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प्रदेश में टर्म परीक्षा प्रणाली की जगह हों वार्षिक परीक्षाएं : संघ
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प्रदेश अनुसूचित जाति, जन जाति व अन्य पिछड़ा वर्ग कमर्चारी कल्याण संघ का प्रतिनिधि मंडल शिक्षा बो
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भोरंज(हमीरपुर)। प्रदेश अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग कर्मचारी कल्याण संघ का प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रीय महासचिव एवं प्रदेशाध्यक्ष डॉ. ओंकार सिंह भाटिया की अध्यक्षता में स्कूल शिक्षा बोर्ड के सचिव डॉ. मेजर विशाल शर्मा से भोरंज में मिला। उन्होंने मांगपत्र सौंपकर चालू शिक्षा सत्र से टर्म प्रणाली को हटाकर वार्षिक परीक्षा शुरू करने की मांग की। डॉ. भाटिया ने बोर्ड सचिव को कहा कि टर्म प्रणाली स्कूलों में बच्चों का सर्वांगीण विकास करने में पूरी तरह से विफल है। वहीं दूसरी ओर बोर्ड की दसवीं, जमा दो कक्षा की टर्म -एक एवं टर्म-दो में परीक्षा, बच्चों और उनके अभिभावकों के ऊपर आर्थिक बोझ बनी हुई है। उन्होंने कहा कि छह माह के बाद टर्म परीक्षाएं हो रही हैं।
इससे शिक्षार्थी और अभिभावक दोनों ही खुश नहीं हैं, क्योंकि एक माह में बच्चों के पेपरों और एक ही माह में पेपरों के चेकिंग में अध्यापकों का समय बर्बाद हो रहा है। ऐसे में चार माह बच्चों की परीक्षा और पेपर चेकिंग में समाप्त हो रहे हैं। इससे अध्यापन कार्य समयानुसार पूर्ण नहीं हो रहा है। इसी तरह वर्ष में दो बार बच्चों को परीक्षा शुल्क और स्कूलों को रिटेंशन फीस जमा करवानी पड़ रही है। इससे अभिभावकों पर दोहरा आर्थिक बोझ पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि टर्म प्रणाली की परीक्षा का नुकसान बच्चों को जेईई मेन और नीट की परीक्षा में उठाना पड़ रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू, शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर से भी मांग की है कि प्रदेश में टर्म प्रणाली को बंद किया जाए। क्योंकि सीबीएसई ने भी इसे बंद कर दिया है। स्कूल शिक्षा बोर्ड के सचिव डॉ. मेजर विशाल शर्मा ने प्रतिनिधि मंडल को आश्वासन दिया कि इस मांग को सरकार के पास भेजा जाएगा।
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इससे शिक्षार्थी और अभिभावक दोनों ही खुश नहीं हैं, क्योंकि एक माह में बच्चों के पेपरों और एक ही माह में पेपरों के चेकिंग में अध्यापकों का समय बर्बाद हो रहा है। ऐसे में चार माह बच्चों की परीक्षा और पेपर चेकिंग में समाप्त हो रहे हैं। इससे अध्यापन कार्य समयानुसार पूर्ण नहीं हो रहा है। इसी तरह वर्ष में दो बार बच्चों को परीक्षा शुल्क और स्कूलों को रिटेंशन फीस जमा करवानी पड़ रही है। इससे अभिभावकों पर दोहरा आर्थिक बोझ पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि टर्म प्रणाली की परीक्षा का नुकसान बच्चों को जेईई मेन और नीट की परीक्षा में उठाना पड़ रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू, शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर से भी मांग की है कि प्रदेश में टर्म प्रणाली को बंद किया जाए। क्योंकि सीबीएसई ने भी इसे बंद कर दिया है। स्कूल शिक्षा बोर्ड के सचिव डॉ. मेजर विशाल शर्मा ने प्रतिनिधि मंडल को आश्वासन दिया कि इस मांग को सरकार के पास भेजा जाएगा।
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