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पार्थिव देह घर पहुंचते ही बेसुध हो गईं पत्नी और मां
Updated Mon, 01 Jan 2018 09:49 PM IST
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सीआरपीएफ के शहीद की पत्नी घर पर विलाप करती हुई।
- फोटो : अमर उजाला
अमर उजाला ब्यूरो
भोरंज (हमीरपुर)। उपमंडल भोरंज के टिक्कर खतरियां के शहीद सीआरपीएफ जवान कुलदीप राय की पार्थिव देह के सोमवार को घर पहुंचते ही शहीद की धर्मपत्नी मीना कुमारी और बुजुर्ग मां सुंदरी देवी बेसुध हो गईं। नववर्ष पर कुलदीप राय की शहादत परिजनों को ताउम्र कभी न भुलाने वाले गहरे जख्म दे गई। सोमवार दोपहर एक बजे सीआरपीएफ की टुकड़ी शहीद कुलदीप राय की पार्थिव देह लेकर पहुंची तो सारा माहौल गमगीन हो गया। घर पर चीखो पुकार से वहां मौजूद लोग भी अपने आंसुओं को नहीं रोक पाए। बुजुर्ग माता और धर्मपत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं, शहीद के तीनों बेटे नीरज कुमार, ऋषभ और निखिल कुमार और शहीद के भाई विशन दास, राज कुमार और भाभियां भी मौत की खबर पाकर बेसुध थीं। घर पर कोई भी यह मानने को तैयार नहीं था कि कुलदीप राय अब इस दुनिया में नहीं रहे हैं। चूंकि 3 दिसंबर को ही वह छुट्टियां काटने के बाद जम्मू कश्मीर स्थित अपने सीआरपीएफ ट्रेनिंग कैंप के लिए गए थे। छुट्टियों के दौरान घर पर परिवार के सदस्यों के साथ बिताए दिन परिजनों को आज भी ताजा ही लग रहे थे। जम्मू कश्मीर के अबंतीपुरा के लैथापोरा में सीआरपीएफ ट्रेनिंग सेंटर पर हुए आतंकवादी हमले में पांच जवान शहीद हुए हैं। इसमें जिला हमीरपुर के जांबाज कुलदीप राय भी शामिल हैं। हालांकि, कुलदीप राय की मौत ड्यूटी के दौरान ही हृदयगति रुकने से बताई जा रही है। सोमवार को दोपहर बाद करीब एक बजे उनके पैतृक गांव टिक्कर खतरियां में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया गया। शहीद के बड़े बेटे नीरज ने उनकी चिता को मुखाग्नि दी। सीआरपीएफ की टुकड़ी ने उन्हें 21 तोपों की सलामी दी। 56 वर्षीय शहीद कुलदीप राय वर्ष 1983 में सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे और दो साल के बाद उन्होंने सेवानिवृत्त होना था।
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भोरंज (हमीरपुर)। उपमंडल भोरंज के टिक्कर खतरियां के शहीद सीआरपीएफ जवान कुलदीप राय की पार्थिव देह के सोमवार को घर पहुंचते ही शहीद की धर्मपत्नी मीना कुमारी और बुजुर्ग मां सुंदरी देवी बेसुध हो गईं। नववर्ष पर कुलदीप राय की शहादत परिजनों को ताउम्र कभी न भुलाने वाले गहरे जख्म दे गई। सोमवार दोपहर एक बजे सीआरपीएफ की टुकड़ी शहीद कुलदीप राय की पार्थिव देह लेकर पहुंची तो सारा माहौल गमगीन हो गया। घर पर चीखो पुकार से वहां मौजूद लोग भी अपने आंसुओं को नहीं रोक पाए। बुजुर्ग माता और धर्मपत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं, शहीद के तीनों बेटे नीरज कुमार, ऋषभ और निखिल कुमार और शहीद के भाई विशन दास, राज कुमार और भाभियां भी मौत की खबर पाकर बेसुध थीं। घर पर कोई भी यह मानने को तैयार नहीं था कि कुलदीप राय अब इस दुनिया में नहीं रहे हैं। चूंकि 3 दिसंबर को ही वह छुट्टियां काटने के बाद जम्मू कश्मीर स्थित अपने सीआरपीएफ ट्रेनिंग कैंप के लिए गए थे। छुट्टियों के दौरान घर पर परिवार के सदस्यों के साथ बिताए दिन परिजनों को आज भी ताजा ही लग रहे थे। जम्मू कश्मीर के अबंतीपुरा के लैथापोरा में सीआरपीएफ ट्रेनिंग सेंटर पर हुए आतंकवादी हमले में पांच जवान शहीद हुए हैं। इसमें जिला हमीरपुर के जांबाज कुलदीप राय भी शामिल हैं। हालांकि, कुलदीप राय की मौत ड्यूटी के दौरान ही हृदयगति रुकने से बताई जा रही है। सोमवार को दोपहर बाद करीब एक बजे उनके पैतृक गांव टिक्कर खतरियां में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया गया। शहीद के बड़े बेटे नीरज ने उनकी चिता को मुखाग्नि दी। सीआरपीएफ की टुकड़ी ने उन्हें 21 तोपों की सलामी दी। 56 वर्षीय शहीद कुलदीप राय वर्ष 1983 में सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे और दो साल के बाद उन्होंने सेवानिवृत्त होना था।