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दूसरी के बच्चों को नहीं मिली अंग्रेजी की पुस्तकें
ब्यूरो/अमर उजाला, हमीरपुर, बड़सर
Updated Thu, 19 May 2016 05:41 PM IST
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उपमंडल के स्कूलों में दूसरी कक्षा के बच्चों को अंग्रेजी की पुस्तकें नहीं मिली है जबकि स्कूलों में डेढ़ माह से पढ़ाई शुरू हो गई है। बिझड़ी ब्लॉक में 107 स्कूल हैं और दूसरी कक्षा में लगभग 700 बच्चे पढ़ रहे हैं। बच्चों को स्कूलों में पूरी पुस्तकें नहीं मिल रही हैं।
इससे शिक्षा में गुणवत्ता के दावों पर सवाल उठने लगे हैं। सरकारी स्कूलों में पहली से आठवीं तक के बच्चों को मुफ्त किताबें मुहैया करवाई जाती हैं। स्कूलों में अप्रैल माह से नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है, लेकिन स्कूलों को अभी किताबें मुहैया नहीं हो पा रही हैं।
दूसरी कक्षा के बच्चों को अंग्रेजी की पुस्तकें नहीं मिल पाई है, जबकि स्कूलों में इंटरनल एग्जाम शुरू हो चुके हैं। अध्यापकों को किताबें मुहैया नहीं हुई हैं। क्षेत्रवासी प्रवीण कुमार, रमन कुमार, अश्वनी कुमार, अमित कुमार, विपिन कुमार, दिनेश कुमार और रजत शर्मा ने बताया कि बच्चों को पुस्तक नहीं मिल रही है। उन्होंने शिक्षा विभाग या बोर्ड से दूसरी कक्षा के बच्चों को पुस्तकें दिलाने की मांग की है।
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बिझड़ी ब्लॉक के एसएसए समन्वयक विजय हीर ने बताया कि दूसरी कक्षा की अंग्रेजी की पुस्तकें नहीं मिली हैं। बोर्ड के डिपों में पुस्तक नहीं मिली है। इसलिए स्कूलों को पुस्तक नहीं दी जा सकी है जबकि शेष पुस्तकें स्कूलों को पहुंचा दी गई हैं।
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इससे शिक्षा में गुणवत्ता के दावों पर सवाल उठने लगे हैं। सरकारी स्कूलों में पहली से आठवीं तक के बच्चों को मुफ्त किताबें मुहैया करवाई जाती हैं। स्कूलों में अप्रैल माह से नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है, लेकिन स्कूलों को अभी किताबें मुहैया नहीं हो पा रही हैं।
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दूसरी कक्षा के बच्चों को अंग्रेजी की पुस्तकें नहीं मिल पाई है, जबकि स्कूलों में इंटरनल एग्जाम शुरू हो चुके हैं। अध्यापकों को किताबें मुहैया नहीं हुई हैं। क्षेत्रवासी प्रवीण कुमार, रमन कुमार, अश्वनी कुमार, अमित कुमार, विपिन कुमार, दिनेश कुमार और रजत शर्मा ने बताया कि बच्चों को पुस्तक नहीं मिल रही है। उन्होंने शिक्षा विभाग या बोर्ड से दूसरी कक्षा के बच्चों को पुस्तकें दिलाने की मांग की है।
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बिझड़ी ब्लॉक के एसएसए समन्वयक विजय हीर ने बताया कि दूसरी कक्षा की अंग्रेजी की पुस्तकें नहीं मिली हैं। बोर्ड के डिपों में पुस्तक नहीं मिली है। इसलिए स्कूलों को पुस्तक नहीं दी जा सकी है जबकि शेष पुस्तकें स्कूलों को पहुंचा दी गई हैं।