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संकटमोचन द्वार भलेठ में नहीं हुआ बैसाखी पर स्नान
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सुजानपुर(हमीरपुर)। स्थानीय संकटमोचन द्वार पर इस बार बैसाखी पर्व पर किया जाने वाला स्नान नहीं हो पाया है। वहीं मंदिर में उड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ की जगह सूनापन ही देखने को मिला। द्वार से नीचे की ओर स्थापित झरना जिसे स्थानीय भाषा में छाराहा नाम से जाना जाता है, इस बार खाली ही रहा। बता दें कि संकटमोचन द्वार कभी महाराजा संसार चंद का प्रवेश द्वार कहलाया जाता था। मान्यता है कि यहां निसंतान औरतों द्वारा स्नान करने से संतान प्राप्ति की मनोकामना पूरी होती है। इस बार लॉक डाउन के चलते दूरदराज से उमड़ने वाली भीड़ यहां नहीं उमड़ पाई। वहीं भंडारे का आयोजन भी रद्द हो गया। संकटमोचन द्वार जिला हमीरपुर के सुजानपुर से 4 किलोमीटर दूर मुख्य मार्ग के साथ ऊपर की ओर भलेठ गांव मे स्थापित है।
कहते हैं कि महाराजा संसार चंद की सीमा के प्रवेश होने के लिए यहां प्रवेश द्वार था। यहां से टिहरा तक राजा ने घेराबंदी के लिए सुरक्षा दीवार लगा रखी थी। संकटमोचन में भगवान हनुमान और भैरव की मूर्तियां स्थापित हैं। इनसे नीचे की ओर मुख्य सड़क पर वर्षों पहले जब सड़क दुर्घटनाएं होने लगी तो लोगों ने यहां मंदिर बना दिए। द्वार के साथ ही मां टौणीदेवी का मंदिर है। यहां नमक चढ़ाने से चर्म रोग ठीक हो जाते हैं। स्थानीय निवासी राकेश कटोच ने बताया कि इस बार कर्फ्यू के चलते यह स्थान भी सूना ही रहा।
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कहते हैं कि महाराजा संसार चंद की सीमा के प्रवेश होने के लिए यहां प्रवेश द्वार था। यहां से टिहरा तक राजा ने घेराबंदी के लिए सुरक्षा दीवार लगा रखी थी। संकटमोचन में भगवान हनुमान और भैरव की मूर्तियां स्थापित हैं। इनसे नीचे की ओर मुख्य सड़क पर वर्षों पहले जब सड़क दुर्घटनाएं होने लगी तो लोगों ने यहां मंदिर बना दिए। द्वार के साथ ही मां टौणीदेवी का मंदिर है। यहां नमक चढ़ाने से चर्म रोग ठीक हो जाते हैं। स्थानीय निवासी राकेश कटोच ने बताया कि इस बार कर्फ्यू के चलते यह स्थान भी सूना ही रहा।
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