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Hamirpur (Himachal) News: मेडिकल कॉलेज में 10 लाख से बने रैंपवॉक पर फेंक दिए टूटे बेंच
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रास्ता कर दिया बंद, चलने-फिरने में असमर्थ मरीजों के लिए बनाया था रैंपवॉक
अस्पताल में ऑपरेशन वाले मरीजों, गर्भवती महिलाओं को करना पड़ रहा दिक्कतों का सामना
प्राचार्य बोले- समस्या का कर दिया जाएगा समाधान
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में विभिन्न वार्डों में दाखिल मरीजों की सुविधा के लिए बनाए रैंपवॉक का मरीजों को लाभ नहीं मिल रहा है। इस रैंपवॉक पर टूटे हुए लोहेे के बिस्तर और कुर्सियां रखी हुई हैं और रास्ते को बंद कर दिया गया है। इससे न तो यहां से मरीज जा सकते हैं और न स्ट्रेचर आदि जा सकते हैं। ऐसे में मरीजों को लंबा रास्ता तय करके की अस्पताल में टेस्ट आदि करवाने के लिए जाना पड़ रहा है। मरीजों ने सवाल उठाया है कि 10 लाख रुपये की लागत से भी अधिक रुपये खर्च कर इस रैंपवॉक का निर्माण किसके लिए किया गया है। इस रैंपवॉक का निर्माण दो वर्ष पूर्व किया गया था ताकि जो मरीज सीढि़यां आदि उतरने में असमर्थ हैं वे आराम से इधर से आ-जा सकें। लेकिन, वर्तमान समय में इसका कोई लाभ नहीं उठा पा रहा है। इससे मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। मरीजों अंकुश चौहान, अश्वनी कुमार, सुरेंद्र पटियाल, सतीश, चंदूराम, दिनेश कांता, सलोचना, प्रिया आदि ने कहा कि रैंपवॉक की सुविधा नहीं मिल पा रही है। यहां पर टूटे हुए बिस्तर व कुर्सियां रख दी गई हैं। इस बारे में प्राचार्य डॉ. रमेश भारती ने कहा कि समस्या का हल कर दिया जाएगा।
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अस्पताल में ऑपरेशन वाले मरीजों, गर्भवती महिलाओं को करना पड़ रहा दिक्कतों का सामना
प्राचार्य बोले- समस्या का कर दिया जाएगा समाधान
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में विभिन्न वार्डों में दाखिल मरीजों की सुविधा के लिए बनाए रैंपवॉक का मरीजों को लाभ नहीं मिल रहा है। इस रैंपवॉक पर टूटे हुए लोहेे के बिस्तर और कुर्सियां रखी हुई हैं और रास्ते को बंद कर दिया गया है। इससे न तो यहां से मरीज जा सकते हैं और न स्ट्रेचर आदि जा सकते हैं। ऐसे में मरीजों को लंबा रास्ता तय करके की अस्पताल में टेस्ट आदि करवाने के लिए जाना पड़ रहा है। मरीजों ने सवाल उठाया है कि 10 लाख रुपये की लागत से भी अधिक रुपये खर्च कर इस रैंपवॉक का निर्माण किसके लिए किया गया है। इस रैंपवॉक का निर्माण दो वर्ष पूर्व किया गया था ताकि जो मरीज सीढि़यां आदि उतरने में असमर्थ हैं वे आराम से इधर से आ-जा सकें। लेकिन, वर्तमान समय में इसका कोई लाभ नहीं उठा पा रहा है। इससे मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। मरीजों अंकुश चौहान, अश्वनी कुमार, सुरेंद्र पटियाल, सतीश, चंदूराम, दिनेश कांता, सलोचना, प्रिया आदि ने कहा कि रैंपवॉक की सुविधा नहीं मिल पा रही है। यहां पर टूटे हुए बिस्तर व कुर्सियां रख दी गई हैं। इस बारे में प्राचार्य डॉ. रमेश भारती ने कहा कि समस्या का हल कर दिया जाएगा।