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हाइड्रो प्रोजेक्ट की खरीद-फरोख्त में धांधली के आरोप में मुकदमा
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हमीरपुर। जिला हमीरपुर के एक निजी स्कूल संचालक पर मुंबई के पुणे थाने में धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात के आरोप में मामला दर्ज हुआ है। पुलिस में दर्ज एफआईआर में हाइड्रो प्रोजेक्ट की खरीद-फरोख्त में धांधली के आरोप हैं। हमीरपुर के रहने वाले एक निजी स्कूल प्रबंधक ने मंडी जिले में प्रदेश सरकार से पांच मेगावाट और डेढ़ मेगावाट क्षमता के दो पावर प्रोजेक्ट स्वीकृत करवाए थे। स्कूल प्रबंधक इन दोनों हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट कंपनी के निदेशक हैं। लेकिन, वर्ष 2014 में स्कूल संचालक ने मुंबई के एक कारोबारी को पावर प्रोजेक्ट के 49 फीसदी शेयर करीब चार करोड़ रुपये में बेच दिए।
दोनों पक्षों के बीच हुए अनुबंध के अनुसार कारोबारी को तीन माह के भीतर यह रकम हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट कंपनी के मालिक को देनी थी। कारोबारी ने करीब एक करोड़ पांच लाख रुपये का भुगतान कंपनी निदेशक के बैंक खाते में किया, लेकिन कंपनी निदेशक ने संबंधित कारोबारी को वन विभाग की एनओसी समेत अन्य क्लीयरेंस नहीं दी। जबकि, कंपनी निदेशक कारोबारी से अनुबंध के अनुसार चार करोड़ रुपये की राशि की मांग करता रहा। इसी बीच कंपनी निदेशक ने इन दोनों पावर प्रोजेक्ट के शेयर किसी तीसरे व्यक्ति को बेच दिए। इससे नाराज कारोबारी ने अब मुंबई के पुणे थाने में कंपनी निदेशक के खिलाफ मामला दर्ज करवाया है। कारोबारी ने कहा कि कंपनी निदेशक ने न तो उन्हें पावर प्रोजेक्ट का काम शुरू करने के संबंध में एनओसी उपलब्ध करवाई और न ही तीसरे व्यक्ति को पावर प्रोजेक्ट के शेयर बेचते समय उन्हें कोई पूर्व नोटिस दिया गया। इसके चलते उन्हें वित्तीय, व्यावसायिक और मानसिक तौर पर नुकसान हुआ।
उधर, कंपनी निदेशक ने कहा कि मुंबई के कारोबारी के बीच वर्ष 2014 में एक पावर प्रोजेक्ट के 49 फीसदी शेयर बेचने को लेकर चार करोड़ रुपये में एग्रीमेंट हुआ था, लेकिन कारोबारी ने उन्हें अनुबंध अनुसार वर्ष 2020 तक बकाया राशि का भुगतान नहीं किया। वहीं, हाइड्रो प्रोजेक्ट का समय पर काम शुरू न होने से यह प्रोजेक्ट रद्द होने की कगार पर पहुंच चुका था। सरकार से छह-छह माह की एक्सटेंशन लेने पर एक करोड़ रुपये से अधिक की राशि पेनल्टी के तौर पर खर्च हो चुकी है।
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दोनों पक्षों के बीच हुए अनुबंध के अनुसार कारोबारी को तीन माह के भीतर यह रकम हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट कंपनी के मालिक को देनी थी। कारोबारी ने करीब एक करोड़ पांच लाख रुपये का भुगतान कंपनी निदेशक के बैंक खाते में किया, लेकिन कंपनी निदेशक ने संबंधित कारोबारी को वन विभाग की एनओसी समेत अन्य क्लीयरेंस नहीं दी। जबकि, कंपनी निदेशक कारोबारी से अनुबंध के अनुसार चार करोड़ रुपये की राशि की मांग करता रहा। इसी बीच कंपनी निदेशक ने इन दोनों पावर प्रोजेक्ट के शेयर किसी तीसरे व्यक्ति को बेच दिए। इससे नाराज कारोबारी ने अब मुंबई के पुणे थाने में कंपनी निदेशक के खिलाफ मामला दर्ज करवाया है। कारोबारी ने कहा कि कंपनी निदेशक ने न तो उन्हें पावर प्रोजेक्ट का काम शुरू करने के संबंध में एनओसी उपलब्ध करवाई और न ही तीसरे व्यक्ति को पावर प्रोजेक्ट के शेयर बेचते समय उन्हें कोई पूर्व नोटिस दिया गया। इसके चलते उन्हें वित्तीय, व्यावसायिक और मानसिक तौर पर नुकसान हुआ।
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उधर, कंपनी निदेशक ने कहा कि मुंबई के कारोबारी के बीच वर्ष 2014 में एक पावर प्रोजेक्ट के 49 फीसदी शेयर बेचने को लेकर चार करोड़ रुपये में एग्रीमेंट हुआ था, लेकिन कारोबारी ने उन्हें अनुबंध अनुसार वर्ष 2020 तक बकाया राशि का भुगतान नहीं किया। वहीं, हाइड्रो प्रोजेक्ट का समय पर काम शुरू न होने से यह प्रोजेक्ट रद्द होने की कगार पर पहुंच चुका था। सरकार से छह-छह माह की एक्सटेंशन लेने पर एक करोड़ रुपये से अधिक की राशि पेनल्टी के तौर पर खर्च हो चुकी है।
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