो रहा है।
-अनमोल हांडा, कारोबारी, कश्मीरी शॉपिंग कांप्लेक्स हमीरपुर।
बाक्स:
जिला मुख्यालय पर काम करते हैं दो हजार दुकानदार : सोनी
व्यापार मंडल के प्रधान अनिल सोनी ने कहा कि जिला मुख्यालय हमीरपुर में करीब दो हजार से अधिक दुकानदार हैं। लॉकडाउन और कोरोना कर्फ्यू के कारण कई दुकानदारों व कारोबारियों को आर्थिक नुकसान हुआ है। दुकानें बंद रहने से सामान खराब हुआ। दुकान का किराया भी देना पड़ा। दुकानों पर काम करने वाले कई सेल्समैन लौट कर नहीं आए। कुछेक दुकानदारों ने तो अपना व्यवसाय ही बदल लिया। कारोबार प्रभावित होने के बावजूद जीएसटी के कारण लोगों को नोटिस मिल रहे हैं। सरकार को बड़े कारोबारियों की तर्ज पर छोटे व्यापारियों को भी आर्थिक सहायता प्रदान करनी चाहिए।
-अनिल सोनी, प्रधान, व्यापार मंडल हमीरपुर।
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कोरोना काल में व्यापारियों को चारों ओर से आर्थिक मंदी की मार झेलनी पड़ रही है। लॉकडाउन और कोरोना कर्फ्यू के दौरान सरकार के आदेशों के अनुसार बीच-बीच में दुकानें बंद होती रहीं और खुलती भी रहीं। दुकान पर काम करने वाले सेल्समैन के वेतन से लेकर दुकान के रोजमर्रा की खर्चे भी किसी तरह कारोबारी वहन करते रहे, लेकिन मार्केट में ग्राहकों के न होने से मुनाफे की जगह लगातार घाटा होता गया। वहीं, जिन कारोबारियों ने दुकानें किराये पर ली थीं, अब उन्होंने व्यवसाय में घाटे के कारण दुकानें खाली कर दी हैं। इसमें नामी कंपनी के शोरूम भी शामिल हैं। पहले कारोबार चौपट हुआ, अब दुकानें खाली हो गईं। इससे व्यापारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
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इनसेट-
जिला मुख्यालय में करीब दो हजार कारोबारी हैं। इनमें 130 के करीब कपड़ा कारोबारी, 95 के करीब हार्डवेयर की दुकानें, 100 के करीब इलेक्ट्रॉनिक्स और 250 के करीब किराना की दुकानें हैं। इसके अलावा मेकेनिक, जूतों की दुकानें, स्टेशनरी, सब्जियां-फल, मेडिकल स्टोर समेत अन्य कारोबारी हैं, लेकिन कोरोना के कारण सभी का कारोबार प्रभावित हुआ। शहर में दुकानों का किराया 10 हजार से लेकर 50 हजार रुपये मासिक है।
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कारोबारियों ने बयां की दास्तां
बैंक से ऋण लेकर शॉपिंग कांप्लेक्स का निर्माण करवाया, लेकिन कोरोना के चलते कुछेक पुराने किरायेदारों ने किराया कम कर दिया है। कई दुकानें किराये पर नहीं चढ़ रहीं। बैंक ने पहले चार माह तक किस्तें नहीं काटी, अब 50 हजार से अधिक पेनल्टी लगा दी। बैंक प्रबंधन की गलती का खामियाजा कारोबारियों को भुगतना पड़ रहा है। दुकान पर करीब छह कर्मचारी काम करते हैं, उन्हें मासिक वेतन देना पड़ रहा है, लेकिन कोरोना काल में धंधा चौपट है। सरकार को इस बारे में उचित कदम उठाने चाहिए।
-शांति वर्मा, मालिक, शांति ट्रेड सेंटर हमीरपुर।
कोरोना के चलते कांप्लेक्स में कुछ दुकानें खाली हुई हैं। कोरोना की तीसरी लहर के भय के चलते कई लोग नया व्यवसाय शुरू करने से डर रहे हैं। नए बिजनेस स्टार्टअप भी इस महामारी के दौर में मार्केट में उतरने से कतरा रहे हैं। अगर समय पर कोरोना की रोकथाम नहीं हो पाई तो कारोबारियों को और अधिक घाटा उठाना पड़ सकता है।
-प्रदीप रोशन, रोशन शॉपिंग कांप्लेक्स गांधी चौक हमीरपुर।
बैंकों से लोन लेकर जिन लोगों ने अपने परिवार के पालन पोषण के लिए शॉपिंग कांप्लेक्स या तीन चार दुकानों का निर्माण करवाया है, वह अब काफी परेशान हैं। कोरोना काल में दुकानें किराये पर नहीं चढ़ रहीं। हमारी दुकान भी करीब एक साल से खाली है। नए कारोबारी भी दुकान किराये पर लेने के लिए नहीं आ रहे।
-अश्वनी शर्मा, कारोबारी एवं पूर्व पार्षद हमीरपुर।
जब तक कोरोना महामारी खत्म नहीं होती, तब तक नए कारोबार की कोई संभावना नजर नहीं आ रही। दुकानेें करीब सवा साल से खाली पड़ी हैं। सरकार की तरफ से भी छोटे कारोबारियों को कोई आर्थिक पैकेज अभी तक नहीं मिल पाया है। बैंक से कारोबार के लिए बनाई लिमिट इत्यादि को नुकसान पहुंच रहा है।
-सुनील वर्मा, कारोबारी गांधी चौक हमीरपुर।
25 हजार रुपये किराये वाली दुकान अब 10 हजार में चढ़ रही हैै। दुकानों का किराया कम करने के बावजूद कोई किरायेदार नहीं मिल रहा। कोरोनाकाल में कइयों के रोजगार और नौकरियों प्रभावित हुई हैं, जिसके चलते बाजार में खरीदार भी कम हैं। कुल मिलाकर कारोबार काफी प्रभावित हो रहा है।
-अनमोल हांडा, कारोबारी, कश्मीरी शॉपिंग कांप्लेक्स हमीरपुर।
बाक्स:
जिला मुख्यालय पर काम करते हैं दो हजार दुकानदार : सोनी
व्यापार मंडल के प्रधान अनिल सोनी ने कहा कि जिला मुख्यालय हमीरपुर में करीब दो हजार से अधिक दुकानदार हैं। लॉकडाउन और कोरोना कर्फ्यू के कारण कई दुकानदारों व कारोबारियों को आर्थिक नुकसान हुआ है। दुकानें बंद रहने से सामान खराब हुआ। दुकान का किराया भी देना पड़ा। दुकानों पर काम करने वाले कई सेल्समैन लौट कर नहीं आए। कुछेक दुकानदारों ने तो अपना व्यवसाय ही बदल लिया। कारोबार प्रभावित होने के बावजूद जीएसटी के कारण लोगों को नोटिस मिल रहे हैं। सरकार को बड़े कारोबारियों की तर्ज पर छोटे व्यापारियों को भी आर्थिक सहायता प्रदान करनी चाहिए।
-अनिल सोनी, प्रधान, व्यापार मंडल हमीरपुर।