{"_id":"6683e60cab4668185e0c3505","slug":"agneepath-scheme-led-to-shortage-of-soldiers-in-units-verma-hamirpur-hp-news-c-94-1-hmp1001-130753-2024-07-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"अग्निपथ योजना से यूनिटों में आई जवानों की कमी : वर्मा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अग्निपथ योजना से यूनिटों में आई जवानों की कमी : वर्मा
विज्ञापन
संयुक्त मोर्चा ऑफ एक्स सर्विसमैन ने कहा- अन्य कई त्रुटियों के चलते पुनर्विचार अति आवश्यक
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। संयुक्त मोर्चा ऑफ एक्स सर्विसमैन (जेसीओ एवं ओआर) के अध्यक्ष सेवानिवृत्त कैप्टन जगदीश वर्मा ने प्रेस बयान में कहा कि 18वीं लोकसभा के अधिवेशन में विपक्षी नेताओं की ओर से लोकसभा में अग्निपथ योजना के मुद्दे को उठाकर सत्ता पक्ष को इस बारे में जवाब देने के लिए मजबूर कर दिया। वर्तमान सरकार ने जून 2022 को सहस्त्र सेनाओं की लंबे समय से चली आ रही भर्ती प्रणाली की योजना को बंद करके अग्निपथ स्कीम की घोषणा कर दी गई तथा फिर सितंबर 2022 को इसे पूरे भारतवर्ष में लागू कर दिया गया था।
प्रदेश अध्यक्ष कैप्टन जगदीश वर्मा, महासचिव रमेश कुमार तपवाल, कोषाध्यक्ष सूबेदार मेजर रोशन लाल चौहान तथा अन्य ने कहा कि यूनिटों में जवानों की संख्या में इस स्कीम के चलते कमी आई है। इससे सीमा एलएसी और एलओसी पर संचालन करना उतना आसान नहीं रहा है। इस स्कीम पर पुनर्विचार करना अति आवश्यक है। पड़ोसी नेपाल देश ने इस स्कीम को शुरू से ही अस्वीकार कर दिया है जो अपने युवाओं को गोरखा रेजिमेंट में भर्ती होकर नहीं भेज रहे हैं। मोदी सरकार तो इस स्कीम को सेनाओं को युवा रखने का कारण बता रही है परंतु वास्तव में यह रक्षा बजट में वेतन व पेंशन को कम करने का नया साधन प्रयोग में लाया जा रहा है।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। संयुक्त मोर्चा ऑफ एक्स सर्विसमैन (जेसीओ एवं ओआर) के अध्यक्ष सेवानिवृत्त कैप्टन जगदीश वर्मा ने प्रेस बयान में कहा कि 18वीं लोकसभा के अधिवेशन में विपक्षी नेताओं की ओर से लोकसभा में अग्निपथ योजना के मुद्दे को उठाकर सत्ता पक्ष को इस बारे में जवाब देने के लिए मजबूर कर दिया। वर्तमान सरकार ने जून 2022 को सहस्त्र सेनाओं की लंबे समय से चली आ रही भर्ती प्रणाली की योजना को बंद करके अग्निपथ स्कीम की घोषणा कर दी गई तथा फिर सितंबर 2022 को इसे पूरे भारतवर्ष में लागू कर दिया गया था।
प्रदेश अध्यक्ष कैप्टन जगदीश वर्मा, महासचिव रमेश कुमार तपवाल, कोषाध्यक्ष सूबेदार मेजर रोशन लाल चौहान तथा अन्य ने कहा कि यूनिटों में जवानों की संख्या में इस स्कीम के चलते कमी आई है। इससे सीमा एलएसी और एलओसी पर संचालन करना उतना आसान नहीं रहा है। इस स्कीम पर पुनर्विचार करना अति आवश्यक है। पड़ोसी नेपाल देश ने इस स्कीम को शुरू से ही अस्वीकार कर दिया है जो अपने युवाओं को गोरखा रेजिमेंट में भर्ती होकर नहीं भेज रहे हैं। मोदी सरकार तो इस स्कीम को सेनाओं को युवा रखने का कारण बता रही है परंतु वास्तव में यह रक्षा बजट में वेतन व पेंशन को कम करने का नया साधन प्रयोग में लाया जा रहा है।
विज्ञापन