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ैबिनेट बैठक में आउटसोर्स कर्मचारियों के साथ भेदभाव भड़की यूनियन
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हमीरपुर। प्रदेश आउटसोर्स कर्मचारी यूनियन ने 25 फरवरी को प्रदेश की कैबिनेट बैठक में आउटसोर्स कर्मचारियों के साथ हुए भेदभाव का कड़ा विरोध किया है। यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष यशपाल ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री ने सभी लोगों के लिए सुविधाएं दीं पर, प्रदेश में कार्य कर रहे आउटसोर्स कर्मचारियों की अनदेखी की है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार 18000 रुपये, समान काम का समान वेतन और मेडिकल ग्रेच्युटी पर बात न करना दर्शाता है कि प्रदेश सरकार आउटसोर्स कर्मचारियों का शोषण ही चाहती है। यशपाल ने कहा कि 13 फरवरी को मुख्यमंत्री ने कहा था कि प्रदेश सरकार आउटसोर्स कर्मचारियों का शोषण नहीं होने देगी।
यूनियन ने प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से आह्वान किया कि जल्द आउटसोर्स कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान किया जाए। यशपाल ने कहा कि 5 से 6 हजार रुपये में गुजारा करना मुश्किल है। प्रधानमंत्री कहते हैं कि एक देश एक कानून है तो फिर आउटसोर्स कर्मचारियों पर यह नियम क्यों लागू नहीं होता। यूनियन ने बिजली बोर्ड की ओर से 686 कंप्यूटर ऑपरेटर और डाटा ऑपरेटर के वेतन में बढ़ोतरी के निर्णय का भी विरोध किया है। यूनियन नेे कहा कि बिजली बोर्ड में बिलिंग, चौकीदार और ड्राइवर सहित अन्य श्रेणियों में भी लोग आउटसोर्स पर कार्य कर रहे हैं। उनका मानदेय भी बढ़ाया जाए। कर्मचारियों को बांटने की कोशिश न की जाए। यूनियन ने कहा कि अगर शीघ्र उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो वह संघर्ष के लिए मजबूर होंगे। इसकी जिम्मेवारी प्रदेश सरकार की होगी।
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यूनियन ने प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से आह्वान किया कि जल्द आउटसोर्स कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान किया जाए। यशपाल ने कहा कि 5 से 6 हजार रुपये में गुजारा करना मुश्किल है। प्रधानमंत्री कहते हैं कि एक देश एक कानून है तो फिर आउटसोर्स कर्मचारियों पर यह नियम क्यों लागू नहीं होता। यूनियन ने बिजली बोर्ड की ओर से 686 कंप्यूटर ऑपरेटर और डाटा ऑपरेटर के वेतन में बढ़ोतरी के निर्णय का भी विरोध किया है। यूनियन नेे कहा कि बिजली बोर्ड में बिलिंग, चौकीदार और ड्राइवर सहित अन्य श्रेणियों में भी लोग आउटसोर्स पर कार्य कर रहे हैं। उनका मानदेय भी बढ़ाया जाए। कर्मचारियों को बांटने की कोशिश न की जाए। यूनियन ने कहा कि अगर शीघ्र उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो वह संघर्ष के लिए मजबूर होंगे। इसकी जिम्मेवारी प्रदेश सरकार की होगी।
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