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पानी के बिल देखकर लोगों के होश उड़े
Hamirpur
Updated Sun, 21 Sep 2014 05:32 AM IST
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चौरी (हमीरपुर)। चौरी क्षेत्र में आईपीएच विभाग द्वारा थमाए गए पानी के बिलों को देखकर लोगों के होश उड़ गए हैं। किसी को एक हजार रुपये तो किसी को 12 सौ रुपये बिल थमाए जा रहे हैं। किसी के नाम पर दो-दो बार बिल काट दिए गए हैं। बिल की अदायगी करने पर रसीद भी नहीं दी जा रही है। लोगों ने विभाग के कर्मचारियों से इस बारे में जानना चाहा तो कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल पाया। अब बिलों को देख लोग असमंजस में हैं।
सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में हर माह 23.60 रुपये के हिसाब से पानी का बिल लिया जाता है। बिल छह माह के अंतराल पर दिया जाता है। कई क्षेत्रों में कर्मचारियों की कमी के चलते बिल एक या दो साल भी दिए जाते हैं। विभाग छह माह के बाद बिल देता है तो करीब 142 रुपये बिल बनता है। एक साल का बिल करीब 284 रुपये बनता है। वहीं यदि दो साल का बिल जोड़ लिया जाए तो करीब 567 रुपये बनता है। विभागीय कर्मचारी तर्क दे रहे हैं कि किसी को एक किसी को दो साल का बिल आया है, लेकिन दो वर्ष का बिल भी 567 रुपये से ज्यादा नहीं बनता है। फिर लोगों को एक हजार से 12 सौ रुपये के बीच बिल कैसे आया।
ग्रामीणों जगत राम, कृष्ण दास, अशोक कुमार, संसार चंद, बलजीत सिंह, मस्त राम, कुशल देव, मीना कुमारी व इंदु कुमारी आदि ने बताया कि विभाग द्वारा भारी भरकम बिल दिए जा रहे हैं। अदायगी करने पर जमा करवाए गए पैसों की पूरी रसीद भी नहीं दी जा रही है। लोगों ने आईपीएच विभाग की कार्यप्रणाली पर रोष जताया है।
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उधर, एसडीओ सतीश शर्मा का कहना है कि किसी भी उपभोक्ता को 325 रुपये से ज्यादा बिल नहीं दिया गया है। किसी को ज्यादा बिल आया होगा तो वह पिछला बकाया होगा। फिर भी यदि किसी के बिल में कोई त्रुटि हो गई हो तो वह सोमवार को कार्यालय आकर सही करवा सकता है। लोगों से अपील की कि समय पर बिल जमा करवाएं।
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सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में हर माह 23.60 रुपये के हिसाब से पानी का बिल लिया जाता है। बिल छह माह के अंतराल पर दिया जाता है। कई क्षेत्रों में कर्मचारियों की कमी के चलते बिल एक या दो साल भी दिए जाते हैं। विभाग छह माह के बाद बिल देता है तो करीब 142 रुपये बिल बनता है। एक साल का बिल करीब 284 रुपये बनता है। वहीं यदि दो साल का बिल जोड़ लिया जाए तो करीब 567 रुपये बनता है। विभागीय कर्मचारी तर्क दे रहे हैं कि किसी को एक किसी को दो साल का बिल आया है, लेकिन दो वर्ष का बिल भी 567 रुपये से ज्यादा नहीं बनता है। फिर लोगों को एक हजार से 12 सौ रुपये के बीच बिल कैसे आया।
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ग्रामीणों जगत राम, कृष्ण दास, अशोक कुमार, संसार चंद, बलजीत सिंह, मस्त राम, कुशल देव, मीना कुमारी व इंदु कुमारी आदि ने बताया कि विभाग द्वारा भारी भरकम बिल दिए जा रहे हैं। अदायगी करने पर जमा करवाए गए पैसों की पूरी रसीद भी नहीं दी जा रही है। लोगों ने आईपीएच विभाग की कार्यप्रणाली पर रोष जताया है।
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उधर, एसडीओ सतीश शर्मा का कहना है कि किसी भी उपभोक्ता को 325 रुपये से ज्यादा बिल नहीं दिया गया है। किसी को ज्यादा बिल आया होगा तो वह पिछला बकाया होगा। फिर भी यदि किसी के बिल में कोई त्रुटि हो गई हो तो वह सोमवार को कार्यालय आकर सही करवा सकता है। लोगों से अपील की कि समय पर बिल जमा करवाएं।