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Hamirpur (Himachal) News: खेलने-कूदने की उम्र में कुपोषण के खिलाफ जंग लड़ रहा बचपन
Mon, 24 Nov 2025 12:50 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Mon, 24 Nov 2025 12:50 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। खेलने-कूदने और जिंदगी की शुरुआत करने की उम्र में बच्चों का बचपन कुपोषण से जंग लड़ रहा है। जिले में 0-6 साल के 116 बच्चे कुपोषण की चपेट में हैं। इनमें 33 बच्चे अति गंभीर कुपोषण और 83 बच्चे सामान्य कुपोषण की चपेट में हैं।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत गठित टीमों के अप्रैल से अक्तूबर तक हुए निरीक्षण में यह खुलासा हुआ है। कुपोषण को दूर करने के लिए भले ही बड़ी-बड़ी योजनाएं चलाई जा रही हों, लेकिन ये नाकाफी साबित हो रही हैं।
जिले में आरबीएसके के तहत करीब 12 टीमें हैं। इन टीमों की ओर से किए गए निरीक्षण में पाया गया है कि 116 बच्चों की सेहत इनकी उम्र के हिसाब से ठीक नहीं है। इनकी उम्र के हिसाब से इनका भार कम है। इसी मानदंड के आधार पर 33 बच्चों को अति गंभीर और 83 बच्चों को सामान्य कुपोषण की श्रेणी में रखा गया है।
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सामान्य कुपोषण की चपेट आने वाले बच्चों को कम्युनिटी में रखा गया है। कुपोषण को दूर करने के लिए एक बेहतर डाइट का प्रयोग करने की सलाह दी गई है। आशा कार्यकर्ता इसका फोलोअप भी करती हैं।
वहीं, अति गंभीर कुपोषण वाले बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र में चिकित्सीय और पोषण संबंधी देखभाल के लिए रेफर किया गया है। बच्चों को डिस्चार्ज करने के बाद भी उनका नियमित फॉलोअप अनिवार्य होता है। माताओं को घर पर पौष्टिक आहार तैयार करने की सही विधि भी सिखाई जाती है।
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हमीरपुर। खेलने-कूदने और जिंदगी की शुरुआत करने की उम्र में बच्चों का बचपन कुपोषण से जंग लड़ रहा है। जिले में 0-6 साल के 116 बच्चे कुपोषण की चपेट में हैं। इनमें 33 बच्चे अति गंभीर कुपोषण और 83 बच्चे सामान्य कुपोषण की चपेट में हैं।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत गठित टीमों के अप्रैल से अक्तूबर तक हुए निरीक्षण में यह खुलासा हुआ है। कुपोषण को दूर करने के लिए भले ही बड़ी-बड़ी योजनाएं चलाई जा रही हों, लेकिन ये नाकाफी साबित हो रही हैं।
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जिले में आरबीएसके के तहत करीब 12 टीमें हैं। इन टीमों की ओर से किए गए निरीक्षण में पाया गया है कि 116 बच्चों की सेहत इनकी उम्र के हिसाब से ठीक नहीं है। इनकी उम्र के हिसाब से इनका भार कम है। इसी मानदंड के आधार पर 33 बच्चों को अति गंभीर और 83 बच्चों को सामान्य कुपोषण की श्रेणी में रखा गया है।
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सामान्य कुपोषण की चपेट आने वाले बच्चों को कम्युनिटी में रखा गया है। कुपोषण को दूर करने के लिए एक बेहतर डाइट का प्रयोग करने की सलाह दी गई है। आशा कार्यकर्ता इसका फोलोअप भी करती हैं।
वहीं, अति गंभीर कुपोषण वाले बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र में चिकित्सीय और पोषण संबंधी देखभाल के लिए रेफर किया गया है। बच्चों को डिस्चार्ज करने के बाद भी उनका नियमित फॉलोअप अनिवार्य होता है। माताओं को घर पर पौष्टिक आहार तैयार करने की सही विधि भी सिखाई जाती है।